Sahara International School Ladwa: (कैलाश गोयल) आज के बदलते दौर में बच्चों की शिक्षा सिर्फ स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रह गई है। इसी जमीनी हकीकत को समझते हुए लाडवा के सहारा इंटरनेशनल स्कूल में एक बेहद महत्वपूर्ण शैक्षणिक मंथन हुआ। दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुए इस क्षमता निर्माण कार्यक्रम का मुख्य एजेंडा “शिक्षा के प्रति अभिभावकों को शिक्षित करना” था। कार्यक्रम में इस बात पर आत्ममंथन किया गया कि जब तक माता-पिता स्कूल की नई नीतियों और बच्चों की मानसिक स्थिति को नहीं समझेंगे, तब तक बेहतर परिणाम आना मुमकिन नहीं है। कार्यशाला में लाडवा और आसपास के क्षेत्रों के शिक्षकों ने हिस्सा लिया, जहां उन्हें घर और स्कूल के बीच एक मजबूत सेतु बनाने के व्यावहारिक तरीके सिखाए गए।
एनईपी 2020 और $5+3+3+4$ का फॉर्मूला; रट्टा मार पढ़ाई से आगे की सोच
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में भारत की नई शिक्षा व्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण बदलावों पर बात हुई। रिसोर्स पर्सन्स ने शिक्षकों को समझाया कि अब पारंपरिक रट्टा प्रणाली से हटकर कौशल आधारित मूल्यांकन (Skill-Based Assessment) पर ध्यान केंद्रित करना होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत जो $5+3+3+4$ का नया स्कूली ढांचा तैयार किया गया है, उसकी सफलता पूरी तरह से इस बात पर टिकी है कि शिक्षक इसे अभिभावकों को कितनी सादगी से समझा पाते हैं। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि बच्चे के सर्वांगीण, मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए स्कूल के साथ-साथ घर का माहौल भी उतना ही उत्तरदायी है।
यमुनानगर और लाडवा के प्राचार्यों ने साझा किए अनुभव; संवादात्मक सत्रों से सीखे गुर
इस सेमिनार को समृद्ध बनाने में यमुनानगर के शिवालिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रधानाचार्या डॉ. अंजुमन मक्कर और द आर्यन इंटरनेशनल स्कूल की प्रमुख श्रीमती सपना सिंह की मुख्य भूमिका रही। दोनों ही विशेषज्ञ शिक्षाविदों ने अपने लंबे सांगठनिक अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कई बार अभिभावक अनजाने में बच्चों पर ऐसा दबाव बना देते हैं जो उनके विकास को अवरुद्ध कर देता है। उन्होंने रोल-प्ले और संवादात्मक गतिविधियों (Interactive Sessions) के जरिए शिक्षकों को उन रणनीतियों से रूबरू कराया, जिससे वे पीटीएम (Parent-Teacher Meeting) को केवल रिजल्ट कार्ड बांटने का जरिया न बनाकर एक रचनात्मक चर्चा का मंच बना सकें।
शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी; स्कूल प्रबंधन ने जताया आभार
इस पूरे सत्र के दौरान शिक्षकों का उत्साह देखने लायक था। ग्रुप डिस्कशन और कंबाइंड एक्टिविटीज में सबने खुलकर हिस्सा लिया और उन चुनौतियों को सामने रखा जो आमतौर पर पैरेंट्स डीलिंग के दौरान आती हैं। कार्यक्रम के समापन पर सहारा इंटरनेशनल स्कूल की प्रबंधक निर्देशिका गीतिका अग्रवाल और उप-प्रधानाचार्या रितु गोगिया ने दोनों मुख्य वक्ताओं को स्मृति चिह्न भेंट कर उनका आभार जताया। स्कूल प्रबंधन का कहना था कि इस तरह के प्रशिक्षण सत्र शिक्षकों की कार्यक्षमता को तो निखारते ही हैं, साथ ही विद्यार्थियों के भविष्य को अधिक सुरक्षित और तनावमुक्त बनाने की दिशा भी तय करते हैं।

