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Panchkula Kotak Mahindra Bank Fraud: पंचकूला नगर निगम में 160 करोड़ का गबन: कोटक महिंद्रा बैंक के अधिकारियों पर एफडी हड़पने का आरोप

AAmandeep Singh
पंचकूला नगर निगम में 160 करोड़ का गबन: कोटक महिंद्रा बैंक के अधिकारियों पर एफडी हड़पने का आरोप
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पंचकूला।  हरियाणा की प्रशासनिक राजधानी पंचकूला से एक ऐसी खबर आई है जिसने सरकारी महकमों और बैंकिंग सिस्टम के बीच के भरोसे को हिलाकर रख दिया है। नगर निगम पंचकूला की गाढ़ी कमाई के करीब 160 करोड़ रुपये पर कोटक महिंद्रा बैंक के कुछ शातिर अधिकारियों और कर्मचारियों ने कथित रूप से हाथ साफ कर दिया। आरोप है कि निगम ने समय-समय पर जो राशि फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के तौर पर बैंक में जमा कराई थी, उसे धोखे से जाली खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि बैंक अधिकारी लंबे समय तक निगम को फर्जी कागजी रिकॉर्ड और स्टेटमेंट थमाकर गुमराह करते रहे।

जाली हस्ताक्षर और फर्जी स्टैंप: बैंक के भीतर ही रचा गया षड्यंत्र

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शुरुआती जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं हैं। बताया जा रहा है कि आरटीजीएस (RTGS) के जरिए किए गए ट्रांजैक्शन में न केवल फर्जी हस्ताक्षरों का सहारा लिया गया, बल्कि बैंक की जाली मुहरें (Stamps) भी इस्तेमाल की गईं। बैंक कर्मियों ने बड़ी चतुराई से सरकारी पैसे को ठिकाने लगाने के लिए समानांतर जाली खाते खोले। निगम प्रशासन को भनक तक नहीं लगी कि उनके नाम पर जो एफडी रसीदें अलमारी में रखी हैं, वे महज रद्दी के टुकड़े हैं और बैंक के वास्तविक रिकॉर्ड में वह पैसा मौजूद ही नहीं है।

जब पैसे मांगने पहुंचे अधिकारी, तो पैरों तले खिसक गई जमीन

इस पूरे काले कारनामे का पर्दाफाश तब हुआ जब नगर निगम ने अपनी 58 करोड़ रुपये की एक एफडी मैच्योर होने पर उसकी राशि मुख्य खाते में ट्रांसफर करने को कहा। बैंक ने कागजों पर तो पैसा ट्रांसफर दिखा दिया, लेकिन जब निगम ने अपना बैलेंस चेक किया तो वहां ‘सन्नाटा’ पसरा था। गहराई से जांच करने पर पता चला कि बैंक द्वारा दी गई स्टेटमेंट फर्जी थी। इसके बाद जब निगम ने अपनी अन्य सभी एफडी को खंगाला, तो अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई—सभी एफडी जाली थीं और 160 करोड़ रुपये का कोई नामोनिशान नहीं था।

एक्शन मोड में सरकार: बैंक को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। नगर निगम ने कोटक महिंद्रा बैंक के खिलाफ न केवल एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी कर ली है, बल्कि उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर बैंक को सरकारी पैनल से बाहर (De-empanel) करने की सिफारिश भी की है। गौरतलब है कि हाल ही में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 590 करोड़ के घोटाले के बाद यह दूसरा बड़ा मामला है। हालांकि पिछले मामले में राशि बरामद हो गई थी, लेकिन बार-बार निजी बैंकों में सरकारी धन के साथ हो रही इस तरह की छेड़छाड़ ने अब आम नागरिकों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

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