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‘जॉनी जॉनी यस पापा’ जैसी कविताएं भारतीय संस्कृति के खिलाफ बच्चों को झूठ बोलना सिखाती हैं: युपी उच्च शिक्षा मंत्री

VVinita Kohli
‘जॉनी जॉनी यस पापा’ जैसी कविताएं भारतीय संस्कृति के खिलाफ बच्चों को झूठ बोलना सिखाती हैं: युपी उच्च शिक्षा मंत्री
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने नर्सरी में पढ़ाए जाने वाली ‘जॉनी जॉनी यस पापा’ और ‘रेन रेन गो अवे’ जैसी लोकप्रिय अंग्रेजी कविताओं को भारतीय संस्कृति व मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि ये कविताएं बच्चों को झूठ बोलना सिखाने के साथ-साथ स्वार्थ की भावना को भी बढ़ावा देती हैं। उपाध्याय ने इस सप्ताह की शुरुआत में कानपुर में ‘शिक्षामित्रों’ को सम्मानित करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि शिक्षा का मतलब केवल शिक्षक बनना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को गढ़ना व उनमें अच्छे संस्कार विकसित करना है। उन्होंने कहा, “यह छोटी-सी बात लग सकती है, लेकिन शिक्षा से शिक्षक बनने तक का सफर बहुत कठिन होता है। 

जब आप शिक्षक बनते हैं तो आने वाली पीढ़ियों को गढ़ते हैं और देश का निर्माण करते हैं, लेकिन संस्कार कहां से आएंगे?” उच्च शिक्षा मंत्री ने छोटे बच्चों को पढ़ाई जाने वाली लोकप्रिय कविता ‘जॉनी जॉनी यस पापा’ की आलोचना करते हुए कहा कि माता-पिता बड़े गर्व से बच्चों से यह कविता सुनाने को कहते हैं, बिना यह सोचे कि यह क्या संदेश देती है। उन्होंने कहा, “संस्कार देखिए। बड़े शौक से अपने बच्चों से कहते हैं कि जरा अंकल को सुनाओ- ‘जॉनी जॉनी यस पापा, ईटिंग शुगर नो पापा।’ यह कविता झूठ बोलने का संस्कार देती है। ‘टेलिंग अ लाई, नो पापा… ओपन योर माउथ, हा-हा-हा।’ इसमें मजाक उड़ाया जाता है। आखिर हम बच्चों को क्या सिखा रहे हैं?” उपाध्याय ने कहा, “रेन रेन गो अवे, कम अगेन अनदर डे, लिटिल जॉनी वॉन्ट्स टू प्ले।’ यानी लिटिल जॉनी खेलना चाहता है, इसलिए बारिश चली जाए। बच्चे का खेलना ही सबसे महत्वपूर्ण हो गया। 

यह कौन-सा संस्कार है? यह हमारी संस्कृति नहीं है, जो ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ पर आधारित है।” उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति व्यक्तिगत सुविधा के बजाय सामूहिक कल्याण और प्रकृति के साथ सामंजस्य पर जोर देती है। समाजवादी पार्टी ने मंत्री के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि विकास के मोर्चे पर ‘‘विफल’’ भाजपा लोगों का ध्यान मूल मुद्दों से भटकाने के लिए ऐसे विषय उठा रही है। पार्टी प्रवक्ता शर्वेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि ऐसे मुद्दे केवल “भाजपा की नाकामियों” को छिपाने के लिए उठाए जाते हैं। उन्होंने कहा, “भाजपा ने पिछले नौ वर्षों में कुछ नहीं किया। चूंकि उनके पास लोगों को बताने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वे ऐसे मुद्दे उठाते हैं।”

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