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Nilokheri Child Protection: नीलोखेड़ी के बोहला खालसा और बोहली में बाल अधिकारों पर मंथन, सरपंच बोले- बच्चों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता

GGaganpreet Kaur
नीलोखेड़ी के बोहला खालसा और बोहली में बाल अधिकारों पर मंथन, सरपंच बोले- बच्चों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता
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नीलोखेड़ी (महाबीर मैहला)। नीलोखेड़ी के ग्रामीण अंचल में बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने और उनके बुनियादी अधिकारों को लेकर जमीन पर काम शुरू हो गया है। इसी कड़ी में एमडीडी ऑफ इंडिया और ‘जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रेन’ संगठन के संयुक्त तत्वावधान में गांव बोहला खालसा और बोहली में ग्राम स्तरीय बाल संरक्षण समितियों की बैठकें बुलाई गईं। इन बैठकों का मुख्य एजेंडा बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और समाज में उनकी सहभागिता को सुनिश्चित करना था। ग्रामीण स्तर पर इस तरह के आयोजनों का मकसद सीधे तौर पर उन सामाजिक विसंगतियों पर चोट करना है जो बच्चों के विकास में रोड़ा बनती हैं।

बोहला खालसा में आयोजित बैठक की कमान जहां सरपंच नवाब गुर्जर ने संभाली, वहीं बोहली गांव में सरपंच प्रतिनिधि पंकज गुर्जर की देखरेख में चर्चा आगे बढ़ी। बैठकों में पहुंचे एमडीडी ऑफ इंडिया के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि एक सुरक्षित और स्वस्थ परिवेश में बच्चों का लालन-पालन करना किसी एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है। बच्चों को उनका हक दिलाना खैरात नहीं, बल्कि उनका संवैधानिक अधिकार है।

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सरपंचों का आह्वान: गांव स्तर पर ही सुलझेंगी बच्चों की समस्याएं

चर्चा के दौरान बोहला खालसा के सरपंच नवाब गुर्जर ने बेहद व्यावहारिक बात कही। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर हमारी सबसे पहली प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि गांव का एक भी बच्चा शिक्षा और सुरक्षा के चक्रव्यूह से बाहर न छूटे। बाल संरक्षण समितियां गांव की जमीनी हकीकत को बेहतर समझती हैं, इसलिए वे बच्चों से जुड़ी छोटी-बड़ी दिक्कतों की पहचान कर उनका स्थानीय स्तर पर ही निपटारा कर सकती हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे बच्चों के मामलों में मूकदर्शक बनने के बजाय आगे आकर जिम्मेदारी उठाएं।

दूसरी तरफ, बोहली के सरपंच प्रतिनिधि पंकज गुर्जर ने समाज में फैली कुरीतियों पर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ कहा कि बाल श्रम (चाइल्ड लेबर), बाल विवाह और मासूमों का मानसिक या शारीरिक शोषण जैसी बुराइयों को सिर्फ कानून के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। जब तक ग्रामीण खुद एकजुट होकर इसके खिलाफ खड़े नहीं होंगे, तब तक बदलाव मुमकिन नहीं है। बच्चों का वर्तमान सुधरेगा, तभी देश का भविष्य सुरक्षित होगा।

कानूनी पेच और ‘1098’ हेल्पलाइन की ताकत

बैठक में केवल सैद्धांतिक बातें ही नहीं हुईं, बल्कि ग्रामीणों को मजबूत कानूनी हथियारों की जानकारी भी दी गई। संस्था के प्रतिनिधियों ने किशोर न्याय अधिनियम की बारीकियों को समझाते हुए बताया कि बच्चों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार कानूनन जुर्म है। यदि किसी भी ग्रामीण को यह भनक लगती है कि किसी बच्चे के अधिकारों का हनन हो रहा है या उसके साथ हिंसा की जा रही है, तो वे बिना डरे इसकी सूचना सीधे संबंधित विभाग या नेशनल चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर दे सकते हैं।

इसके अलावा, बैठक में उन बच्चों की सूची तैयार करने पर भी सहमति बनी जो किसी कारणवश स्कूल छोड़ चुके हैं (ड्रॉप आउट), ताकि उन्हें दोबारा स्कूल भेजा जा सके। बैठक के समापन पर मौजूद पंचायती नुमाइंदों, समिति के सदस्यों और गांव के मौजिज लोगों ने सामूहिक रूप से हाथ उठाकर संकल्प लिया कि वे अपने गांवों को बाल-मित्र (Child-Friendly) गांव बनाने के लिए जी-जान से जुटेंगे।

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