Fatehabad News: मां के जिंदा रहते बेटों ने करवाया भव्य ब्रह्मभोज, समाज के सामने पेश की मिसाल
मां के जिंदा रहते बेटों ने करवाया भव्य ब्रह्मभोज, समाज के सामने पेश की मिसाल
Fatehabad News: हरियाणा के फतेहाबाद जिले के भट्टू कलां गांव से सामाजिक ताने-बाने को एक नई और बेहद सकारात्मक दिशा देने वाली खबर आई है। आम तौर पर समाज में किसी व्यक्ति के निधन के बाद मृत्युभोज या ब्रह्मभोज का आयोजन किया जाता है, लेकिन यहाँ एक परिवार ने इस रूढ़िवादी सोच को पूरी तरह बदल दिया। परिवार ने अपनी 80 साल की बुजुर्ग मां खजानी देवी के जीवित रहते हुए ही उनका ब्रह्मभोज आयोजित कर डाला। परिवार का तर्क बेहद सीधा और दिल को छूने वाला है— किसी इंसान के जाने के बाद लाखों रुपये फूंकने और दिखावा करने से कहीं बेहतर है कि उसे जीते जी वह सम्मान, प्यार और आदर दिया जाए, जिसे वह खुद अपनी आंखों से देख सके और महसूस कर सके।
9 लाख का खर्च, हरियाणा-राजस्थान से जुटे रिश्तेदार और अनोखी विदाई
इस अनोखे और भव्य मांगलिक कार्यक्रम को यादगार बनाने में परिवार ने कोई कसर नहीं छोड़ी। करीब 9 लाख रुपये के भारी-भरकम बजट से आयोजित इस उत्सव में शिरकत करने के लिए हरियाणा के अलावा पड़ोसी राज्य राजस्थान से भी बड़ी संख्या में सगे-संबंधी, लाडले और परिचित भट्टू कलां पहुंचे। मेहमानों के लिए तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी। इस आयोजन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि समारोह संपन्न होने के बाद जब मेहमानों की विदाई की गई, तो प्रत्येक अतिथि को सम्मान स्वरूप 3-3 किलो देसी घी के लड्डू भेंट किए गए।
डीजे की धुन पर थिरका परिवार, मां की आंखों में दिखे खुशी के आंसू
यह कोई मातम का नहीं बल्कि एक बुजुर्ग मां के सुखी और भरे-पूरे संसार का उत्सव था। समारोह के दौरान सजे डीजे फ्लोर पर परिवार के बेटों, बहुओं, बेटियों और नाती-पोतों ने जमकर नृत्य किया और खुशियां मनाईं। अपनी ही आंखों के सामने पूरे कुनबे को इस तरह एकजुट और खुशहाल देख बुजुर्ग मां खजानी देवी की आंखें भी आंसुओं से नम हो गईं, जो उनके प्रति बच्चों के अगाध प्रेम को बयां कर रही थीं। पूरा गांव इस पहल की तारीफ करते नहीं थक रहा है।
20 साल पहले उठ गया था पति का साया, औजार बनाने का है पुश्तैनी काम
खजानी देवी के जीवन का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा है। उनके पति मौजूराम का करीब 20 वर्ष पहले ही देहांत हो चुका था, जिसके बाद उन्होंने अकेले ही अपने बड़े परिवार को संभाला। खजानी देवी के कुल 8 बेटे-बेटियां हैं और आज उनके आंगन में 13 पोते-पोतियां और 11 दोहते-दोहितियां खेल रहे हैं। यह परिवार कई पीढ़ियों से लोहे के कृषि और घरेलू औजार बनाने के अपने पारंपरिक और पुश्तैनी व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। अच्छी बात यह है कि 80 वर्ष की उम्र पार करने के बावजूद खजानी देवी आज भी शारीरिक रूप से पूरी तरह तंदुरुस्त हैं और अपने दिनभर के सारे काम खुद ही निपटाती हैं।
