Narnaul: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के घर में ही में कलह
Narnaul:
धर्म नारायण शर्मा। नारनौल
कांग्रेस पार्टी ने नारनौल के राव नरेंद्र सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेवारी सौंपी है। पिछले एक साल से वे हरियाणा भर में घूम-घूमकर कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाने के काम में जुटे हुए हैं।
अब वह पार्टी को कितना मजबूत कर पाए इसके बारे में अभी पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता, किंतु इतना जरूर है कि प्रदेश संगठन की मजबूती में जुटे राव नरेंद्र सिंह के अपने गृह जिले महेंद्रगढ़ में ही कांग्रेस की संगठनात्मक छवि बुरी तरह बिखर रही है।
यहां पार्टी टुकड़ों में विभाजित है। धड़ेबाजी इस कदर हावी है कि किसी एक गुट द्वारा आयोजित कार्यक्रम से दूसरा गुट दूरी बना लेता है। तो उसके दो दिनों बाद दूसरा धड़ा नारनौल आकर प्रदर्शन कर देता है और पहले वाला धड़ा उसका पार्टी लेवल पर विरोध जता देता है।
पार्टी में चल रही इस खींचातानी का एक उदाहरण यह भी है कि नारनौल, अटेली, नांगल चौधरी क्षेत्र में राव नरेंद्र सिंह के समर्थक ज्यादा सक्रिय हैं। उनके कार्यक्रमों में सामान्यतः राव नरेंद्र सिंह ही दिखाई देते हैं। तो दूसरी तरफ महेंद्रगढ़, सतनाली, कनीना में राव दान सिंह का प्रभाव बना हुआ है।
इसका प्रमाण 2 दिन पहले सतनाली में हुए कांग्रेस ब्लॉक स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में दिखाई दिया। जहां राव दान सिंह की सक्रियता के चलते पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत अनेक वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
सतनाली ब्लॉक के कांग्रेस सम्मेलन में धड़ेबाजी भी खुलकर दिखाई दी। जब पार्टी के जिला अध्यक्ष सत्यवीर झुकिया का मंच पर सम्मान किया जा रहा था तो उनके विरुद्ध टिप्पणी की गई कि उनके अपने गांव झुक में ही राव दान सिंह को वोट नहीं मिले।
हालांकि जिला अध्यक्ष ने बाद में स्पष्ट भी किया कि उनके गांव में इसी बार नहीं, पिछले कई विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जीतती रही है।
बता दें कि जिस समय सत्यवीर झुकिया के सम्मान पर विरोध के कटाक्ष कहे जा रहे थे, तब मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री उपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व सीपीएस राव दान सिंह और अनीता यादव समेत अनेक बड़े चेहरे भी उपस्थित थे।
जानकारी के मुताबिक जिला महेंद्रगढ़ में कांग्रेस राव दान सिंह और राव नरेंद्र सिंह लंबे समय से आपस में तलवारे खींचे बैठे हैं। दोनों ही प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में थे, किंतु रणदीप सुरजेवाला और कुमारी शैलजा के समर्थन से राव नरेंद्र सिंह प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पाने में कामयाब रहे।
दूसरी तरफ जब जिला अध्यक्ष के चुनाव हुए तो राव दान सिंह का धड़ा सुरेंद्र नंबरदार को जिला अध्यक्ष बनना चाहता था, जबकि सत्यवीर झुकिया को राव नरेंद्र सिंह का साथ मिल गया और वह जिला अध्यक्ष बन गए।
गुटबाजी का दूसरा प्रभाव देखें। कहने को तो कांग्रेस ने जिला कार्यकारिणी बना दी है, लेकिन वह कहीं एक्टिव दिखाई नहीं देती। जिले की राजनीति में महेंद्रगढ़ सतनाली और कनीना तक राव दान सिंह का प्रभाव ज्यादा है, तो दूसरी तरफ राव नरेंद्र सिंह, नारनौल, अटेली और नांगल चौधरी क्षेत्र में ज्यादा पकड़ बनाए हुए हैं।
संगठन की बात करें तो जिला अध्यक्ष के ब्लॉक महेंद्रगढ़ में बनाए गए अध्यक्ष तेजपाल प्रजापत अपना त्यागपत्र दे चुके हैं। त्यागपत्र के कारण भी अनेक बताई जा रहे हैं, लेकिन एक कारण बिल्कुल साफ है कि धड़ेबाजी का इस पर पूरा असर है।
नारनौल के मिलन गार्डन में पिछले महीने जब पार्टी के हरियाणा प्रभारी संजय दत्त कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेने आए थे, तब पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता कैलाश पहलवान ने खुले तौर पर कहा था कि हरियाणा में कांग्रेस को मजबूत करने से पहले कांग्रेसियों को मजबूत करो। इनके आपस में सिर जोड़ो। यह एकजुट हो जाएंगे, तो पार्टी मजबूत हो जाएगी और तभी सरकार बनाने के सपने साकार होंगे। हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के गृह जिले के हालात बताते हैं कि गुटों में बटी इस पार्टी को मजबूत बनाने के लिए किसी जादुई चमत्कार की जरूरत है।
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