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LPG e-KYC Mandatory,: LPG e-KYC की खबरों का सच: मंत्रालय ने दी सफाई, जानें किसे कराना होगा सत्यापन और किसे नहीं

AAmandeep Singh
LPG e-KYC की खबरों का सच: मंत्रालय ने दी सफाई, जानें किसे कराना होगा सत्यापन और किसे नहीं
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दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह चर्चा गरम थी कि अगर तुरंत ई-केवाईसी नहीं कराई गई तो गैस कनेक्शन कट जाएगा या भारी जुर्माना लगेगा। इन खबरों ने गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की भारी भीड़ जमा कर दी थी।

अब नई दिल्ली स्थित पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर इन तमाम आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आधार आधारित ई-केवाईसी (e-KYC) एक नियमित प्रक्रिया है। यह मुख्य रूप से उन उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य की गई है जो सरकारी सब्सिडी का लाभ उठा रहे हैं और जिनका डेटा अब तक अपडेट नहीं हुआ है। अगर आपका कनेक्शन सुचारू है और सब्सिडी आ रही है, तो हड़बड़ाने की आवश्यकता नहीं है।

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क्यों जरूरी है केवाईसी? सीधे आपके खाते से जुड़ा है मामला

सरकार का तर्क है कि ई-केवाईसी के जरिए उन ‘फर्जी’ या ‘दोहरे’ कनेक्शनों की पहचान की जा रही है जो अवैध रूप से सब्सिडी का लाभ उठा रहे हैं। वास्तविक उपभोक्ताओं को इसका लाभ सुचारू रूप से मिलता रहे, इसीलिए आधार सत्यापन को अनिवार्य बनाया गया है।

यदि कोई पात्र उपभोक्ता इसे समय पर पूरा नहीं करता है, तो भविष्य में उसके बैंक खाते में आने वाली सब्सिडी राशि रोकी जा सकती है। राहत की बात यह है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है और इसके लिए आपको दफ्तरों के चक्कर काटने की मजबूरी नहीं है। सरकार ने इसे ‘फेस ऑथेंटिकेशन’ और ओटीपी (OTP) के जरिए इतना सरल बना दिया है कि एक स्मार्टफोन यूजर इसे 5 मिनट में खुद कर सकता है।

डिजिटल समाधान: ऐप और वेबसाइट से ऐसे होगा वेरिफिकेशन

उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए मंत्रालय ने ऑनलाइन तरीके भी साझा किए हैं। आप अपनी संबंधित गैस कंपनी (HP, Indane या Bharat Gas) का आधिकारिक मोबाइल ऐप डाउनलोड करके ‘आधार ई-केवाईसी’ विकल्प पर जा सकते हैं। इसके लिए ‘आधार फेस आरडी’ ऐप की मदद से लाइव फोटो खींचकर चेहरा स्कैन करना होता है।

इसके अलावा, आधिकारिक वेबसाइट ‘My LPG’ पर जाकर भी ओटीपी के जरिए बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा सकता है। बस ध्यान रहे कि आपका मोबाइल नंबर आधार से लिंक होना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि गैस वितरण प्रणाली में होने वाली कालाबाजारी पर भी लगाम लगेगी।

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