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Karnal mandi dhan ghotala: करनाल धान घोटाला: इंस्पेक्टर समीर वशिष्ठ समेत 5 अधिकारी नौकरी से बर्खास्त, विभाग का बड़ा एक्शन

AAmandeep Singh
करनाल धान घोटाला: इंस्पेक्टर समीर वशिष्ठ समेत 5 अधिकारी नौकरी से बर्खास्त, विभाग का बड़ा एक्शन
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करनाल। हरियाणा के सीएम सिटी रहे करनाल में सरकारी धान की खरीद में हुए बड़े खेल पर आखिरकार प्रशासन का चाबुक चल गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक झटके में 5 अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। बर्खास्त किए गए अफसरों में तरावड़ी मंडी के सब-इंस्पेक्टर रामफल, निसिंग मंडी के इंस्पेक्टर लोकेश, घरौंडा मंडी के इंस्पेक्टर यशवीर सिंह, जुंडला मंडी के इंस्पेक्टर संदीप शर्मा और करनाल मुख्य मंडी के इंस्पेक्टर समीर वशिष्ठ शामिल हैं। विभागीय जांच में इन सभी के खिलाफ गंभीर वित्तीय गड़बड़ी के पुख्ता सबूत मिलने और एफआईआर दर्ज होने के बाद मुख्यालय से यह कड़ा आदेश जारी किया गया है।

कागजों में खरीदी और फर्जी उठान: ऐसे हुआ करोड़ों का खेल

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यह पूरा मामला धान खरीद सीजन के दौरान मंडियों में हुई धांधली से जुड़ा है। शुरुआती शिकायतों के बाद जब भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) कराया गया, तो रिकॉर्ड और गोदामों में मौजूद वास्तविक स्टॉक के बीच जमीन-आसमान का अंतर मिला। जांच के मुताबिक, इन अधिकारियों ने राइस मिलर्स के साथ साठगांठ कर सिर्फ कागजों पर धान की बंपर खरीद दिखाई और उसके एवज में सरकारी भुगतान भी पास करवा दिए, जबकि हकीकत में मंडियों में उतना धान पहुंचा ही नहीं था। कई जगहों पर तो इसके उलट खेल हुआ; धान मंडियों में ही सड़ रहा था लेकिन रिकॉर्ड बुक में उसे मिलों के लिए उठा लिया गया (उठान) दिखा दिया गया। इस कागजी हेरफेर से सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का चूना लगाया गया है।

एसआईटी ने खंगाला रिकॉर्ड, ऑनलाइन डेटा से खुली पोल

घोटाले की गूंज चंडीगढ़ तक पहुंचने के बाद विभागीय आयुक्त के निर्देश पर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया था। इस एसआईटी ने करनाल जिले की सभी प्रभावित मंडियों के पिछले कई महीनों के रिकॉर्ड, मैनुअल स्टॉक रजिस्टर, गेट पास और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन डेटा को आपस में क्रॉस-वेरिफाई किया। जांच रिपोर्ट में साफ हो गया कि बिना किसी उच्च प्रशासनिक मिलीभगत और स्थानीय इंस्पेक्टरों की शह के इतना बड़ा फर्जीवाड़ा मुमकिन नहीं था। एसआईटी द्वारा अपनी फाइनल रिपोर्ट में इन पांचों अधिकारियों की भूमिका को मुख्य सूत्रधार के रूप में चिन्हित करने के बाद विभाग ने बिना वक्त गंवाए इन्हें सेवा से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

राइस मिलर्स और आढ़ती भी रडार पर, अगली लिस्ट जल्द

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के उच्च अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की नीति बिल्कुल साफ है और सरकारी धन का दुरुपयोग करने वाले किसी भी स्तर के कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। करनाल की इस कार्रवाई को केवल एक शुरुआत माना जा रहा है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जांच की आंच अब उन राइस मिलर्स और आढ़तियों तक पहुंच रही है, जिन्होंने इन अधिकारियों के साथ मिलकर इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। पुलिस और विभागीय एजेंसियां अब इन निजी प्लेयर्स के बैंक खातों और मिलों के स्टॉक को खंगाल रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़े रसूखदारों की गिरफ्तारी तय मानी जा रही है।

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