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लखनऊ झुग्गी बस्ती अग्निकांड: बेघसर हुए लोग मलबे में तलाश रहे सामान, सैकड़ों परिवार खुले में रहने को मजबूर

VVinita Kohli
लखनऊ  झुग्गी बस्ती अग्निकांड: बेघसर हुए लोग मलबे में तलाश रहे सामान, सैकड़ों परिवार खुले में रहने को मजबूर
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकास नगर इलाके में बुधवार शाम लगी भीषण आग ने करीब 200 झुग्गियों को पूरी तरह तबाह कर दिया, जिससे सैकड़ों लोग बेघर हो गए। बृहस्पतिवार और शुक्रवार की दरम्यानी रात तक जली हुई बस्ती के अवशेष इस हादसे की भयावहता बयान करते रहे। मौके पर पहुंचे लोगों ने बताया कि कई परिवार अब भी वहीं खुले में रहकर अपने बचे-खुचे सामान की रखवाली कर रहे हैं। अधिकारियों ने दो छोटे बच्चों की मौत की पुष्टि की है, जबकि कुछ मवेशियों के भी जलने की आशंका जताई गई है।

जली जमीन पर गुजारी रातें

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आग के बाद से कई परिवारों ने सुरक्षित स्थान पर जाने के बजाय अपनी झुग्गियों के पास ही रहने का फैसला किया है। लोगों का कहना है कि अगर वे यहां से हटते हैं तो बचा हुआ सामान भी चोरी या नष्ट हो सकता है। रात के समय कई परिवार खुले आसमान के नीचे या कबाड़ से बनाए अस्थायी ढांचों में सोते दिखाई दिए। जली हुई जमीन और राख के बीच लोग अपने जीवन को फिर से संभालने की कोशिश कर रहे हैं।

मलबे में तलाशते उम्मीद

आग के अगले दिन बड़ी संख्या में लोग अपने घरों के अवशेषों में जरूरी सामान ढूंढने लौटे। हालांकि उन्हें ज्यादातर जले हुए बर्तन, मुड़ी-तुड़ी धातु और टूटी संरचनाएं ही मिलीं। नगर निगम की टीमें लगातार मलबा हटाने में जुटी हैं। एक सफाईकर्मी ने बताया कि काम दिन-रात जारी है, ताकि इलाके को जल्द साफ किया जा सके और राहत कार्य तेज हो सके।

पीड़ितों की आपबीती

घटना के बाद कई परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। डीजे बैंड में काम करने वाले अंकित और गोलू जैसे युवा जली हुई अलमारी के पास रात बिताने को मजबूर हैं। गोलू ने बताया कि उसकी झोपड़ी पूरी तरह जल गई और हाल ही में खरीदा स्मार्टफोन भी नष्ट हो गया, जिसकी अभी एक ही किस्त भरी थी। वहीं शिवम नामक युवक ने बताया कि जब वह ड्यूटी से लौटा तो उसका घर पूरी तरह जल चुका था और अब उसके पास पैसे भी नहीं बचे हैं।

राहत पहुंचा रहे स्वयंसेवक

घटना के बाद स्थानीय स्वयंसेवकों और संगठनों ने राहत कार्य संभाला है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थानीय इकाई के कार्यकर्ता लगातार भोजन, पानी और कपड़े वितरित कर रहे हैं। इसके अलावा आसपास के लोगों ने भी आगे आकर मदद की। मुंशी पुलिया क्षेत्र के एक रेस्तरां संचालक ने अपने साथियों के साथ मिलकर बच्चों के लिए दूध और खाने के पैकेट बांटे। कई अन्य समूह भी जरूरतमंदों तक मदद पहुंचा रहे हैं।

छत की सबसे बड़ी जरूरत

हालांकि भोजन और पानी की कमी फिलहाल नहीं है, लेकिन प्रभावित परिवारों को सबसे ज्यादा जरूरत सिर छुपाने की है। कई लोगों ने कहा कि उनके पास खुले में सोने के लिए भी पर्याप्त साधन नहीं हैं। स्वयंसेवी संस्थाएं चादर और तिरपाल जैसी जरूरी चीजें पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। एक महिला ने कहा कि सब कुछ खत्म हो गया है और अब उन्हें तुरंत रहने के लिए जगह चाहिए।

जांच जारी, कारण अस्पष्ट

अधिकारियों ने आग की घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। फिलहाल आग लगने के कारण का पता नहीं चल पाया है। प्रशासन का कहना है कि राहत और पुनर्वास कार्य जारी हैं और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद देने की कोशिश की जा रही है। वहीं स्थानीय लोग भी उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें जल्द स्थायी सहायता और पुनर्वास मिलेगा।

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