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प्रधानमंत्री मोदी ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने पुल, आईआईएम और डेटा केंद्र का उद्घाटन किया

JJagmarg Desk
प्रधानमंत्री मोदी ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने पुल, आईआईएम और डेटा केंद्र का उद्घाटन किया
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गुवाहाटी: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को असम में कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिनमें ब्रह्मपुत्र नदी पर बना एक पुल, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) गुवाहाटी और पूर्वोत्तर क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने वाला एक डेटा केंद्र शामिल है। राज्य में इस साल प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की गई इन परियोजनाओं का मकसद सम्पर्क में सुधार लाना, डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना और सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाना है।

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राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य और मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा रहे मौजूद

मोदी डिब्रूगढ़ के मोरान में एक आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) के साथ-साथ राज्य में 5,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन करने के लिए एक दिवसीय दौरे पर असम पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले ब्रह्मपुत्र नदी पर लगभग 3,030 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित छह लेन वाले ‘कुमार भास्कर वर्मा सेतु’ का उद्घाटन किया। यह पूर्वोत्तर का पहला ‘एक्सट्राडोज्ड प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट पुल’ है, जो गुवाहाटी को उत्तरी गुवाहाटी से जोड़ेगा। ‘एक्सट्राडोज्ड प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट पुल’ गर्डर और केबल-स्टे डिजाइन के मिश्रण वाली हाइब्रिड संरचना होती है, जिसके निर्माण में कम ऊंचाई वाले तोरण और केबल का इस्तेमाल किया जाता है, जो पुल के कंक्रीट ढांचे को अधिक मजबूती प्रदान करते हैं। ‘कुमार भास्कर वर्मा सेतु’ के उद्घाटन के बाद मोदी ने उस पर चहलकदमी की। इस मौके पर असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य और मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा उनके साथ थे।

ब्रह्मपुत्र नदी के दोनों किनारों को जोड़ने वाला एकमात्र पुल

यह पुल गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच यात्रा का समय घटाकर महज सात मिनट कर देगा। जलुकबारी स्थित सरायघाट पुल फिलहाल राजधानी क्षेत्र में ब्रह्मपुत्र नदी के दोनों किनारों को जोड़ने वाला एकमात्र पुल है, जिससे गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी के बीच की दूरी तय करने में लगभग 30 मिनट का समय लगता है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी बयान के मुताबिक, भूकंप के प्रति क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए ‘कुमार भास्कर वर्मा सेतु’ में ‘फ्रिक्शन पेंडुलम बियरिंग’ का इस्तेमाल करते हुए ‘बेस आइसोलेशन’ तकनीक को शामिल किया गया है। ‘फ्रिक्शन पेंडुलम बियरिंग’ एक उन्नत भूकंपरोधी तकनीक है, जो भूकंप के दौरान पेंडुलम के कार्य सिद्धांत पर अमल करते हुए इमारतों और पुलों की रक्षा करती है। वहीं, ‘बेस आइसोलेशन’ एक उन्नत भूकंप सुरक्षा तकनीक है, जो किसी इमारत को लचीले बेयरिंग के माध्यम से उसकी नींव से अलग करती है। बयान में कहा गया है कि दीर्घकालिक संरचनात्मक स्थायित्व और प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए पुल के निर्माण में उच्च-प्रदर्शन वाले ‘स्टे केबल’ का इस्तेमाल किया गया है।

 नौ फरवरी 2019 को रखी थी पुल की आधारशिला

इसमें कहा गया है कि एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज’ की स्थिति की वास्तविक समय में निगरानी, ​​क्षति का जल्द पता लगाने और बेहतर सुरक्षा एवं सेवाकाल सुनिश्चित करने के लिए इसमें एक ‘ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम’ (बीएचएमएस) भी शामिल किया गया है। मोदी ने नौ फरवरी 2019 को इस पुल की आधारशिला रखी थी। एक मार्च 2020 को असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इसके निर्माण कार्य की शुरुआत की थी। पुल के निर्माण की शुरुआती लागत 2,608 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जो बढ़कर 3,030 करोड़ रुपये हो गई। इस परियोजना के चार वर्षों के भीतर पूरा होने का अनुमान था। ब्रह्मपुत्र नदी के दोनों किनारों पर स्थित पहुंच मार्गों और फ्लाईओवर सहित ‘कुमार भास्कर वर्मा सेतु’ की लंबाई 7.75 किलोमीटर है, जबकि नदी पर बना मूल पुल 1.24 किलोमीटर लंबा है। इस परियोजना का क्रियान्वयन असम लोक निर्माण विभाग ने ब्राजील की सिस्ट्रा इंजीनियरी कंसल्टोरिया लिमिटेड की परामर्श सेवाओं के साथ किया था। पुल का ठेका एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था, जबकि इसकी वित्तपोषण एजेंसी ‘न्यू डेवलपमेंट बैंक’ थी। परियोजना की कुल लागत का 20 फीसदी हिस्सा असम सरकार ने वहन किया था।

असम सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 28 फरवरी तक केवल पैदल यात्रियों को इस पुल के इस्तेमाल की अनुमति होगी। ‘कुमार भास्कर वर्मा सेतु’ की शुरुआत के बाद मोदी ने पास में स्थित लचित घाट में डिजिटल माध्यम से आईआईटी गुवाहाटी के अस्थायी परिसर और पूर्वोत्तर की जरूरतों को पूरा करने वाले एक हाई-टेक डेटा केंद्र का उद्घाटन किया। उन्होंने गुवाहाटी सहित देश के चार शहरों के लिए 225 इलेक्ट्रिक बस को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन परियोजनाओं के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री और राज्यपाल के साथ-साथ केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, राज्य सरकार के कई मंत्री, सांसद, विधायक और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी मौजूद थे। अधिकारियों के अनुसार, 555 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले आईआईएम गुवाहाटी से पूर्वोत्तर क्षेत्र में उच्च शिक्षा और प्रबंधन शिक्षा को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने पिछले साल गुवाहाटी में एक आईआईएम की स्थापना को मंजूरी दी थी। यह पूर्वोत्तर का दूसरा और देश का 22वां आईआईएम है। क्षेत्र का पहला आईआईएम शिलांग में स्थित है।

असम सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि आईएमएम गुवाहाटी अपने शैक्षणिक सत्र की शुरुआत बोंगोरा में टेक सिटी स्थित अस्थायी परिसर से करेगा। संस्थान का स्थायी परिसर गुवाहाटी के पास पालासबारी में बनाया जाएगा। आईआईएम अहमदाबाद अस्थायी परिसर की व्यवस्थाओं की निगरानी करेगा। अधिकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने असम के कामरूप जिले के आमिंगांव में पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए स्थापित राष्ट्रीय डेटा केंद्र (एनडीसी) का भी लचित घाट से डिजिटल माध्यम से उद्घाटन किया। इस अत्याधुनिक डेटा केंद्र की कुल स्वीकृत क्षमता 8.5 मेगावाट और औसत रैक क्षमता 10 किलोवाट प्रति रैक है। यह डेटा केंद्र विभिन्न सरकारी विभागों के महत्वपूर्ण अनुप्रयोगों को पूरा करेगा और अन्य एनडीसी के लिए आपदा पुन:प्राप्ति केंद्र के रूप में भी काम करेगा। पीएमओ ने कहा कि इस डेटा केंद्र से पूर्वोत्तर की सरकारों को आवश्यक नागरिक-केंद्रित सेवाओं की आपूर्ति को डिजिटल रूप से सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी।

225 इलेक्ट्रिक बस को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

पीएमओ ने कहा कि डिजिटल इंडिया की परिकल्पना के अनुरूप पूर्वोत्तर के लिए स्थापित एनडीसी को क्षेत्र में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) को मजबूत करने, सुरक्षित बनाने और हमेशा उसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक रणनीतिक हस्तक्षेप के रूप में परिकल्पित किया गया है। मोदी ने पीएम-ईबस सेवा योजना के तहत 225 इलेक्ट्रिक बस को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इनमें से 100 बस गुवाहाटी के लिए, 50-50 बस नागपुर और भावनगर के लिए तथा 25 बस चंडीगढ़ के लिए चलाई जाएंगी। पीएमओ ने कहा कि इन चार शहरों में पीएम-ईबस सेवा योजना के तहत ई-बस संचालन शुरू होने से 50 लाख से अधिक नागरिकों को स्वच्छ, किफायती और विश्वसनीय सार्वजनिक परिवहन सेवाओं तक पहुंच मिलने की उम्मीद है, जिससे शहरी परिवहन में सुधार आएगा और जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि होगी।

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