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MGNREGA to G RAM G: मनरेगा कानून होगा खत्म, 1 जुलाई से देश में लागू होगी नई 'जी राम जी' रोजगार योजना

AAmandeep Singh
MGNREGA to G RAM G : मनरेगा कानून होगा खत्म, 1 जुलाई से देश में लागू होगी नई 'जी राम जी' रोजगार योजना
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नई दिल्ली। भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना एक बार फिर बड़े बदलाव के मुहाने पर खड़ी है। केंद्र सरकार ने ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आजीविका की पूरी रूपरेखा को री-ब्रांड और री-स्ट्रक्चर करने का मन बना लिया है। दो दशक पुरानी मनरेगा योजना की जगह अब देश में “विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)” यानी संक्षेप में कहें तो ‘जी राम जी’ (VB-G RAM G) योजना लागू होने जा रही है। सरकार का तर्क है कि यह महज एक नाम परिवर्तन नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचल को केवल दिहाड़ी मजदूरी के भरोसे छोड़ने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर और बुनियादी ढांचे से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा वैचारिक नीतिगत बदलाव (Shift) है।

नरेगा से मनरेगा और अब ‘जी राम जी’ तक का सफर

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साल 2005 में जब इस योजना की शुरुआत हुई थी, तब इसे ‘नरेगा’ (राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के नाम से जाना जाता था। इसके बाद साल 2010 में इसके आगे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम जोड़कर इसे ‘मनरेगा’ का नया रूप दिया गया, जिसने मंदी और कोरोना काल जैसे संकटों में ग्रामीण भारत को बिखरने से बचाया। अब, वर्ष 2026 में केंद्र सरकार ने इसे ‘विकसित भारत’ के विजन से जोड़ते हुए ‘जी राम जी’ के रूप में पेश किया है। आधिकारिक घोषणा के मुताबिक, आगामी 1 जुलाई 2026 से यह नया कानून पूरे देश में एक साथ प्रभावी हो जाएगा और इसी तारीख से पुराना मनरेगा एक्ट कानूनी रूप से निष्प्रभावी यानी निरस्त मान लिया जाएगा।

100 दिन की सीमा खत्म, अब 125 दिन मिलेगा सुनिश्चित रोजगार

इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा और सीधा फायदा ग्रामीण मजदूरों को मिलने जा रहा है। अब तक मनरेगा के तहत प्रति परिवार साल में अधिकतम 100 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाती थी, जिसे लेकर अक्सर जमीनी स्तर पर मांग उठती रहती थी कि महंगाई के दौर में यह नाकाफी है। सरकार ने इस जनभावना और जरूरत को समझते हुए नए कानून में कार्य दिवसों की संख्या को बढ़ाकर सीधे 125 दिन कर दिया है। यानी अब परिवारों को साल में करीब चार महीने का मुकम्मल रोजगार मिल सकेगा, जिससे उनकी सालाना आय में सीधा सुधार देखने को मिलेगा।

सिर्फ गड्ढे खोदने का ठप्पा हटेगा, पर्यावरण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा जोर

अक्सर मनरेगा पर यह आलोचनात्मक आरोप लगते रहे हैं कि इसके तहत होने वाले अधिकांश कार्य केवल कागजी या बिना किसी दीर्घकालिक विजन के (जैसे केवल मिट्टी डालना या गड्ढे खोदना) होते हैं। ‘जी राम जी’ मिशन इस धारणा को बदलने की तैयारी में है। नई नीति के तहत अब सारा ध्यान स्थायी संपत्तियों (Permanent Assets) के निर्माण पर होगा। इसमें जल संरक्षण, सुदूर गांवों को जोड़ने वाली पक्की सड़कें, जल सुरक्षा, पर्यावरण संतुलन और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के खतरों से निपटने वाले प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके जरिए गांवों में जल संकट को दूर करने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने का एक बड़ा खाका तैयार किया गया है।

काम नहीं रुकेगा, पुराने कार्ड धारकों को घबराने की जरूरत नहीं

इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बीच सरकार ने उन करोड़ों ग्रामीणों को आश्वस्त किया है जो वर्तमान में इस योजना से अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, संक्रमण काल (Transition Phase) के दौरान जमीन पर चल रहे किसी भी काम को रोका नहीं जाएगा; वे सभी काम स्वतः ही नए मिशन के तहत दर्ज हो जाएंगे। इसके अलावा, जो पुराने जॉब कार्ड इस समय प्रचलन में हैं, वे पूरी तरह वैध रहेंगे। ग्रामीणों को काम पाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी और यह व्यवस्था तब तक सुचारू रूप से चलती रहेगी जब तक कि विभाग की ओर से नए ‘रोजगार गारंटी कार्ड’ (RG Card) चरणबद्ध तरीके से जारी नहीं कर दिए जाते।

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