Kurukshetra Prakash Utsav Samagam: धर्मनगरी कुरुक्षेत्र का ऐतिहासिक गुरुद्वारा पातशाही छठी इन दिनों पूरी तरह गुरु के रंग में रंगा नजर आ रहा है। मीरी-पीरी के मालिक साहिब श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी महाराज के पवित्र चरण स्पर्श स्थान पर आयोजित प्रकाश उत्सव समागम के तीसरे दिन आस्था का अनूठा सैलाब देखने को मिला।
शुक्रवार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज के सम्मुख चल रहे श्री अखंड पाठ साहिब की पहली लड़ी का भोग पूरे विधि-विधान के साथ डाला गया, जिसके तुरंत बाद दूसरी लड़ी की शुरुआत कर दी गई। इस पावन वेला पर तड़के से ही गुरुद्वारे में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जहां संगत ने कई घंटों तक नाम सिमरन और सेवा कर निहाल किया।
एचएसजीपीसी (HSGMC) के शीर्ष नेतृत्व ने नवाया शीश, प्रबंधों का लिया जायजा

धार्मिक समागम के इस विशेष पड़ाव पर हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झीडा के नेतृत्व में कमेटी के आला पदाधिकारियों और सदस्यों ने गुरु घर में हाजिरी लगाई। प्रधान के साथ संयुक्त सचिव बलविंदर सिंह भिंडर, वरिष्ठ सदस्य बीबी जसबीर कौर मसाना, हरमनप्रीत सिंह, इंद्रजीत सिंह, मोहनजीत सिंह पानीपत, सुखजिंदर सिंह मसाना और भूपेंद्र सिंह लाडी सोकड़ा ने मुख्य दरबार में माथा टेक कर प्रदेश की खुशहाली की अरदास की।
प्रशासनिक और प्रबंधकीय मोर्चे पर व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए कमेटी के मुख्य सचिव जसविंदर सिंह दीनपुर, एडिशनल सेक्रेटरी राजपाल सिंह, नरेंद्र सिंह, सतपाल सिंह डाचर, उप सचिव अमरिंदर सिंह, फ्लाइंग विभाग के इंचार्ज जज सिंह और मैनेजर हरमीत सिंह सहित पूरा स्टाफ मुस्तैद दिखाई दिया।
तपती दुपहरी में शीतल जल की छबील और ‘दस्तार मेरी पहचान’ शिविर बना आकर्षण
जून की इस झुलसा देने वाली गर्मी में भी संगत के सेवा भाव में कोई कमी नहीं दिखी। गुरुद्वारा परिसर और उसके आसपास श्रद्धालुओं द्वारा राहगीरों और संगत के लिए जलजीरे, नींबू पानी और रूहअफ्जा शरबत के अनेक स्टाल लगाए गए। खास बात यह रही कि इन छबीलों पर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों ने खुद खड़े होकर पूरी तन्मयता से सेवा की।
सांस्कृतिक जुड़ाव: श्री गुरु तेग बहादुर जी सेवक जत्था की ओर से युवाओं को सिख विरासत से जोड़ने के लिए ‘दस्तार मेरी पहचान’ नाम से एक विशेष प्रशिक्षण शिविर चलाया जा रहा है। दस्तार कोच सिमरनजीत सिंह और उनकी टीम इस कैंप में आने वाले बच्चों और नौजवानों को न सिर्फ पारंपरिक ढंग से पगड़ी सजाने के गुर सिखा रहे हैं, बल्कि उन्हें सिख इतिहास में दस्तार के धार्मिक और सामाजिक महत्व से भी रूबरू करा रहे हैं।
29 जून को निकलेगा अलौकिक नगर कीर्तन
आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा साझा करते हुए हरियाणा सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झीडा ने बताया कि इस समागम का आकर्षण दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। उन्होंने बताया कि आगामी 28 जून को अखंड पाठ साहिब की दूसरी लड़ी संपन्न होगी, जिसके बाद तीसरी और अंतिम लड़ी की शुरुआत की जाएगी।
समागम के मुख्य पड़ाव के रूप में 29 जून को प्रकाश उत्सव को समर्पित एक विशाल और महान नगर कीर्तन सजाया जाएगा। पारंपरिक पोशाक और शस्त्रों से सुसज्जित पंज प्यारे इस नगर कीर्तन की अगुवाई करेंगे, जिसमें देश के कोने-कोने से आए रागी जत्थे और हजारों की संख्या में संगत शिरकत करेगी।

