Municipal Council Patti Employee Protest : पट्टी नगर कौंसिल में कर्मचारियों का प्रदर्शन, 3 महीने से नहीं मिला वेतन
पट्टी नगर कौंसिल में कर्मचारियों का प्रदर्शन, 3 महीने से नहीं मिला वेतन
Municipal Council Patti Employee Protest : पंजाब के तरनतारन जिले के पट्टी कस्बे में नगर कौंसिल कर्मचारियों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। 29 सितंबर को नगर कौंसिल दफ्तर के बाहर कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर जोरदार धरना दिया। क्लर्कों को पिछले तीन महीने और आउटसोर्स कर्मचारियों को दो महीने से वेतन न मिलने के कारण दर्जनों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गहरा संकट खड़ा हो गया है।
पट्टी शहर की साफ-सफाई, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था, जलापूर्ति और नागरिक प्रमाण पत्र जारी करने की जिम्मेदारी इन्हीं कर्मचारियों पर निर्भर है। कर्मचारियों के अनिश्चितकालीन प्रदर्शन पर जाने से अब स्थानीय निवासियों के रोजमर्रा के नागरिक कार्य प्रभावित होने की सीधी आशंका बन गई है। यदि यह गतिरोध लंबा खिंचा तो शहर में स्वच्छता व्यवस्था चरमरा सकती है।
दो साल से पीएफ गायब, आर्थिक तंगी से बेहाल हुए कर्मचारी
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने कौंसिल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों से उनके प्रोविडेंट फंड की कटी हुई राशि खातों में जमा ही नहीं कराई गई है। समय पर वेतन न मिलने और पीएफ का अता-पता न होने से मुलाजिमों में भारी रोष व्याप्त है। कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई के इस दौर में उधारी लेकर घर का खर्च चलाना अब मुश्किल हो चुका है।
कौंसिल प्रधान के नेतृत्व में एकजुट हुए कच्चे और पक्के मुलाजिम
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व खुद नगर कौंसिल पट्टी के प्रधान पलवंत राय ने किया। उनके साथ वाइस प्रधान चांद, सचिव गुरनाम सिंह, सलाहकार रोहन अग्नि और पूर्व वाइस प्रधान गोरा समेत कौंसिल के नियमित कर्मचारी, आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा के तहत काम कर रहे मजदूर एक मंच पर एकत्र हुए।
प्रदर्शन के दौरान यूनियन प्रतिनिधियों ने एक सुर में पंजाब सरकार और संबंधित विभाग से मांग की कि रुका हुआ वेतन तुरंत जारी किया जाए। इसके साथ ही पिछले दो सालों की बकाया पीएफ राशि अविलंब जमा कराने और लंबे समय से सेवाएं दे रहे कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग उठाई गई।
मांगें पूरी न होने पर पूरे क्षेत्र में संघर्ष तेज करने का ऐलान
धरने को संबोधित करते हुए कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह तो केवल सांकेतिक विरोध है। यदि संबंधित उच्चाधिकारियों ने उनकी जायज मांगों पर तुरंत संज्ञान नहीं लिया तो इस संघर्ष को और तेज किया जाएगा।
कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि मांगें न माने जाने पर नगर कौंसिल का पूरा कामकाज अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और विभाग की होगी।
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