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Ek Ped Maa Ke Naam: ग्लोबल वार्मिंग का तोड़: नीलोखेड़ी गऊशाला में जुटे समाजसेवियों ने वृक्षारोपण को बताया समय की सबसे बड़ी मांग

GGaganpreet Kaur
ग्लोबल वार्मिंग का तोड़: नीलोखेड़ी गऊशाला में जुटे समाजसेवियों ने वृक्षारोपण को बताया समय की सबसे बड़ी मांग
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नीलोखेड़ी (महाबीर मैहला)।नीलोखेड़ी के ग्रामीण अंचल बोहला खालसा में स्थित बाबा हरिदास श्री कृष्ण गोपाल गऊशाला का परिसर इस बार सिर्फ गौ-सेवा ही नहीं, बल्कि प्रकृति वंदना का भी गवाह बना। अवसर था “एक पेड़ मां के नाम” और “एक पेड़ गौमाता के नाम” अभियान के तहत आयोजित एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का। चिलचिलाती धूप और मौसम के बदलते मिजाज के बीच इस अभियान का मकसद न सिर्फ इलाके को हरा-भरा बनाना था, बल्कि लोगों को भावनात्मक रूप से पर्यावरण से जोड़ना भी था। इस मौके पर समाजसेवियों, ग्रामीणों और गौभक्तों ने मिलकर गऊशाला और उसके आसपास के क्षेत्र में फलदार व छायादार पौधे लगाए।

मातृत्व और गौसेवा का पर्यावरण से जुड़ाव

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कार्यक्रम की अगुवाई कर रहे गऊशाला के चेयरमैन, पूर्व सरपंच व वरिष्ठ भाजपा नेता चौधरी कर्म सिंह जाम्बा ने बेहद मार्मिक शब्दों में इस अभियान के पीछे की सोच को साझा किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब ग्लोबल वार्मिंग और जल संकट पूरी इंसानियत के वजूद पर सवाल खड़े कर रहे हैं, तब सिर्फ बातें करने से काम नहीं चलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक पेड़ मां के नाम” अभियान की तारीफ करते हुए जाम्बा ने कहा, “मां हमें जीवन देती है और पेड़ उस जीवन को ऑक्सीजन देकर बचाए रखते हैं। अपनी मां के सम्मान में लगाया गया एक पौधा असल में आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का उपहार है।” उन्होंने आगे जोड़ा कि चूंकि गौमाता हमारी सनातनी परंपरा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी हैं, इसलिए “एक पेड़ गौमाता के नाम” लगाना हमारी आस्था और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को एक नया आयाम देता है।

कंक्रीट के जंगल के बीच हरित क्रांति की जरूरत

गऊशाला के प्रधान लाला सुंदर लाल गुप्ता ने भी विकास की अंधी दौड़ और कंक्रीट के बढ़ते जंगलों पर चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि शहरीकरण ने हमारे पारंपरिक हरित क्षेत्रों को लील लिया है, जिससे मौसम का चक्र पूरी तरह बिगड़ चुका है। सुंदर लाल गुप्ता ने जोर देकर कहा कि यह अभियान सिर्फ एक दिन की फोटो खिंचवाने की औपचारिकता नहीं है; गऊशाला प्रबंधन यह सुनिश्चित करेगा कि लगाए गए हर पौधे की बाकायदा कटीली तारों से सुरक्षा हो और उसमें नियमित पानी डाला जाए। उन्होंने समाज के हर तबके से अपील की कि साल में कम से कम एक पौधा लगाकर उसे वटवृक्ष बनने तक पालने की जिम्मेदारी उठाएं।

जमीनी स्तर पर जन-आंदोलन बनाने की कवायद

बैठक में मौजूद स्थानीय विचारकों ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण को जब तक एक जन-आंदोलन नहीं बनाया जाएगा, तब तक सरकारी योजनाएं जमीन पर पूरी तरह कामयाब नहीं हो सकतीं। इस पुनीत कार्य में उपप्रधान जगदीश सांवत, करेसन मैहला (मोहड़ी जागीर), सेवा सिंह घोलपुरा, गुलाब सिंह बोहली, जगदीश भूखापुरी, उदय सिंह घोलपुरा सहित युवा चेहरों में रजत गुर्जर, दर्शन गुर्जर और साहिल मलिक ने बढ़-चढ़कर पसीना बहाया। कार्यक्रम के समापन पर गऊशाला की पूरी कमेटी ने हाथ उठाकर यह संकल्प लिया कि वे इस अभियान को आसपास के अन्य गांवों और शिक्षण संस्थानों तक भी लेकर जाएंगे।

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