Karnal News: महीनों पसीना बहाकर फसल उगाने वाले देश के बागवानी किसानों के लिए सबसे बड़ा दर्द कटाई के बाद शुरू होता है। टमाटर, हरी मिर्च और हरी सब्जियों जैसी जल्द खराब होने वाली उपज को अगर सही समय पर बाजार न मिले या आसपास कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था न हो, तो किसानों को औने-पौने दामों में फसल बेचने पर मजबूर होना पड़ता है। किसानों की इसी पुरानी और बड़ी समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए हरियाणा के करनाल स्थित महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय (MHU) ने वैश्विक स्तर पर कदम बढ़ाया है। विश्वविद्यालय ने ब्रिटेन की प्रतिष्ठित ‘ब्रुनेल यूनिवर्सिटी लंदन’ के साथ हाथ मिलाकर ‘सोल टेक’ (SOL TECH) प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है।
बिना बिजली और डीजल के चलेगा सिस्टम, गांवों के पास लगेंगे पोर्टेबल कोल्ड स्टोरेज
वर्तमान समय में संचालित होने वाले पारंपरिक कोल्ड स्टोरेज पूरी तरह से ग्रिड बिजली या फिर भारी-भरकम डीजल जनरेटरों पर निर्भर हैं। इससे न केवल उनका संचालन खर्च काफी बढ़ जाता है, बल्कि दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में बिजली की अनिश्चितता के कारण इन्हें लगाना व्यावहारिक नहीं हो पाता। ‘सोल टेक’ प्रोजेक्ट के तहत वैज्ञानिक सौर ऊर्जा (Solar Energy) से संचालित होने वाले छोटे और मध्यम आकार के ऐसे कोल्ड स्टोरेज मॉडल तैयार कर रहे हैं, जिन्हें सीधे गांवों और स्थानीय मंडियों के नजदीक स्थापित किया जा सकेगा। इससे किसान बाजार में बेहतर भाव मिलने तक अपनी उपज को सुरक्षित रख सकेंगे और उन्हें मजबूरी में फसल फेंकनी नहीं पड़ेगी।
देश में हर साल सड़ जाती हैं 4 से 5 करोड़ टन फसलें, रोकने में मददगार होगी तकनीक
भारत में हर साल कटाई के बाद प्रबंधन (Post-Harvest Management) की समुचित व्यवस्था न होने के कारण आंकड़ों के मुताबिक लगभग 4 से 5 करोड़ टन फल और सब्जियां खेत से मंडी पहुंचने के बीच ही खराब हो जाती हैं। ‘सोल टेक’ प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य इसी विशाल आर्थिक नुकसान को रोकना है। इसके अलावा, वैज्ञानिक सिर्फ स्टोरेज डिजाइन ही नहीं कर रहे, बल्कि हर फसल के स्वभाव के हिसाब से एक वैज्ञानिक डेटाबेस भी तैयार किया जा रहा है। किस सब्जी या फल को कितने डिग्री तापमान और कितनी आर्द्रता (नमी) में कितने दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है, इसके लिए बाकायदा मानक गाइडलाइन जारी की जाएगी।
जलवायु के अनुकूल तैयार हो रहा मॉडल, कुलपति बोले- किसानों की आय बढ़ाने में होगी सहूलियत
दोनों देशों के वैज्ञानिक इस समय भारतीय मैदानी इलाकों की भीषण गर्मी और जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस तकनीक के तकनीकी डिजाइन को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एसके मल्होत्रा ने बताया कि सौर ऊर्जा से चलने वाले ये कोल्ड स्टोरेज किसानों को अपनी उपज रोकने और बाजार के रुख के हिसाब से बेचने की शक्ति देंगे। इससे डीजल और बिजली का खर्च शून्य के बराबर हो जाएगा और किसानों की लागत घटकर मुनाफा सीधा बढ़ेगा।
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