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लाडवा में खूंखार कुत्तों की दरिंदगी: बाड़े में बंधे बछड़े के दोनों कान नोच कर खा गए, फैली दहशत

Jun 09, 2026 4:44 PM

लाडवा (कैलाश गोयल): लाडवा नगरपालिका क्षेत्र में आवारा कुत्तों की बढ़ती तादाद और उनके हिंसक व्यवहार ने स्थानीय निवासियों की रातों की नींद उड़ा दी है। स्थिति अब इस कदर भयावह हो चुकी है कि गलियों में खुलेआम घूमने वाले ये श्वान न सिर्फ इंसानों के लिए काल बन रहे हैं, बल्कि अब बेजुबान मूक पशुओं को भी जिंदा नोचने लगे हैं। सोमवार की देर रात शहर के वार्ड नंबर 7 में आवारा कुत्तों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए एक गोवंश (गाय के बछड़े) को अपना शिकार बनाया और उसके दोनों कानों को नोच-नोच कर खा गए। सुबह जब यह नजारा मकान मालिक ने देखा, तो पूरे मोहल्ले में हड़कंप मच गया।

चारा डालने गए मालिक के उड़े होश, मोहल्ले में पसरा सन्नाटा

पीड़ित पशुपालक मोहन लाल (पुत्र हरि राम) ने रुंधे गले से इस खौफनाक वारदात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रोज की तरह वे रात को अपने पशुओं को बाड़े में ठीक-ठाक हालत में बांधकर सोने गए थे। लेकिन मंगलवार की सुबह जब वे पशुओं को चारा डालने के लिए अहाते में पहुंचे, तो वहां का दृश्य देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

मोहन लाल ने बताया: "बाड़े में बंधा बछड़ा खून से लथपथ तड़प रहा था और उसके सिर के दोनों तरफ के कान पूरी तरह गायब थे। रात के सन्नाटे में आवारा कुत्तों ने उस पर हमला किया और बेजुबान की खाल और कानों को पूरी तरह चबा गए। बछड़े की हालत देखकर ही रूह कांप जाती है। अगर हमारे अपने घरों के भीतर बंधे पशु सुरक्षित नहीं हैं, तो कल को ये कुत्ते हमारे बच्चों को भी अपना निवाला बना सकते हैं।"

जिंदल पार्क से इंद्री चौक तक कुत्तों का 'डेथ ट्रैप'

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लाडवा में आवारा कुत्तों का आतंक कोई नया नहीं है। इससे पहले भी शहर के सबसे व्यस्त ठिकानों जैसे जिंदल पार्क, इंद्री चौक और रिहायशी कॉलोनियों से ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां इन कुत्तों ने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को बुरी तरह काटकर लहूलुहान किया है। आलम यह है कि शाम होते ही सड़कों और मुख्य चौराहों पर 10 से 15 कुत्तों के झुंड जमा हो जाते हैं। इन झुंडों के डर से लोगों ने पार्कों में घूमना और रात के समय पैदल निकलना तक बंद कर दिया है।

कल से शुरू होगा नसबंदी और रेस्क्यू अभियान: नपा सचिव

इस अमानवीय और संवेदनशील मामले के तूल पकड़ने के बाद लाडवा नगरपालिका प्रशासन भी हरकत में आया है। पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नगरपालिका सचिव नीरज सैनी ने कहा कि यह घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और मामला उनके संज्ञान में आ चुका है।

सचिव नीरज सैनी ने कार्ययोजना साझा करते हुए कहा:

"शहर को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए कल से ही एक विशेष अभियान की शुरुआत की जा रही है। इसके लिए बाहर से एक एक्सपर्ट डॉग-कैचर टीम को बुलाया गया है। पकड़े गए कुत्तों का डॉक्टरों की देखरेख में मानवीय और वैज्ञानिक तरीके से स्टेरलाइजेशन (नसबंदी) और एंटी-रेबीज टीकाकरण किया जाएगा। इसके बाद उन्हें लाडवा शहर की सीमा से दूर किसी सुरक्षित और निर्धारित स्थान पर छोड़ दिया जाएगा ताकि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।"

फिलहाल, घायल गोवंश का स्थानीय पशु चिकित्सकों द्वारा इलाज किया जा रहा है, लेकिन इस घटना ने लाडवा के नागरिकों के भीतर छिपे उस डर को दोबारा जगा दिया है जो वे हर रोज सड़कों पर महसूस करते हैं।

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