Sirsa News: सिरसा में आंगनबाड़ी वर्करों का बड़ा आंदोलन, 8 महीने से नहीं मिला मानदेय, बीपीओ दफ्तर का किया घेराव
किराया न मिलने पर मकान मालिकों ने लगाए आंगनबाड़ियों में ताले
Sirsa News: भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच सिरसा की आंगनबाड़ी वर्कर अपने बच्चों को संभालने के बजाय प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। बुधवार सुबह आंगनबाड़ी वर्कर एसोसिएशन की जिला सचिव प्रोमिला के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाएं बीपीओ कार्यालय के बाहर एकत्र हुईं और परिसर को घेर लिया। वर्करों का कहना है कि वे महीनों से इस उम्मीद में काम कर रही थीं कि सरकार आज नहीं तो कल उनके पेट की आग को समझेगी, लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है।
“जेब से पैसे लगाकर कब तक चलाएं सरकारी व्यवस्था?”
एसोसिएशन की जिला सचिव प्रोमिला ने विभागीय अनदेखी का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए कहा कि आंगनबाड़ी वर्करों का मानदेय राज्य और केंद्र सरकार के संयुक्त अंशदान से आता है। पिछले आठ महीनों से केंद्र सरकार के हिस्से का बजट पूरी तरह गायब है।
एसोसिएशन की जिला सचिव का दर्द:
“मानदेय तो छोड़िए, सरकार ने एक साल से उन कमरों का किराया भी नहीं दिया है जहां ये सेंटर चल रहे हैं। नौबत यह आ गई है कि मकान मालिकों ने अपनी चौखट पर ताले लटका दिए हैं और हमारा रिकॉर्ड व सामान भी अंदर ही बंधक बना हुआ है। सरकारी रजिस्टर तक हमें अपने पैसों से छपवाने पड़ रहे हैं। क्या बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली सरकार के राज में बेटियां ऐसे काम करेंगी?”
वर्करों ने यह भी आरोप लगाया कि ज्यादातर आंगनबाड़ी केंद्रों में बुनियादी सुविधाएं जैसे शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। वहीं, हेल्परों को मिलने वाले यात्रा और दैनिक भत्ते (TA-DA) के वितरण में भी अधिकारी जमकर भेदभाव कर रहे हैं।
आर-पार की लड़ाई का ऐलान: “दबाव बनाया तो भुगतने होंगे नतीजे”
निदेशक (डायरेक्टर) स्तर से मिले उस आश्वासन को लेकर भी वर्करों में भारी आक्रोश दिखा, जिसमें 30 जून तक टीए-डीए, सीबी मीटिंग का पैसा और यूनिफॉर्म (ड्रेस) का सारा बकाया भुगतान चुकता करने का वादा किया गया था। वह समय सीमा बीत जाने के बाद भी जब खातों में फूटी कौड़ी नहीं आई, तो वर्करों ने सीधे तौर पर काम ठप करने की चेतावनी दे दी।
आंदोलनकारी महिलाओं ने स्पष्ट लहजे में कहा है कि:
वे केवल अपनी हाजिरी दर्ज कराने सेंटर जाएंगी, लेकिन कोई अतिरिक्त काम नहीं करेंगी।
जब तक विभाग गैस सिलेंडर रिफिल कराने का पैसा नहीं देता, वे राशन (पोषाहार) नहीं बनाएंगी।
यदि किसी सुपरवाइजर या अधिकारी ने काम के लिए दबाव बनाने की कोशिश की, तो उसे कड़ा विरोध झेलना होगा।
इस जानलेवा गर्मी में यदि किसी वर्कर या बच्चे के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी महिला एवं बाल विकास विभाग की होगी।
कल होने वाली बैठक पर टिकी नजरें
घंटों चले हंगामे और घेराव के बाद प्रशासनिक हलकों में बेचैनी साफ देखी गई। एसोसिएशन के पदाधिकारियों के मुताबिक, प्रदर्शन के बीच ही विभाग की ओर से उनके पास एक आधिकारिक संदेश आया है, जिसमें गुरुवार को यूनियन के प्रतिनिधियों को टेबल टॉक (मीटिंग) के लिए आमंत्रित किया गया है। प्रोमिला ने साफ किया कि वे इस बैठक में शामिल जरूर होंगी, लेकिन जब तक कोई लिखित और ठोस समाधान नहीं निकलता, उनका यह धरना और आंदोलन स्थगित नहीं होगा।
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