Hansi Chanaut Village Clash: हांसी। हरियाणा के हांसी जिले के अंतर्गत आने वाले गांव चानौत में शनिवार की रात अचानक सुलग उठी। भाखड़ा नहर से आ रही मुख्य पेयजल पाइपलाइन में चानौत गांव के लिए अवैध रूप से टी-कनेक्शन (T-Connection) जोड़ने को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों के बीच का विवाद हिंसक टकराव में तब्दील हो गया। शनिवार देर रात जब सिंचाई विभाग और प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ इस अवैध कनेक्शन को काटने पहुंचा, तो ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया। देखते ही देखते माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया और दोनों पक्षों के बीच सीधे तौर पर आमना-सामना शुरू हो गया।
आंसू गैस के गोले दागे, पुलिस पर हुआ पथराव
स्थिति को बेकाबू होता देख मौके पर मौजूद पुलिस बल ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग शुरू कर दिया। ग्रामीणों को खदेड़ने के लिए पुलिस की तरफ से आंसू गैस के गोले भी दागे गए। इसके जवाब में गुस्साए ग्रामीणों ने भी पुलिस पार्टी को निशाना बनाते हुए जमकर पत्थरबाजी की। इस अचानक हुए पथराव में दो पुलिसकर्मियों को गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। वहीं, पुलिसिया कार्रवाई में तीन से चार ग्रामीणों को भी हल्की चोटें लगने की आधिकारिक पुष्टि हुई है। फिलहाल गांव में एहतियातन भारी पुलिस बल तैनात है।
38 दिनों से सुलग रहा था पानी का मुद्दा
दरअसल, चानौत गांव में पीने के पानी का संकट नया नहीं है। गांव के लोग पिछले 38 दिनों से भीषण गर्मी के बीच पर्याप्त पेयजल की मांग को लेकर लगातार धरने पर बैठे हुए थे। ग्रामीणों का सीधा आरोप था कि प्रशासन उनके हिस्से का पानी दबाकर बैठा है और गांव को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं दिया जा रहा। शनिवार शाम को इस लंबे चले आ रहे आंदोलन में उस वक्त नया मोड़ आया, जब धरना स्थल पर एक अज्ञात व्यक्ति पहुंचा। उसने खुद को सरकार का नुमाइंदा बताते हुए धरना कमेटी के सामने बातचीत की टेबल रखी।
आश्वासन पर टूटा अनशन, लेकिन आंदोलन पर अड़े ग्रामीण
कथित सरकारी प्रतिनिधि ने ग्रामीणों से वादा किया कि यदि उनकी पानी की तात्कालिक मांग पूरी कर दी जाए, तो क्या वे अपना आंदोलन वापस ले लेंगे? इस पर धरना कमेटी ने हामी भर दी कि मुख्य मांग पूरी होने पर वे कदम पीछे खींच लेंगे। इसके तुरंत बाद ही भाखड़ा की मेन पाइपलाइन से चानौत के लिए आनन-फानन में टी-कनेक्शन जोड़ दिया गया। इस बड़ी कामयाबी को देखते हुए पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने अपना अनशन तो समाप्त कर दिया, लेकिन विवाद तब बढ़ गया जब प्रशासन ने इसे अवैध माना। इधर, गांव के अन्य धड़ों ने साफ कर दिया है कि जब तक पानी की स्थायी बहाली और बाकी मांगें लिखित में पूरी नहीं होतीं, तब तक धरना स्थल से कोई नहीं हटेगा।

