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Gramin Chowkidar Sabha Protest: 15 जून को करनाल में गरजेंगे ग्रामीण चौकीदार, नीलोखेड़ी की बैठक में आर-पार की लड़ाई का एलान

GGaganpreet Kaur
15 जून को करनाल में गरजेंगे ग्रामीण चौकीदार, नीलोखेड़ी की बैठक में आर-पार की लड़ाई का एलान
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नीलोखेड़ी (महाबीर मैहला): ग्रामीण इलाकों में शासन-प्रशासन की आंख और कान कहे जाने वाले ग्रामीण चौकीदार अब अपनी बदहाली को लेकर आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। रविवार को नीलोखेड़ी के गोल मार्केट में ‘ग्रामीण चौकीदार सभा’ की एक खंड स्तरीय आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर गुबार निकला। विक्रमजीत सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में इलाके के दर्जनों चौकीदारों ने हिस्सा लिया और इस बात पर गहरा रोष जताया कि तमाम ज्ञापनों और अपीलों के बावजूद सरकार उनके बुनियादी हकों को लेकर आंखें मूंदे बैठी है। बैठक का प्रभावी संचालन सचिव सुदेश कुमार द्वारा किया गया।

₹11,000 में 24 घंटे की नौकरी: कैसा है ये इंसाफ?

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बैठक को संबोधित करते हुए प्रधान विक्रमजीत सिंह ने चौकीदारों के शोषण का मुद्दा बेहद प्रखरता से उठाया। उन्होंने कहा कि गांव के स्तर पर कानून-व्यवस्था की पहली सूचना देने से लेकर सरकार की हर छोटी-बड़ी जनकल्याणकारी योजना को धरातल पर उतारने का जिम्मा इसी तबके के कंधों पर होता है।

विक्रमजीत सिंह ने शासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा:

“एक तरफ तो चौकीदार से दिन हो या रात, 24 घंटे ड्यूटी की उम्मीद की जाती है, और दूसरी तरफ बदले में उन्हें महज ₹11,000 का ऊंट के मुंह में जीरे के समान मानदेय थमा दिया जाता है। आज की भयानक महंगाई के दौर में क्या कोई सरकार का नुमाइंदा इतने कम पैसों में अपने पूरे परिवार का पेट पालकर दिखा सकता है? यह सीधे तौर पर बंधुआ मजदूरी जैसा बर्ताव है।”

करनाल के फव्वारा पार्क में सजेगा विरोध का मंच

चौकीदार नेताओं ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर स्थानीय प्रशासन से लेकर चंडीगढ़ के आला हुक्मरानों तक कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन सिवाय खोखले आश्वासनों के उनके हाथ कुछ नहीं लगा। इसी के विरोध में अब राज्य कमेटी के फैसले के तहत आगामी 15 जून को करनाल के फव्वारा पार्क में एक विशाल जिला स्तरीय विरोध प्रदर्शन का बिगुल फूंक दिया गया है। इस प्रदर्शन के जरिए मुख्यमंत्री के नाम एक कड़ा मांग पत्र भेजा जाएगा, ताकि सोई हुई सरकार को जगाया जा सके।

मांगों की लंबी फेहरिस्त, चारों लेबर कोड का विरोध

बैठक के दौरान सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखी गईं। चौकीदारों का कहना है कि उन्हें तुरंत प्रभाव से पक्के (नियमित) कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। जब तक तकनीकी कारणों से ऐसा नहीं हो पाता, तब तक उनका न्यूनतम मासिक मानदेय ₹30,000 तय किया जाए।

इसके अलावा, चौकीदारों ने निम्नलिखित मांगें भी प्रमुखता से उठाईं:

हर महीने की 7 तारीख तक अनिवार्य रूप से वेतन का भुगतान हो।

ईएसआई (ESI) जैसी स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें और हालिया चारों लेबर कोड को तुरंत रद्द किया जाए।

सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के समय एकमुश्त ₹5 लाख की राशि दी जाए।

ऑन-ड्यूटी या आकस्मिक मृत्यु होने पर पीड़ित परिवार को कम से कम ₹10 लाख का मुआवजा मिले।

गांवों में खाली पड़े चौकीदारों के पदों को तुरंत प्रभाव से भरा जाए ताकि मौजूदा स्टाफ पर काम का बोझ कम हो।

इस बैठक में एकजुटता दिखाते हुए जगदीश, रामकुमार, जसबीर, राजबीर, शीला देवी, रामपाल, फिरोज खान और राजकुमार सहित अनेक सदस्यों ने 15 जून को करनाल कूच करने और अपने हक की लड़ाई को अंतिम अंजाम तक पहुंचाने का सामूहिक संकल्प लिया।

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