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Anuj Russia Death Case: करनाल के अनुज की रूस में मौत: हाथों में बेटे की वर्दी और सामने लाश, पिता का विलाप देख हर आंख रो पड़ी

AAmandeep Singh
करनाल के अनुज की रूस में मौत: हाथों में बेटे की वर्दी और सामने लाश, पिता का विलाप देख हर आंख रो पड़ी
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हरियाणा। हरियाणा के करनाल का चोरा गांव आज एक ऐसी त्रासदी का गवाह बना, जिसे कोई भी पिता कभी नहीं देखना चाहेगा। 21 साल का अनुज, जो पिछले साल बेहतर शिक्षा और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए रूस गया था, आज बेजान शरीर के रूप में घर लौटा। श्मशान घाट के सन्नाटे को चीरती पिता विनोद शर्मा की चीखें व्यवस्था और उन धोखेबाज एजेंटों पर सवालिया निशान लगा रही हैं, जो चंद पैसों के लिए मासूम जिंदगियों को मौत के सौदागरों के हवाले कर देते हैं।

हाथों में वर्दी, आंखों में आंसू: एक पिता की बेबसी

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अंतिम संस्कार के वक्त का मंजर रूह कंपा देने वाला था। अनुज के पिता विनोद शर्मा अपने कलेजे के टुकड़े की चिता के पास बैठे थे। उनके एक हाथ में बेटे की वह ‘रूसी आर्मी’ की वर्दी थी जिसे पहनकर उसने आखिरी सांस ली और दूसरी ओर सामने बेटे की लाश पड़ी थी। विनोद शर्मा ने रुंधे गले से बताया, “हमें अंधेरे में रखा गया। मुझे तो बुधवार शाम को पता चला कि मेरा बेटा अब इस दुनिया में नहीं है। 14 अक्टूबर के बाद उससे कोई बात नहीं हुई थी, हम बस उसकी सलामती की दुआएं मांग रहे थे।”

एजेंटों का मकड़जाल: पढ़ाई के नाम पर युद्ध की आग में झोंका

अनुज के परिजनों का आरोप सीधा और स्पष्ट है—यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश है। परिवार के अनुसार, अनुज स्टडी वीजा पर रूस गया था, लेकिन वहां के एजेंटों ने उसे डरा-धमकाकर या झांसा देकर जबरन रूसी सेना में भर्ती करा दिया। यूक्रेन के साथ चल रही जंग के मोर्चे पर उसे उतार दिया गया, जहां गोली लगने से उसकी मौत हो गई। हरियाणा के कई अन्य युवाओं के भी इसी तरह रूसी सेना में फंसने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, जो विदेश भेजने वाले ‘कबूतरबाजों’ के बढ़ते आतंक की ओर इशारा करती हैं।

गांव में मातम, सिस्टम से सवाल

जैसे ही अनुज का शव गांव पहुंचा, हर आंख नम हो गई। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी रोष है कि सरकार और प्रशासन इन एजेंटों पर लगाम क्यों नहीं कस पा रहे हैं। अनुज तो चला गया, लेकिन उसकी मौत ने उन हजारों मां-बाप के मन में डर पैदा कर दिया है जिनके बच्चे विदेशों में संघर्ष कर रहे हैं। फिलहाल, भारी गमगीन माहौल में अनुज का अंतिम संस्कार कर दिया गया है, लेकिन चोरा गांव की गलियों में गूंजता पिता का विलाप लंबे समय तक इंसाफ की गुहार लगाता रहेगा।

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