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Karnal Corruption Case: करनाल में 34 करोड़ की सरकारी बिल्डिंग में भ्रष्टाचार, दो एक्सईएन पर गिरी निलंबन की गाज

AAmandeep Singh
Karnal Corruption Case: करनाल में 34 करोड़ की सरकारी बिल्डिंग में भ्रष्टाचार, दो एक्सईएन पर गिरी निलंबन की गाज
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करनाल। सरकारी धन के दुरुपयोग और निर्माण कार्यों में लापरवाही को लेकर सूबे की सरकार इन दिनों जीरो टॉलरेंस के मूड में नजर आ रही है। ताजा मामला करनाल का है, जहां पंचायती राज विभाग की देखरेख में करीब 34 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हो रही जिला परिषद की नई बिल्डिंग में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण की पोल खुली है। इस मामले की गूंज चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के दरबार तक क्या पहुंची, विभाग में हड़कंप मच गया। मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद पंचायती राज विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो कार्यकारी अभियंताओं (XEN) परमिंद्र और नारायण दत्त को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

क्वालिटी कंट्रोल की रेड में खुली पोल, जवाब नहीं दे पाई निर्माण कंपनी

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दरअसल, इस निर्माणाधीन भव्य परिसर के निर्माण की जिम्मेदारी ‘संजय कंस्ट्रक्शन कंपनी’ को सौंपी गई थी। काम की गुणवत्ता को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद पंचायती राज विभाग की क्वालिटी कंट्रोल विंग ने औचक निरीक्षण किया। जांच टीम जब मौके पर पहुंची तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गई। करोड़ों की लागत से बन रहे इस भवन के कई पिलर (खंभे) और लेंटर अभी से ही दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। पिलरों से घटिया सीमेंट की परतें इस कदर उखड़ चुकी हैं कि उनके भीतर इस्तेमाल किया गया लोहे का सरिया साफ-साफ बाहर झांक रहा है। जब जांच टीम ने ठेकेदार कंपनी के नुमाइंदों से इस तकनीकी विफलता पर सवाल-जवाब किए, तो वे कोई संतोषजनक दलील पेश नहीं कर सके।

चीफ इंजीनियर ने लगाई फटकार, जांच के लिए बनी स्पेशल कमेटी

दो बड़े अधिकारियों के सस्पेंशन के बाद पंचायती राज विभाग के चीफ इंजीनियर ने खुद करनाल का रुख किया। उन्होंने मौका-मुआयना करने के बाद स्थानीय अधिकारियों और कंस्ट्रक्शन कंपनी के इंजीनियरों की क्लास लगाई और जमकर फटकार भी लगाई। चीफ इंजीनियर ने साफ किया कि जनता के पैसे की इस तरह बर्बादी और सुरक्षा से खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पूरे मामले की तह तक जाने और जिम्मेदारी तय करने के लिए मुख्यालय स्तर पर एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है। यह कमेटी अब न केवल संजय कंस्ट्रक्शन कंपनी के पिछले रिकॉर्ड और मौजूदा काम के मैटेरियल की लैब टेस्टिंग करेगी, बल्कि इस पूरे प्रोजेक्ट से जुड़े जूनियर इंजीनियर (JE), सब-डिविजनल ऑफिसर (SDO) और अन्य आला अफसरों की भूमिका की भी स्क्रूटनी करेगी कि आखिर उनकी नाक के नीचे इतना घटिया काम कैसे होता रहा।

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