October 3, 2026

चन्नी जीत गए, पायलट हो सकते हैं पद से हटाए जाने के पीछे : इस्तीफे के बाद वड़िंग

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चन्नी जीत गए, पायलट हो सकते हैं पद से हटाए जाने के पीछे : इस्तीफे के बाद वड़िंग

Political Update: पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष बदलने के बाद पार्टी की अंदरूनी खींचतान फिर चर्चा में है। लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है और कहा कि उन्हें लगा था कि नए पंजाब प्रभारी सचिन पायलट उन्हें पद से हटाना चाहते हैं। वड़िंग ने यह भी कहा कि उनसे किसी ने इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा था और उन्होंने हालात को देखते हुए खुद पद छोड़ने का फैसला किया। वड़िंग ने शुक्रवार को राहुल गांधी से मुलाकात कर अपना औपचारिक इस्तीफा सौंपा। इसके कुछ घंटे बाद कांग्रेस ने पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। यह बदलाव पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले हुआ है।

इस्तीफे के बाद वड़िंग ने कहा कि उन्हें लगा कि सचिन पायलट शायद उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने के पक्ष में थे। उन्होंने कहा, “शायद सचिन पायलट को लगा कि मेरे लिए पीसीसी अध्यक्ष के रूप में बने रहना उचित नहीं था। चन्नी साहब जीत गए हैं।” हालांकि, इस पूरे दावे को लेकर वड़िंग ने खुद स्पष्ट किया कि उनके पास पायलट की भूमिका का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। उन्होंने बताया कि पायलट के पंजाब प्रभारी बनने के बाद उन्होंने उनसे औपचारिक मुलाकात की थी और करीब 15 मिनट बातचीत हुई थी, लेकिन उसके बाद दोनों की कोई मुलाकात नहीं हुई। वड़िंग ने कहा कि उन्हें लगा कि पंजाब प्रभारी ने पार्टी नेतृत्व को उनके बारे में बदलाव की राय दी होगी। दूसरी ओर, उपलब्ध रिपोर्टों में पार्टी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पायलट ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं और सांसदों से संगठन को लेकर फीडबैक लिया था।

 

 

चन्नी गुट से लंबे समय से चल रहा था मतभेद

वड़िंग के इस्तीफे से पहले पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाले नेताओं के एक समूह ने वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की थी। वड़िंग अप्रैल 2022 में पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष बने थे और चार साल से ज्यादा समय तक इस पद पर रहे। इस दौरान पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर मतभेद सामने आते रहे। इस साल जुलाई में भी उनके प्रदेश अध्यक्ष बने रहने को लेकर पार्टी के भीतर विरोध की स्थिति बनी थी। वड़िंग ने अपने इस्तीफे के बाद चन्नी का नाम लेते हुए कहा कि ‘चन्नी साहब जीत गए’। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह पार्टी के आंतरिक मामलों पर कैमरे के सामने ज्यादा बात नहीं करना चाहते।

राहुल गांधी से मुलाकात के बाद वड़िंग ने कहा कि दोनों के बीच पंजाब की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, कांग्रेस की चुनौतियों और संगठन की ताकत पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि उन्होंने राहुल गांधी को बताया कि पंजाब में पार्टी किन चुनौतियों का सामना कर रही है और उनसे कैसे निपटा जा सकता है। वड़िंग ने कहा कि राहुल गांधी ने उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी थी और उन्होंने कठिन परिस्थितियों में पार्टी का नेतृत्व करने का मौका देने के लिए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने यह भी कहा कि जब भी कांग्रेस को उनकी जरूरत होगी, वह पार्टी की सेवा के लिए तैयार रहेंगे। वड़िंग ने यह भी कहा कि पंजाब कांग्रेस का संगठन बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक मजबूत है। उनके मुताबिक, पिछले साढ़े चार साल में पार्टी ने जमीनी स्तर पर संगठनात्मक ढांचा तैयार किया है।

 

 

भूपेश बघेल की जगह पायलट को मिली थी पंजाब की जिम्मेदारी

कांग्रेस ने सितंबर में पंजाब के प्रभारी के तौर पर भूपेश बघेल की जगह सचिन पायलट को नियुक्त किया था। इसके बाद पायलट ने पंजाब कांग्रेस के नेताओं और सांसदों से संगठन और राज्य इकाई की स्थिति को लेकर बातचीत की। पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी को देखते हुए पंजाब प्रभारी में यह बदलाव विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को लेकर किया गया था। वड़िंग के इस्तीफे और परगट सिंह की नियुक्ति के बाद अब पंजाब कांग्रेस का नेतृत्व नए अध्यक्ष के हाथ में है।

कांग्रेस ने शुक्रवार को परगट सिंह को तत्काल प्रभाव से पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया। परगट सिंह पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान हैं और जालंधर कैंट विधानसभा सीट से विधायक हैं। वह 2012 से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। राजा वड़िंग ने भी परगट सिंह को नई जिम्मेदारी मिलने पर बधाई दी। अब पंजाब कांग्रेस के सामने संगठन को एकजुट रखने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब प्रदेश इकाई में नेतृत्व को लेकर लंबे समय से मतभेद सार्वजनिक रहे हैं।

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