Karnal Visa Fraud: हरियाणा में विदेश जाने की चाहत रखने वाले युवाओं को ठगने वाले एजेंट किस हद तक शातिर हो चुके हैं, इसकी एक बानगी करनाल में देखने को मिली है। यहां एक पिता को उसके बेटे को स्पेन में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 20 लाख रुपये का चूना लगा दिया गया। आरोपियों ने न सिर्फ फर्जी दस्तावेजों के सहारे मोटी रकम ऐंठी, बल्कि जब पीड़ित परिवार ने पैसे वापस मांगे तो उन्हें बाउंस हुए चेक थमा दिए गए। इस धोखाधड़ी के चलते युवक को चंडीगढ़ पासपोर्ट कार्यालय तक के चक्कर काटने पड़े और भारी मानसिक परेशानी झेलनी पड़ी।
मुगल कैनाल पर हुई थी मुलाकात, ऐसे बुना गया जाल
करनाल के रहने वाले शिकायतकर्ता काला राम पेशे से प्रॉपर्टी डीलर हैं। उन्होंने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि 19 सितंबर 2025 को वह अपने बेटे रवि के साथ मुगल कैनाल क्षेत्र में एक दुकान खरीदने गए थे। वहीं पर रवि की मुलाकात उसके दोस्त सौरभ पंचाल के परिचित कपिल से हुई। कपिल ने दावा किया कि उसका करीबी विक्रमजीत सिंह लोगों को विदेश भेजने और वहां नौकरियां दिलाने का काम करता है।
कपिल ने कम खर्च में रवि को यूरोप के स्पेन देश में सुरक्षित भेजने का भरोसा दिलाया। उसने यह भी विश्वास दिलाया कि उसके दो अन्य साथी अभिषेक और गगनदीप सिंह भी इसी एजेंट के जरिए विदेश जा रहे हैं। इसके बाद तीनों को मुगल कैनाल स्थित ‘स्काईलिंक’ कार्यालय ले जाया गया, जहां विक्रमजीत सिंह ने रवि का पासपोर्ट और शैक्षणिक दस्तावेज लेकर स्पेन भेजने का सौदा तय किया। बातचीत के दौरान कुल 20 लाख रुपये में बात पक्की हुई।
बायोमीट्रिक के नाम पर वसूली और गम के माहौल में भी पैसों का दबाव
शुरुआत में आरोपियों ने दिल्ली स्थित स्पेन वीजा आवेदन केंद्र में बायोमीट्रिक करवाने के बहाने प्रक्रिया शुरू की। केंद्र पर कर्मचारियों द्वारा फीस मांगे जाने पर जब विक्रमजीत से संपर्क नहीं हुआ, तो पीड़ित परिवार को अपनी जेब से पैसे देने पड़े। इसके बाद से ही आरोपियों के बहाने शुरू हो गए।
पीड़ित परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब 13 नवंबर 2025 को काला राम के नवजात पोते की मृत्यु हो गई। घर में मातम का माहौल था, लेकिन इसके बावजूद आरोपी विक्रमजीत ने फोन कर रवि का वीजा आने की बात कही और तुरंत पैसे भेजने का दबाव बनाया। परिवार की मजबूरी का फायदा उठाते हुए काला राम ने बैंक खाते और नकद के जरिए किस्तों में कुल 20 लाख रुपये आरोपियों तक पहुंचा दिए। इसमें एक स्थानीय प्रभावशाली व्यक्ति सुभाष का नाम भी सामने आया, जिसने सोलो गांव का रहने वाला बताते हुए भुगतान की गारंटी ली थी।
पोल खुली तो हाथ लगे फर्जी दस्तावेज और बाउंस चेक
मामला तब खुला जब तय तारीख यानी 6 जनवरी और बाद में 22 जनवरी को जब फ्लाइट के बारे में संपर्क किया गया, तो एजेंटों के फोन बंद मिलने लगे। जब परिवार ने वीजा और टिकट की गहनता से जांच करवाई, तो वे पूरी तरह फर्जी निकले।
जब ठगी का शिकार हुए परिवार ने आरोपियों पर शिकंजा कसा, तो कपिल के जरिए उनकी मुलाकात विक्रमजीत और उसकी पत्नी मनप्रीत कौर से आरके पुरम गली नंबर 4 में हुई। वहां बचने के लिए आरोपियों ने काला राम को 10 लाख और मनप्रीत के नाम से 4 लाख रुपये के चेक थमा दिए, जो बैंक में ले जाने पर बाउंस हो गए। पुलिस ने अब इस पूरे सिंडिकेट के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश में जुट गई है।

