Payment Refund Process: UPI से गलती से चले गए ज्यादा पैसे? घबराएं नहीं, इन 4 तरीकों से सीधे अपने बैंक खाते में पाएं रिफंडPayment Refund Process: UPI से गलती से चले गए ज्यादा पैसे? घबराएं नहीं, इन 4 तरीकों से सीधे अपने बैंक खाते में पाएं रिफंड

Payment Refund Process: स्मार्टफोन के एक क्लिक पर पलक झपकते ही होने वाले पैसों के लेन-देन ने हमारी जिंदगी को बेहद रफ्तार दी है। भारत में चाय की टपरी से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल्स तक, यूपीआई भुगतान का सबसे पसंदीदा जरिया बन चुका है। लेकिन सिक्कों के इस डिजिटल रूप का एक दूसरा पहलू भी है। जल्दबाजी, असावधानी या स्क्रीन पर उंगलियों के फिसलने से कई बार लोग 1000 रुपये की जगह 10000 रुपये ट्रांसफर कर बैठते हैं। कई बार तो इस बड़ी चूक का अहसास तब होता है, जब देर रात या अगले दिन बैंक का बैलेंस मैसेज या ट्रांजैक्शन हिस्ट्री देखी जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि डिजिटल हवा में तैरकर किसी और के खाते में जा चुकी आपकी मेहनत की कमाई क्या कभी वापस मिल सकती है? जवाब है— हाँ, लेकिन इसके लिए आपको सही प्रक्रिया की जानकारी होनी चाहिए।

संवाद से समाधान: रिसीवर से बात और बैंक में गुहार

वित्तीय मामलों के जानकार और फिनटेक कंपनी ‘ईजीपे’ (Ezeepay) के सह-संस्थापक व सीईओ शम्स तबरेज कहते हैं, “अगर आपके साथ ऐसा कोई वाक्या होता है, तो सबसे पहला और व्यावहारिक कदम यह होना चाहिए कि आप तुरंत उस नंबर या व्यक्ति से संपर्क साधें जिसके खाते में पैसे गए हैं। उन्हें पूरी बात विनम्रता से समझाएं और अतिरिक्त पैसे रिफंड करने का आग्रह करें।” इसके साथ ही, समानांतर रूप से यूजर को बिना वक्त गंवाए अपने बैंक और संबंधित यूपीआई ऐप (जैसे जीपे, फोनपे या पेटीएम) के कस्टमर सपोर्ट पर जाकर इस ‘गलत ट्रांजैक्शन’ की आधिकारिक शिकायत दर्ज करा देनी चाहिए।

जांच के लिए इन ‘डिजिटल सबूतों’ को रखें महफूज

गलत भुगतान के बाद अपनी रकम की रिकवरी को कानूनी रूप से पुख्ता बनाने के लिए आपके पास कुछ जरूरी रिकॉर्ड होने चाहिए। जब आप बैंक या एनपीसीआई (NPCI) के पोर्टल पर शिकायत दर्ज करेंगे, तो आपसे कुछ जानकारियां मांगी जाएंगी। इसलिए हमेशा नीचे दी गई चीजों को संभालकर रखें:

UPI ट्रांजैक्शन आईडी (12 अंकों का विशिष्ट नंबर)

भुगतान का स्क्रीनशॉट (जिसमें रिसीवर का नाम और बैंक खाता स्पष्ट हो)

डिजिटल पेमेंट रसीद

ट्रांजैक्शन की सटीक तारीख और समय

ये तमाम दस्तावेज बैंक को यह समझने में मदद करते हैं कि यह धोखाधड़ी का मामला नहीं, बल्कि एक मानवीय भूल है।

अगर सामने वाला नीयत बदल ले और पैसे न लौटाए, तब क्या होगा?

यूपीआई के जरिए एक बार ट्रांसफर हो चुका पैसा सीधे तौर पर ‘कैंसिल’ या ‘रिवर्स’ नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट की तरह काम करता है। पैसा वापस आने की समय-सीमा पूरी तरह इस बात पर टिकी होती है कि सामने वाला व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार कर रहा है या नहीं। आम तौर पर इस प्रक्रिया में कुछ दिनों से लेकर तीन-चार हफ्ते का समय लग सकता है।

अब सवाल उठता है कि अगर रिसीवर की नीयत डोल जाए और वह पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दे, या फिर वह उन पैसों को खर्च कर ले, तो पीड़ित यूजर के पास क्या रास्ता बचता है? बैंकिंग नियमों के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति को किसी अन्य की गलती से आए पैसे को अपने पास रखने या इस्तेमाल करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। यदि वह ऐसा करता है, तो यह कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसी स्थिति में, बैंक रिसीवर के खाते पर अस्थायी रोक (Hold) लगा सकता है और लीगल नोटिस के जरिए रकम वापसी का दबाव बना सकता है। यदि इसके बाद भी समाधान न हो, तो पीड़ित व्यक्ति एनपीसीआई के विवाद निवारण सेल (Dispute Redressal Mechanism) या बैंकिंग लोकपाल का दरवाजा खटखटा सकता है।

बढ़ते उपयोग के साथ बढ़े रिस्क; एनपीसीआई के आंकड़े दे रहे गवाही

यूपीआई की लोकप्रियता जिस तेजी से आसमान छू रही है, उसी अनुपात में ऐसे तकनीकी और मानवीय रिस्क भी बढ़े हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा जारी हालिया आंकड़ों पर नजर डालें, तो मई के महीने में देश के भीतर यूपीआई ट्रांजैक्शन ने पुराने सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। इस अवधि के दौरान कुल 23.2 अरब (2,320 करोड़) से अधिक बार लेन-देन हुआ, जिसकी कुल वैल्यू ₹29.90 लाख करोड़ दर्ज की गई। इतने बड़े पैमाने पर हो रहे डिजिटल ट्रांजैक्शन के बीच विशेषज्ञों की केवल एक ही सलाह है— ‘पिन (PIN) दर्ज करने से पहले, स्क्रीन पर लिखी रकम और प्राप्तकर्ता का नाम दोबारा जांचने की आदत ही सबसे बड़ा बचाव है।’

By Jagmarg