Khanna Civil Hospital Pregnancy Death : खन्ना के सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल उस वक्त खुल गई, जब समय पर विशेषज्ञ इलाज न मिलने के कारण सात महीने की गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई।
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रहने वाली इस महिला को गंभीर हालत में खन्ना से पटियाला रेफर किया गया था, लेकिन रास्ते में ही उसकी सांसें थम गईं। इस हृदयविदारक घटना के बाद अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जबकि गरीब परिवार के पास अंतिम संस्कार तक के पैसे न होने पर स्थानीय समाजसेवियों ने मदद का हाथ बढ़ाया।
खन्ना अस्पताल में डॉक्टर न मिलने से बिगड़ी स्थिति
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रहने वाली 22 वर्षीय बेवी अपने परिवार के साथ खन्ना के मिलिट्री ग्राउंड के पास झुग्गियों में रहती थी। शनिवार देर रात अचानक उसकी तबीयत काफी ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद परिजन उसे तुरंत सिविल अस्पताल खन्ना लेकर पहुंचे।
आरोप है कि उस वक्त अस्पताल में कोई भी स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) उपलब्ध नहीं थी। जब तक डॉक्टर तक बात पहुंची और औपचारिकताएं हुईं, तब तक महिला की हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उसे तुरंत पटियाला रेफर कर दिया।
रास्ते में हुई मौत, पोस्टमार्टम भी नहीं हुआ
पटियाला ले जाते समय रास्ते में या अस्पताल पहुंचते ही महिला ने दम तोड़ दिया। समय पर इलाज न मिलने और सही समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर की सेवाएं न होने के कारण गर्भ में पल रहे सात महीने के मासूम बच्चे को भी नहीं बचाया जा सका। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बाद मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता लगाने के लिए कोई पोस्टमार्टम भी नहीं करवाया गया।
समाजसेवियों ने उठाया अंतिम संस्कार का जिम्मा
मृतका का परिवार बेहद दयनीय आर्थिक स्थिति से गुजर रहा है। मजदूरी करने वाले इस परिवार के पास पत्नी और बच्चे की मौत के बाद अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे। ऐसे में खन्ना की सामाजिक संस्थाएं ‘भाई कन्हैया सेवा सोसाइटी’ और ‘नर सेवा नारायण सेवा’ मदद के लिए आगे आईं। समाजसेवियों के सहयोग और प्रयासों से रविवार सुबह खन्ना के श्मशान घाट में मृतका का अंतिम संस्कार किया गया।
अस्पताल प्रशासन की सफाई
इस पूरे मामले पर जब खन्ना के एसएमओ डॉ. मनिंदर सिंह भसीन से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनसे बात नहीं हो सकी। वहीं, ड्यूटी पर तैनात इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (EMO) डॉ. चिराग का कहना है कि जब महिला को लाया गया था तब उसका ऑक्सीजन लेवल बहुत कम था।
उन्होंने दावा किया कि प्राथमिक उपचार देने के साथ ही तुरंत एम्बुलेंस का प्रबंध कर दिया गया था और ऑन-कॉल गायनी डॉक्टर को भी सूचित कर दिया गया था। डॉक्टर का तर्क है कि उनके पहुंचने से पहले ही परिजन मरीज को लेकर एम्बुलेंस से निकल चुके थे, इसलिए इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई।
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