Narnaul: लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने, अपनी समस्याओं को उठाने, सरकार की नीतियों पर सवाल करने तथा शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का पूरा अधिकार है। यही हमारे लोकतंत्र की ताकत है। लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह कतई नहीं है कि कोई व्यक्ति झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाकर आम जनता को गुमराह करे, किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाए या समाज में तनाव और अराजकता का माहौल पैदा करने का प्रयास करे।
हरियाणा राज्य महिला आयोग की सदस्य भारती सैनी ने सामाजिक सद्भाव, लोकतांत्रिक मर्यादाओं और जिम्मेदार नागरिक व्यवहार पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी विषय पर असहमति होना स्वाभाविक है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात तथ्यों और तर्कों के आधार पर रखने का अधिकार है।
यदि किसी नागरिक को किसी सरकारी निर्णय, प्रशासनिक कार्यवाही या व्यवस्था से शिकायत है, तो उसे संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी एवं लोकतांत्रिक माध्यमों से न्याय प्राप्त करना चाहिए।भारती सैनी ने कहा कि आज सोशल मीडिया और विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए कोई भी सूचना बहुत तेजी से लोगों तक पहुंच जाती है। ऐसे में बिना सत्यापन के किसी खबर, वीडियो, बयान या आरोप को आगे बढ़ाना समाज के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
उन्होंने कहा कि जनता को जागरूक रहना चाहिए और किसी भी विवाद में एकतरफा जानकारी के आधार पर निष्कर्ष निकालने से बचना चाहिए। सच्चाई सामने लाने का सबसे उचित तरीका तथ्यों, दस्तावेजों और निष्पक्ष जांच पर भरोसा करना है।
विरोध का अधिकार है, हिंसा और धमकी का नहीं
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का सम्मान होना चाहिए, लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा, धमकी, तोड़फोड़, जबरन दबाव या सार्वजनिक शांति भंग करने जैसी गतिविधियों को उचित नहीं ठहराया जा सकता। कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होता है। यदि किसी व्यक्ति द्वारा कानून का उल्लंघन किए जाने के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
समाज में शांति, सद्भाव और जिम्मेदारी जरूरी
भारती सैनी ने कहा कि देश की एकता, सामाजिक सद्भाव और आपसी विश्वास बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। राजनीतिक, सामाजिक या प्रशासनिक मतभेदों को संवाद और संवैधानिक तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए। किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक प्रचार से समाज में तनाव उत्पन्न हो सकता है, इसलिए प्रत्येक नागरिक को सूचना साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए।
उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे किसी भी भ्रामक प्रचार का हिस्सा न बनें। अंत में भारती सैनी ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती केवल अपनी बात कहने के अधिकार में नहीं, बल्कि दूसरों के अधिकारों, सम्मान और कानून का पालन करने की जिम्मेदारी में भी निहित है। असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन झूठ, हिंसा और अराजकता किसी भी स्वस्थ समाज का आधार नहीं बन सकते। हमें ऐसा वातावरण बनाना चाहिए, जहां सच को प्रमाणों के आधार पर परखा जाए, हर नागरिक की आवाज सुनी जाए और न्याय तथा कानून का सम्मान सर्वोपरि रहे।
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