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सांसद राजिंदर गुप्ता ने उठाई आवाज़: राज्यसभा में गूँजा वरिष्ठ नागरिकों के रोजगार अधिकारों का मुद्दा

VVinita Kohli
सांसद राजिंदर गुप्ता ने उठाई आवाज़: राज्यसभा में गूँजा वरिष्ठ नागरिकों के रोजगार अधिकारों का मुद्दा
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बरनाला: पंजाब से राज्यसभा सदस्य पद्मश्री राजेंद्र गुप्ता ने राज्यसभा के शून्यकाल के दौरान देशभर के वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े रोजगार अधिकारों के गंभीर और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे को प्रभावशाली ढंग से उठाया। उन्होंने देश में बड़ी उम्र के नागरिकों के लिए रोजगार संबंधी स्पष्ट नीति और कानूनी सुरक्षा के अभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। सभापति को संबोधित करते हुए पद्मश्री गुप्ता ने कहा कि भारत तेजी से जनसांख्यिकीय बदलाव के दौर से गुजर रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या 14 करोड़ से ऊपर पहुंच चुकी है, जिसके साल 2036 तक बढ़कर लगभग 35 करोड़ होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि देश में औसत जीवन प्रत्याशा अब लगभग 70 वर्ष तक पहुंच गई है। 

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इस प्रकार भारत के पास स्वस्थ, कुशल और अनुभवी वरिष्ठ नागरिकों की एक बड़ी पूंजी मौजूद है, जो पारंपरिक सेवानिवृत्ति की आयु के बाद भी काम करने के इच्छुक और सक्षम हैं। इसके बावजूद, सांसद ने अफसोस जताया कि देश में अभी तक ऐसा कोई मजबूत कानूनी ढांचा मौजूद नहीं है, जो रोजगार में उम्र आधारित भेदभाव को रोक सके या योग्यता के आधार पर रिटायरमेंट के बाद काम करने के अधिकार की गारंटी दे सके। पद्मश्री राजिंदर गुप्ता ने कहा कि भले ही संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 समानता और समान अवसरों की गारंटी देते हैं, लेकिन व्यवहार में आज भी रोजगार के क्षेत्र में उम्र के आधार पर भेदभाव जारी है। रिटायरमेंट के बाद अधिकांश वरिष्ठ नागरिकों को केवल अस्थाई विस्तार या अल्पकालिक अनुबंधों तक ही सीमित रखा जाता है, जहाँ न तो स्थिरता होती है और न ही उचित मान-सम्मान। इसका सबसे अधिक प्रभाव निजी और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले बुजुर्गों पर पड़ता है, जहाँ कानूनी सुरक्षा न के बराबर है।

अन्य देशों की तर्ज पर उठाए जाएं ठोस कदम

विदेशों का उदाहरण देते हुए पद्मश्री गुप्ता ने कहा कि अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और जापान जैसे कई विकसित देशों ने ‘सक्रिय वृद्धावस्था’ को प्रोत्साहित करने वाले कानून बनाए हैं। जापान में, जहाँ लगभग 29 प्रतिशत आबादी 65 वर्ष से अधिक उम्र की है, वहां रोजगार में उम्र आधारित भेदभाव को समाप्त कर दिया गया है। इसी कारण बड़ी उम्र के नागरिक आज भी देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। पद्मश्री गुप्ता ने केंद्र सरकार से मांग की कि समय की नजाकत को समझते हुए इस दिशा में तुरंत ठोस कदम उठाए जाएं और एक विस्तृत कानून तैयार किया जाए।

कानून बनने से होने वाले लाभ

  • रोजगार में उम्र के आधार पर होने वाले भेदभाव पर रोक लग सकेगी।
  • इच्छुक और सक्षम वरिष्ठ नागरिकों को रिटायरमेंट के बाद भी काम करने का अधिकार मिल सकेगा।
  • बड़ी उम्र के लोगों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और लचीले रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकेंगे।
  • उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे सुधार न केवल संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करेंगे, बल्कि देश की बढ़ती हुई बुजुर्ग आबादी की आर्थिक, सामाजिक और बौद्धिक क्षमता का पूरा लाभ उठाने में भी सहायक सिद्ध होंगे।
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