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Mohali News: मोहाली बस स्टैंड की हालत पर गंभीर सवाल, 2 सितंबर को हाई कोर्ट में होगी सुनवाई

Mohali News: मोहाली बस स्टैंड की हालत पर गंभीर सवाल, 2 सितंबर को हाई कोर्ट में होगी सुनवाई

पूर्व डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी समस्या से अवगत करवाते हुए

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VVinita Kohli

Mohali News: मोहाली के बस स्टैंड का बहुचर्चित मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस बस स्टैंड की मौजूदा हालत को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बस स्टैंड से जुड़े कंस्ट्रक्शन, सड़क, पार्किंग, बिजली, पानी और इन्वेस्टर्स के पैसे से जुड़े मुद्दे लंबे समय से पेंडिंग हैं। मोहाली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के पूर्व डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी ने इस मामले को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में केस किया है, जिसकी अगली सुनवाई 2 सितंबर को होनी है। बेदी सोमवार को मौके पर पहुंचे और बस स्टैंड की अलग-अलग जगहों का इंस्पेक्शन किया और वहां मौजूद समस्याओं को सामने लाया। बेदी के मुताबिक, बस स्टैंड का जो मॉडल तैयार किया गया था, उसमें इस इलाके को मॉडर्न और वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर डेवलप करने का प्लान दिखाया गया था।

मॉडल में डबल सड़कें, दुकानें, इन्वेस्टर्स के लिए ऑफिस, पार्किंग और यहां तक कि एक हेलीपैड का भी इंतजाम दिखाया गया था। लेकिन बेदी का कहना है कि असल में इस प्लान का एक बड़ा हिस्सा आज तक पूरा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि बस स्टैंड के एक तरफ की सड़क की हालत खराब हो गई है। सड़क का एक बड़ा हिस्सा मिट्टी में बदल गया है और वहां टीन वगैरह लगाकर ट्रैफिक रोक दिया गया है। दूसरी तरफ, नेशनल हाईवे से सटे हिस्से में सड़क पर दरारें और दूसरी कमियां दिख रही हैं। बेदी ने आशंका जताई कि अगर तेज बारिश हुई तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है और हादसे का खतरा हो सकता है।

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बेसमेंट में जमा है पानी, अनसेफ बोर्ड लगा दिए गए हैं

बस स्टैंड के नीचे बेसमेंट की हालत भी चिंता की बात है। बेदी के मुताबिक, निचले लेवल के बेसमेंट में काफी समय से पानी जमा है और यह हिस्सा अनसेफ हालात की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इसका हल नहीं निकाला गया तो भविष्य में बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इतने बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में रेगुलर बिजली सप्लाई की समस्या अभी भी क्यों है। बेदी के मुताबिक, बस स्टैंड में जनरेटर से काम चलाया जा रहा है, जिस पर बहुत बड़ा खर्च आ रहा है। उन्होंने मांग की कि इस मामले में सरकार और संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए।

 

इन्वेस्टर्स के पैसे का मुद्दा भी उठा

बस स्टैंड प्रोजेक्ट से जुड़े इन्वेस्टर्स का मुद्दा भी सामने आया है। बेदी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट में कई इन्वेस्टर्स ने पैसा लगाया था, लेकिन प्रोजेक्ट अधूरा रहने से उनके इन्वेस्टमेंट पर भी सवाल उठने लगे हैं। उन्होंने कहा कि पहले जिस कंपनी के पास बस स्टैंड का काम था, उसे लेकर भी विवाद हुआ था और कंपनी के हटने के बाद मामला और उलझ गया। अब जो कंपनी प्रोजेक्ट का काम संभाल रही है, उसने ळड।क्। अधिकारियों के साथ मीटिंग भी की। बेदी ने कहा कि मीटिंग से मामला सुलझने की उम्मीद जगी थी और एक और मीटिंग करने की बात हुई थी, लेकिन अगली मीटिंग अभी तक नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों और चीफ एडमिनिस्ट्रेटर के बार-बार बदलने से मामला फिर से शुरुआती स्टेज पर आ जाता है।

 

2016 में हुआ था उद्घाटन

गौरतलब है कि मोहाली बस स्टैंड का उद्घाटन 2016 में उस समय की पंजाब सरकार के समय में हुआ था। उस समय इस प्रोजेक्ट को मॉडर्न सुविधाओं से लैस बस स्टैंड के तौर पर डेवलप करने का प्लान था। लेकिन आज इतने साल बीत जाने के बावजूद प्रोजेक्ट से जुड़े कई अहम हिस्से अधूरे हैं। बेदी ने कहा कि मोहाली जैसे शहर में, जिसे पंजाब की मिनी कैपिटल भी कहा जाता है, एक अच्छे से व्यवस्थित और पूरी तरह से काम करने वाले बस स्टैंड की जरूरत है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले में और देरी करने के बजाय तुरंत फैसला लिया जाए और जो कंपनी अभी प्रोजेक्ट संभाल रही है, उसे तय शर्तों के मुताबिक काम पूरा करने का मौका दिया जाए। अब सबकी निगाहें 2 सितंबर को होने वाली हाई कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। देखना यह है कि कोर्ट की कार्रवाई और ळड।क्। लेवल पर लिए गए फैसलों के बाद मोहाली के लंबे समय से रुके हुए बस स्टैंड प्रोजेक्ट को कोई नई दिशा मिलती है या नहीं।

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