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Panchkula MC FD Scam: पंचकूला एफडी घोटाला: कोटक महिंद्रा बैंक का पूर्व मैनेजर गिरफ्तार, 160 करोड़ की धोखाधड़ी का खुलासा

AAmandeep Singh
पंचकूला एफडी घोटाला: कोटक महिंद्रा बैंक का पूर्व मैनेजर गिरफ्तार, 160 करोड़ की धोखाधड़ी का खुलासा
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पंचकूला। हरियाणा के पंचकूला में सरकारी धन की सुरक्षा पर एक बार फिर गहरा संकट खड़ा हो गया है। नगर निगम की करीब 160 करोड़ रुपये की गाढ़ी कमाई, जिसे सुरक्षित निवेश मानकर कोटक महिंद्रा बैंक में एफडी (FD) के रूप में रखा गया था, वह बैंकिंग धोखाधड़ी की भेंट चढ़ गई। इस सनसनीखेज घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक्शन मोड में आते हुए बैंक के पूर्व रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप कुमार राघव को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में खुलासा हुआ है कि राघव ने ही बैंक के अन्य शातिर दिमागों के साथ मिलकर निगम को फर्जी एफडी और झूठी रिपोर्ट्स भेजी थीं।

बैंक स्टेटमेंट में ‘मायाजाल’: करोड़ों की रकम हवा में गायब

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इस घोटाले की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) ने सबको हैरान कर दिया है। नगर निगम प्रशासन को जो बैंक स्टेटमेंट दिए जाते थे, उनमें राशि बिल्कुल सही और ट्रांसफर होती दिखाई देती थी। लेकिन यह सब सिर्फ एक ‘डिजिटल धोखा’ था। असलियत तब सामने आई जब निगम ने अपनी 58 करोड़ रुपये की एक एफडी की अवधि पूरी होने पर उसे भुनाना चाहा। बैंक स्टेटमेंट में तो पैसा ट्रांसफर दिखा दिया गया, लेकिन जब निगम के मुख्य खाते की जांच हुई, तो वहां एक रुपया भी नहीं पहुंचा था। गहराई से जांच करने पर पता चला कि बैंक द्वारा दी गई एफडी की रसीदें और स्टेटमेंट, दोनों ही पूरी तरह जाली थे।

160 करोड़ का खेल और ‘डी-इंपैनल’ की तैयारी

जैसे ही एक एफडी का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया, निगम के अधिकारियों के कान खड़े हो गए। जब बाकी बची एफडी की जांच कराई गई, तो पता चला कि बैंक के पास निगम का कोई पैसा बचा ही नहीं था। बैंक कर्मचारियों ने जाली कागजों के आधार पर निगम का पैसा अलग-अलग डमी और फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दिया था। इस धोखेबाजी के बाद हरियाणा सरकार बेहद सख्त रुख अपना रही है। सरकार ने न केवल कोटक महिंद्रा बैंक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं, बल्कि बैंक को सरकारी पैनल से बाहर (De-empanel) करने के लिए भी पत्र लिख दिया है।

मिलीभगत की आशंका: रडार पर कई और चेहरे

एसीबी की जांच केवल बैंक कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, यह आशंका जताई जा रही है कि नगर निगम के कुछ भीतर के लोगों ने भी इस करोड़ों के खेल में अपनी जेबें गर्म की हैं। बिना विभागीय सांठगांठ के इतनी बड़ी राशि को लंबे समय तक फर्जी कागजों के सहारे छिपाए रखना नामुमकिन है। दिलीप कुमार राघव की गिरफ्तारी तो सिर्फ एक शुरुआत मानी जा रही है; ब्यूरो अब उन कड़ियों को जोड़ रहा है जो इस घोटाले के मास्टरमाइंड तक पहुंचती हैं।

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