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अक्टूबर से रुकी पेंशन पर लोकसभा में मनीष तिवारी ने उठाया मुद्दा, तुरंत फंड जारी करने और सैनिकों की टैक्स छूट बहाल करने की रखी मांग

VVinita Kohli
अक्टूबर से रुकी पेंशन पर लोकसभा में मनीष तिवारी ने उठाया मुद्दा, तुरंत फंड जारी करने और सैनिकों की टैक्स छूट बहाल करने की रखी मांग
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चंडीगढ़: सांसद मनीष तिवारी ने चंडीगढ़ में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए अक्टूबर 2025 से धनराशि जारी न होने पर लोकसभा में कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि सीधे केंद्र सरकार के अधीन आने वाले इस केंद्र शासित प्रदेश को हर साल केंद्रीय बजट में हजारों करोड़ रुपये मिलते हैं, इसके बावजूद सबसे कमजोर वर्गों तक पेंशन नहीं पहुंच पा रही है। लोकसभा में अपनी बात रखते हुए तिवारी ने कहा कि वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन के लाभार्थियों को महीनों से भुगतान नहीं मिला है। लोगों को यह कहा जा रहा है कि फिलहाल बजट उपलब्ध नहीं है और संभवतः मई में धन जारी किया जाएगा। उन्होंने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि जरूरतमंद नागरिकों को इंतजार करवाना प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है।

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सांसद ने यह भी ध्यान दिलाया कि चंडीगढ़ में पेंशन की राशि मात्र एक हजार रुपये है, जो पड़ोसी राज्यों से काफी कम है। उनके अनुसार पंजाब में यह राशि 1500 रुपये और हरियाणा में 3500 रुपये तक दी जा रही है। ऐसे में चंडीगढ़ के बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। तिवारी ने पूर्व सैनिकों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि शहर में बड़ी संख्या में ऐसे सैनिक रहते हैं जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए बहादुरी से सेवा दी है। लेकिन फाइनेंस बिल 2026 में सेवा तत्व और विकलांगता पर आयकर छूट को सीमित कर देना उनके साथ अन्याय है। उन्होंने इसे समानता के अधिकार की भावना के विपरीत बताते हुए सरकार से पुनर्विचार की मांग की। सांसद ने केंद्र के समक्ष दो स्पष्ट मांगें रखीं—पहली, सामाजिक सुरक्षा पेंशन की लंबित राशि तुरंत जारी की जाए; और दूसरी, फाइनेंस बिल पर चर्चा के दौरान सैनिकों को मिलने वाली आयकर छूट को पूर्ण रूप से बहाल किया जाए। तिवारी ने कहा कि यह कदम देश की सेवा करने वालों के सम्मान और भरोसे को मजबूत करेगा।

लोकसभा में उठे इंडस्ट्रियल मुद्दों पर केंद्र ने जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन पर डाली

चंडीगढ़। शहर के इंडस्ट्रियल एरिया से जुड़े वर्षों पुराने मसलों पर केंद्र सरकार के ताजा जवाब ने उद्योग जगत को खास राहत नहीं दी है। मनीष तिवारी द्वारा लोकसभा में उठाए गए प्रश्नों के उत्तर में सरकार ने कहा कि इन अधिकांश विषयों पर अधिकार चंडीगढ़ प्रशासन और गृह मंत्रालय के पास है। सांसद ने फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) की सीमा, लीज आधारित स्वामित्व, टाइटल की खामियां, भवन उल्लंघन नोटिस और वन-टाइम एमनेस्टी स्कीम जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए थे। जवाब में बताया गया कि पहले 0.5 एफएआर था, जिसे बढ़ाकर अलग-अलग श्रेणियों में 0.75/1.00 तक किया गया है। साथ ही विकास मानकों को अधिक लचीला बनाने के लिए हाल ही में एक समिति गठित कर नियमों की समीक्षा शुरू की गई है। हालांकि, अंतिम निर्णय या समयसीमा पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई। 

इंडस्ट्रियल और कमर्शियल प्लॉट्स को फ्रीहोल्ड में बदलने के प्रस्ताव पर केंद्र ने दो टूक कहा कि यह विषय स्थानीय प्रशासन और गृह मंत्रालय के अधीन है, और मंत्रालय पहले ही ऐसे प्रस्ताव से सहमत नहीं हुआ है। नियमितीकरण के मामलों को कानूनों के तहत अलग-अलग आधार पर ही देखा जाएगा। भवन उल्लंघनों के लिए फिलहाल किसी प्रकार की माफी योजना लागू नहीं है। दंड प्रावधानों में बदलाव का प्रस्ताव विचाराधीन जरूर है, लेकिन उस पर भी निर्णय लंबित है। सरकार के उत्तर पर प्रतिक्रिया देते हुए तिवारी ने कहा कि बार-बार ध्यान दिलाने के बावजूद समस्याओं के समाधान की दिशा में अपेक्षित राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई नहीं दे रही। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुए तो निवेश और व्यापार की दौड़ में शहर पड़ोसी इलाकों से और पीछे रह जाएगा।

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