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दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी बनने के 95वें वर्ष के अवसर पर मोदी ने नये पीएमओ भवन का उद्घाटन किया

JJagmarg Desk
दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी बनने के 95वें वर्ष के अवसर पर मोदी ने नये पीएमओ भवन का उद्घाटन किया
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की नयी इमारत ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन शुक्रवार को उस ऐतिहासिक तिथि पर किया जब नयी दिल्ली को औपचारिक रूप से भारत की आधुनिक राजधानी बनाए जाने के 95 वर्ष पूरे हुए हैं। नई दिल्ली को 13 फरवरी, 1931 को देश की राजधानी बनाए जाने के समारोह के बाद से बहुत कुछ बदल चुका है। भारत को 1947 में स्वतंत्रता मिली, तीन साल बाद देश गणतंत्र बना और वह अब अपनी राह स्वयं तय कर रहा है। इन निर्णायक पड़ावों के दौरान राजधानी के केंद्र में स्थित रायसीना हिल परिसर समय का मूक प्रहरी बनकर खड़ा रहा है।

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प्रधानमंत्री मोदी ने नये परिसर में सेवा तीर्थ की पट्टिका का अनावरण किया

शुक्रवार को यह प्रतिष्ठित स्थल एक और महत्वपूर्ण घटना का साक्षी बना जब इसके ही नजदीक नये पीएमओ भवन का उद्घाटन किया गया। सेवा तीर्थ में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय हैं, जो पहले सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में ही अलग-अलग स्थानों पर स्थित थे। प्रधानमंत्री मोदी ने नये परिसर में सेवा तीर्थ की पट्टिका का अनावरण किया, जिसपर देवनागरी लिपि में नाम अंकित है। इसके नीचे आदर्श वाक्य ‘‘नागरिक देवो भव’’ लिखा है। प्रधानमंत्री का शुक्रवार को ही रायसीना हिल परिसर के पास निर्मित कर्तव्य भवन-एक और दो का भी उद्घाटन करने का कार्यक्रम है। नये कर्तव्य भवन-एक और दो में कानून, रक्षा, वित्त, स्वास्थ्य, कृषि और कई अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालय स्थित होंगे। मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में उद्घाटन की तस्वीरों को साझा करते हुए पोस्ट किया कि देशवासियों की सेवा के अटूट संकल्प और ‘नागरिक देवो भव’ की पावन भावना के तहत, आज ‘सेवा तीर्थ’ को राष्ट्र को समर्पित करने का सौभाग्य मिला।

उन्होंने कहा कि सेवा तीर्थ कर्तव्य, करुणा और राष्ट्र प्रथम के लिए हमारी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। मेरी कामना है कि यह आने वाली पीढ़ियों को निःस्वार्थ सेवा और जन-जन के कल्याण के लिए समर्पित होकर आगे बढ़ने को प्रेरित करता रहेगा। मोदी ने परिसर के उद्घाटन के बाद सेवा तीर्थ में कुछ फाइलों पर हस्ताक्षर किए, जिनसे गरीबों, दलितों, किसानों, युवा शक्ति और नारी शक्ति को सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। यह उद्घाटन महज प्रतीकात्मक नहीं था, क्योंकि नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक 1931 से ही सत्ता के केंद्र थे। नॉर्थ ब्लॉक में गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय स्थित थे, जिनमें से दोनों लगभग ब्रिटिश-युग की इमारत से बाहर स्थानांतरित हो चुके हैं, जबकि साउथ ब्लॉक में रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय स्थित थे। सरकार की योजना नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक में इन प्रतिष्ठित इमारतों को ‘युग युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ में परिवर्तित करने की है, जो भारत की सभ्यतागत यात्रा को दर्शाने वाला एक विश्व स्तरीय संग्रहालय होगा।

जब नयी दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी बनाया गया था तब उसका केंद्र रायसीना हिल परिसर था, जिसमें भव्य वायसरॉय हाउस (अब राष्ट्रपति भवन) और नॉर्थ ब्लॉक एवं साउथ ब्लॉक शामिल थे। नयी राजधानी की आधारशिलाएं एक सदी से अधिक पहले किंग जॉर्ज पंचम और क्वीन मैरी ने रखी थीं और इसका उद्घाटन 13 फरवरी, 1931 को वायसराय लॉर्ड इरविन ने किया था। उस वर्ष उद्घाटन समारोह एक सप्ताह तक चला था। इस दौरान तत्कालीन वायसराय ने 12 फरवरी को ‘ऑल इंडिया वॉर मेमोरियल आर्च’ (जिसे अब इंडिया गेट के नाम से जाना जाता है) का भी उद्घाटन किया था, जिसे प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) और तृतीय आंग्ल-अफगान युद्ध (1919) में शहीद हुए सैनिकों की स्मृति में बनाया गया था।

ब्रिटिश साम्राज्य के सबसे बड़े उपनिवेश भारत की नयी शाही राजधानी स्थापित करने की घोषणा 12 दिसंबर, 1911 को यहां आयोजित एक भव्य औपचारिक ‘दरबार’ में की गई थी। उस समय ब्रिटिश सम्राट किंग जॉर्ज पंचम ने राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की थी। घोषणा के तीन दिन बाद, भारत सरकार के शिविर में एक साधारण समारोह आयोजित किया गया, जहां महाराजा जॉर्ज और महारानी मैरी ने नई राजधानी शहर की दो आधारशिलाएं एक के बाद एक रखी थीं। अभिलेखों के अनुसार, जिन पत्थरों को आधारशिला के तौर पर स्थापित किया गया था उसपर महज ‘15 दिसंबर 1911’ अंकित था।आधारशिला रखने के बाद जॉर्ज पंचम ने कहा था कि मेरी यह इच्छा है कि निर्मित होने वाले सार्वजनिक भवनों की योजना और डिजाइन अत्यंत विचार-विमर्श और सावधानी से बनाया जाए, ताकि यह नई रचना हर तरह से इस प्राचीन और सुंदर शहर के योग्य हो। जॉर्ज पंचम की परिकल्पना के अनुरूप, वास्तुकारों सर एडविन लुटियंस और सर हर्बर्ट बेकर ने ब्रिटिश राज की नई राजधानी का निर्माण किया, जिसकी भव्यता और स्थापत्य कला यूरोप और अमेरिका के सर्वश्रेष्ठ शहरों के समतुल्य थी।

दो विश्व युद्धों के बीच इस शहर को रचाने-बसाने में 20 साल से अधिक का समय लगा। ‘ग्लिटरिंग डिकेड्स: न्यू दिल्ली इन लव एंड वॉर’ नामक पुस्तक के अनुसार, उद्घाटन के दिन, लाल बलुआ पत्थर से बने चार प्रतिष्ठित ‘डोमिनियन’ स्तंभों का अनावरण लॉर्ड इरविन ने तुरही की ध्वनि और ब्रिटिश राष्ट्रगान की धुन के बीच किया था। इन स्तंभों के शीर्ष पर एक जहाज की प्रतिकृति बनी हुई थी। संयोगवश, जॉर्ज पंचम ने 31 दिसंबर, 1926 को इस नये शाही शहर का ‘नई दिल्ली’ नामकरण औपचारिक उद्घाटन से कुछ साल पहले किया। देश की सत्ता के केंद्र सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास परियोजना में एक नया संसद भवन, एक साझा केंद्रीय सचिवालय, राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक फैले तीन किलोमीटर लंबे राजपथ (जिसे 2022 में कर्तव्य पथ नाम दिया गया) का नवीनीकरण, एक नया प्रधानमंत्री आवास और कार्यालय तथा एक नया उपराष्ट्रपति संकुल बनाने की परिकल्पना की गई है।

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