Karnal News: मालिक के परिवार पर आया काल तो ढाल बन गई ‘जिम्मी’, ब्लैक कोबरा से भिड़कर दी जान
करनाल में बेजुबान की अमर वफादारी
Karnal News: कहते हैं कि वफादारी और मुस्तैदी के मामले में इंसानों से कहीं बेहतर बेजुबान जानवर होते हैं, और इस बात को करनाल के निसिंग क्षेत्र में एक पालतू डॉग ने अपनी जान देकर सच साबित कर दिया।
पेशे से डॉक्टर सुमित ठाकर के घर पर रविवार की शाम किसी आम दिन जैसी ही थी, लेकिन कुछ ही पलों में वहां मौत मंडराने लगी। अगर डॉक्टर सुमित की वफादार पालतू कुतिया ‘जिम्मी’ अपनी जान की बाजी न लगाती, तो शायद डॉक्टर के परिवार के साथ कोई बहुत बड़ा और दर्दनाक हादसा हो सकता था। इस जांबाज बेजुबान की मौत के बाद से पूरे इलाके के लोग भावुक हैं।
गेट पर फैलाए फन खड़ा था काल, पट्टा छुड़ाकर भिड़ गए दोनों डॉग्स
घटना रविवार शाम करीब छह बजे की है, जब डॉ. सुमित अपने दो पालतू डॉग्स—9 साल की जिम्मी और महज 1 साल के छोटे मैक्स को रोज की तरह शाम की सैर पर ले जाने के लिए घर के मुख्य गेट पर पहुंचे थे।
डॉक्टर सुमित ने बताया कि अचानक उनकी नजर गेट पर फन फैलाए बैठे एक बेहद खतरनाक ब्लैक कोबरा पर पड़ी। इससे पहले कि डॉक्टर संभल पाते या पीछे हटते, दोनों डॉग्स के पट्टे उनके हाथ से छूट गए। खतरे को भांपते हुए जिम्मी और मैक्स ने बिना एक पल गंवाए सीधे कोबरा को चारों तरफ से घेर लिया।
भावुक होकर डॉ. सुमित ठाकर ने कहा:
“सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि हमें सोचने का मौका ही नहीं मिला। कोबरा लगातार फन मारकर हमला कर रहा था, लेकिन जिम्मी बिना डरे उसके आगे ढाल बनकर डट गई। छोटा मैक्स भी पीछे से सांप को घेरकर उसे आगे बढ़ने से रोक रहा था। जिम्मी के मन में रत्ती भर भी खौफ नहीं था, उसकी आंखों में सिर्फ हमें बचाने की छटपटाहट थी।”
जहर चढ़ता रहा, पर पीछे नहीं हटी जिम्मी
मुकाबले के दौरान जहरीले ब्लैक कोबरा ने जिम्मी के मुंह और पंजे पर कई बार बेहद तीखे और जहरीले वार किए। कोबरा का खतरनाक न्यूरोटॉक्सिक जहर जिम्मी के शरीर में तेजी से फैलने लगा था और उसके पैर लड़खड़ाने लगे थे। इसके बावजूद, इस वफादार जानवर ने हार नहीं मानी।
वह दर्द से कराहते हुए भी बार-बार उठती और सांप पर झपट पड़ती। आखिरकार, जिम्मी के ताबड़तोड़ हमलों से डरकर कोबरा को पीछे हटना पड़ा और वह जान बचाने के लिए एक दीवार के पीछे छिप गया। जिम्मी ने अपने मालिक के घर की दहलीज पार करने से पहले ही मौत को खदेड़ दिया था।
सिर्फ 8 मिनट और थम गईं सांसें, बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल
सांप के छिपते ही तुरंत स्थानीय स्नेकमैन और पशु चिकित्सक को कॉल की गई। स्नेकमैन ने मौके पर पहुंचकर कोबरा को रेस्क्यू किया और सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया, लेकिन तब तक डॉक्टर परिवार की लाडली जिम्मी के पास वक्त खत्म हो चुका था। कोबरा का जहर इतना जानलेवा था कि डसने के महज आठ मिनट के भीतर जिम्मी तड़पने लगी और डॉक्टरों के इलाज शुरू करने से पहले ही उसकी सांसें टूट गईं।
डॉ. सुमित ने बताया कि वे 9 साल पहले जिम्मी को करनाल से एक छोटे पिल्ले के रूप में घर लाए थे। वह घर के सदस्य जैसी थी और उनके तीनों बच्चे दिनभर उसी के साथ खेलते थे। इस जांबाज बेजुबान की बहादुरी का पूरा मंजर घर के सीसीटीवी कैमरे में भी रिकॉर्ड हुआ है, जिसे देखकर हर किसी का कलेजा मुंह को आ रहा है। आज जिम्मी भले ही इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी यह अमर कुर्बानी इस बात की गवाह है कि एक बेजुबान अपने मालिक के ऋण को चुकाने के लिए किस हद तक जा सकता है।
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