Palwal Mandi Inspection: हरियाणा में जारी धान खरीद सीजन के बीच सरकारी दावों और जमीनी हकीकत का जायजा लेने निकले खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर (Food Minister Rajesh Nagar Haryana) का पलवल दौरा लापरवाह अधिकारियों पर भारी पड़ गया। पलवल अनाज मंडी स्थित पीआर सेंटर पर औचक निरीक्षण के दौरान अपनी ड्यूटी से गायब मिले दो वरिष्ठ कर्मचारियों पर मंत्री ने सख्त रुख अख्तियार किया है। मंत्री के सीधे आदेश पर विभागीय अमले ने दोनों अधिकारियों को कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस थमा दिया है।
कार्रवाई की जद में आए कर्मचारियों की पहचान सहायक खाद्य एवं पूर्ति अधिकारी (AFSO) जय यादव और उप-निरीक्षक खाद्य एवं पूर्ति (SIFS) दिनेश कुमार के रूप में हुई है। जिला खाद्य एवं पूर्ति नियंत्रक (Haryana DFSC Palwal Notice) कार्यालय की ओर से जारी आदेश के तहत दोनों अधिकारियों को अगले दो दिनों (48 घंटे) के भीतर अपनी गैरहाजिरी पर स्थिति स्पष्ट करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
छुट्टियों पर पहले से थी पाबंदी, फिर भी स्टेशन से गायब मिले अफसर
विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार, खरीद सीजन को सुचारू रूप से चलाने के लिए 29 सितंबर 2026 को ही सख्त दिशानिर्देश जारी किए गए थे। इन आदेशों में स्पष्ट किया गया था कि जब तक मंडियों में धान खरीद की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी अधिकारी या कर्मचारी का किसी भी प्रकार का अवकाश मंजूर नहीं किया जाएगा। साथ ही, बिना पूर्व अनुमति के स्टेशन छोड़ने पर भी पूरी तरह रोक लगाई गई थी।
इसके बावजूद जब मंत्री राजेश नागर मंडी परिसर में व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचे, तो पीआर केंद्र से जिम्मेदार अधिकारी ही गायब मिले। मंडी में मौजूद किसानों और स्थानीय आढ़तियों ने भी अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर अपनी शिकायत दर्ज कराई, जिस पर मंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों को तलब कर गहरी नाराजगी जताई।
‘यह किसानों का समय है, ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी’: मंत्री राजेश नागर
मले पर कड़ा संदेश देते हुए खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार के आदेशों की अनदेखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “यह समय पूरी तरह से प्रदेश के अन्नदाता यानी किसानों का है। (Haryana Local News) मंडी में फसल लेकर आ रहे किसानों को किसी तरह की दिक्कत न हो, इसके लिए अधिकारियों की मौजूदगी अनिवार्य है। ऐसे नाजुक वक्त में बिना किसी ठोस और वाजिब वजह के अपनी ड्यूटी से नदारद रहना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है।”
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि दोनों अधिकारी तय दो दिन की सीमा के भीतर अपना संतोषजनक जवाब दाखिल करने में नाकाम रहते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय सेवा नियमों के तहत निलंबित करने या अन्य सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की तैयारी कर ली गई है।
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