Anil Vij On Ram Mandir: हरियाणा के कद्दावर नेता और सूबे के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। इस बार उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर चल रहे विवाद पर विपक्ष को आड़े हाथों लिया है।
पत्रकारों से मुखातिब होते हुए अनिल विज ने विपक्ष के बयानों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज इस मुद्दे पर वही लोग सबसे ज्यादा छाती पीट रहे हैं, जो कल तक भगवान श्रीराम के अस्तित्व और उनके मंदिर निर्माण की राह में रोड़े अटका रहे थे। उन्होंने कहा कि विपक्ष को इस विषय पर दुख नहीं है, बल्कि वे इस बहाने सनातन धर्म और करोड़ों हिंदुओं की आस्था की खिल्ली उड़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
‘न छोड़ेंगे योगी, न छोड़ेंगे मोदी’ — विज ने अपराधियों को दी सख्त चेतावनी
अक्सर अपने कड़े तेवरों के लिए सुर्खियों में रहने वाले अनिल विज ने जांच और कार्रवाई पर भरोसा जताते हुए कहा कि कुछ लोगों को शायद देश की कानून व्यवस्था की ताकत का अंदाजा नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “इन्हें इतनी समझ होनी चाहिए कि राम मंदिर उत्तर प्रदेश में है, जहां कानून के रखवाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं।
और देश की कमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में है। ऐसे में किसी भी दोषी को बख्शने का सवाल ही पैदा नहीं होता।” इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने आगे कहा कि जब माता सीता का हरण हुआ था, तब भी रावण का अहंकार टूटा था और उसके घर में दीया जलाने वाला कोई नहीं बचा था। इस मामले के दोषियों को भी अदालत, कानून और खुद प्रभु श्रीराम की लाठी से ऐसी सजा मिलेगी कि वे बच नहीं पाएंगे।
आंदोलन के जख्मों को याद कर भावुक हुए मंत्री, कहा- ‘हमने झेली हैं पुलिस की लाठियां’
प्रेसवार्ता के दौरान एक वक्त ऐसा भी आया जब हमेशा कड़े मिजाज में दिखने वाले अनिल विज बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौर की अपनी आपबीती साझा करते हुए कहा कि मंदिर बनने की असली खुशी और उसमें आई किसी भी बाधा का असली दुख हमारे जैसे कारसेवकों को होता है। विज ने कहा, “हमने इस मंदिर के लिए 19 दिनों तक जेल की कालकोठरी काटी है, गिरफ्तारियां दी हैं और पुलिस की बर्बर लाठियां खाई हैं।”
अपनी पुरानी चोट का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि आंदोलन के दौरान पुलिस की लाठी उनके सिर पर इतनी जोर से लगी थी कि अंदरूनी चोट के कारण सिर में गांठे पड़ गई थीं। इस दर्द से निजात पाने के लिए उन्हें तीन साल पहले पीजीआई (PGI) में सिर का ऑपरेशन तक करवाना पड़ा था। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने इस आंदोलन के लिए कभी एक खरोंच तक नहीं झेली, वे आज सिर्फ सियासी रोटियां सेकने के लिए हंगामा खड़ा कर रहे हैं।

