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Panchkula Land Scam: सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाकर पर्ल ग्रुप की 17 एकड़ जमीन बेची, तहसीलदार समेत 4 पर FIR

AAmandeep Singh
Panchkula Land Scam: सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ाकर पर्ल ग्रुप की 17 एकड़ जमीन बेची, तहसीलदार समेत 4 पर FIR
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पंचकूला। हरियाणा के पंचकूला से भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। देश के बहुचर्चित पर्ल ग्रुप (PACL) महाघोटाले के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ग्रुप की संपत्तियों को अटैच (कुर्क) करने के आदेश दिए थे। शीर्ष अदालत का स्पष्ट निर्देश था कि इन जमीनों की खरीद-फरोख्त या म्यूटेशन पर पूर्ण पाबंदी रहेगी। इसके बावजूद पंचकूला की रायपुररानी तहसील में तैनात रहे तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला और उनके मातहत स्टाफ ने मिलकर 17.55 एकड़ कुर्क जमीन की न सिर्फ रजिस्ट्री डीड तैयार करवाई, बल्कि उसका इंतकाल भी मंजूर कर दिया।

कागजों में हेराफेरी का खेल: ऐसे जाल में फंसाया कानून

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स्टेट विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो की तफ्तीश में सामने आया कि इस खेल की पटकथा बेहद शातिर तरीके से रची गई थी। पंजाब के फतेहगढ़ साहिब निवासी सुरमुख सिंह के पास इस जमीन की जीपीए (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) थी। उसकी तरफ से हरदीप सिंह नामक व्यक्ति ने 22 दिसंबर 2025 को एसडीएम पंचकूला की अदालत में अर्जी लगाकर राजस्व रिकॉर्ड से ‘बंदी आदेश’ यानी ट्रांसफर पर लगी रोक को हटाने की मांग की। इसके तुरंत बाद पटवारी नरेंद्र कुमार डबास ने तहसीलदार विक्रम सिंगला के साथ साठगांठ की। दोनों ने मिलकर रिपोर्ट नंबर 232 दर्ज की और जमीन को इस पाबंदी से पूरी तरह मुक्त दिखा दिया, जिसे कानूनगो दीपक कुमार ने आंखें मूंदकर तस्दीक (वेरिफाई) कर दिया।

जनवरी 2026 में हुआ 4.20 करोड़ का खेल, शिकायतों को किया दरकिनार

सरकारी रिकॉर्ड में इस फर्जीवाड़े के बाद 2 जनवरी 2026 को रजिस्ट्री नंबर 1491 और 1492 के तहत करोड़ों का वसीयतनामा तैयार हुआ। सुरमुख सिंह ने यह पूरी 17.55 एकड़ प्राइम लैंड कुणाल छिलाना और सौरभ नामक व्यक्तियों को महज 4.20 करोड़ रुपये में बेच दी। इसके बाद महज एक हफ्ते के भीतर यानी 9 जनवरी को इसका इंतकाल दर्ज हुआ और 17 जनवरी को तहसीलदार ने इसे फाइनल अप्रूवल दे दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस दौरान हिसार के एक जागरूक शिकायतकर्ता ने लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी और एसडीएम ने भी रायपुररानी तहसीलदार से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन मोटी रकम के फेर में अफसरों ने इन तमाम चेतावनियों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया।

मुख्य सचिव की मंजूरी के बाद FIR, पहले भी जेल की हवा खा चुका है तहसीलदार

इस महाघोटाले की गूंज जब आला अधिकारियों तक पहुंची तो विजिलेंस ने अपनी प्राथमिक जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी। मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018) की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2) के तहत आपराधिक साजिश का पाया गया। चूंकि मामला क्लास-वन अफसरों से जुड़ा था, इसलिए मुख्य सचिव और डीजीपी विजिलेंस से धारा 17-ए के तहत अनुमति मांगी गई। हरी झंडी मिलते ही 30 जनवरी 2026 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो पंचकूला में आरोपियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

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