Pundri-mandi Paddy Crop Damaged: कैथल जिले के पूंडरी और पाई क्षेत्र में धान कटाई के सीजन के बीच मौसम की मार ने किसानों और आढ़तियों की नींद उड़ा दी है। गुरुवार की सुबह अचानक हुई तेज बारिश के बाद मंडियों और आसपास के खुले इलाकों में अफरातफरी का माहौल देखने को मिला। मंडी परिसरों में खरीद और उठान की पहले से ही सुस्त पड़ी रफ्तार के बीच बारिश ने समस्याओं को और गहरा कर दिया है। स्थिति यह है कि खुले आसमान के नीचे और कच्चे रास्तों पर पड़ी धान की बोरियां और ढेरियां पूरी तरह पानी में डूब गई हैं।
पानी में डूबी धान की ढेरियां, किसानों पर दोहरी मार
सुबह जब बारिश थमी तो किसान अपनी फसलों का हाल जानने के लिए मंडी पहुंचे। कई स्थानों पर धान की ढेरियों के नीचे से पानी बहता नजर आया, तो कुछ निचले और कच्चे स्थानों पर एक से दो फुट तक पानी जमा हो गया। किसान लखविंदर सिंह, सेशन, नरेंद्र, कुलवंत और जहांगीर सिंह समेत अन्य किसानों ने बताया कि उन्होंने छह महीने की कड़ी मेहनत से अपनी फसल तैयार की है, लेकिन मंडी में उसे बेचने और सुरक्षित रखने के लिए उन्हें भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
किसानों के मुताबिक, एक तरफ जहां पहले से ही धान के सही भाव और सरकारी खरीद को लेकर परेशानियां बनी हुई थीं, वहीं अब बारिश ने बची-खुची कसर भी पूरी कर दी है। किसान तिरपाल और प्लास्टिक के कवर्स के सहारे अपनी फसल को बचाने की पुरजोर कोशिश करते दिखे।
आढ़तियों के सामने भीगे कट्टों की लिफ्टिंग बड़ी चुनौती
मंडी के आढ़तियों के सामने इस समय सबसे बड़ा संकट भीगे हुए धान के कट्टों को उठवाने का खड़ा हो गया है। पाई रोड, ढांड रोड, अरमान कॉलोनी, 50 फुटा रोड और हैफेड के सेलर प्लेटफार्म समेत तमाम सार्वजनिक जगहों पर रखे धान की स्थिति खराब है। भीग जाने के कारण कट्टे भारी हो गए हैं और उनकी ‘ढांग’ (स्टैक) लगवाने के लिए अतिरिक्त मजदूरों को लगाना पड़ रहा है, जिससे आढ़तियों का अतिरिक्त खर्च भी बढ़ रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, पूंडरी अनाज मंडी में अब तक कुल 6.58 लाख क्विंटल धान की आवक हो चुकी है। इसमें से करीब 4.55 लाख क्विंटल धान बिका है और लगभग 3 लाख क्विंटल का उठान हुआ है, जबकि अभी भी करीब 2 लाख क्विंटल धान मंडी परिसर में खुले में पड़ा हुआ है। ऐसे में बारिश के बाद इस बचे हुए धान की लिफ्टिंग करना प्रशासन और आढ़तियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
प्रशासन के अपने दावे, जल्द राहत मिलने की उम्मीद
किसानों की इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक अमला भी हरकत में आया है। अधिकारियों का दावा है कि मंडी परिसर से जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए तुरंत तीन वाटर पंप लगाए गए हैं और साफ-सफाई के लिए मजदूरों की तैनाती की गई है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मंडी के भीतर निर्धारित प्वाइंट्स पर किसानों को कोई असुविधा नहीं होने दी जाएगी। हालांकि, मंडी से बाहर या जीरो फेसिंग एरिया में जिन किसानों ने अपनी मर्जी से धान रखा हुआ है, वहां से भी पानी निकालने और भीगे हुए कट्टों को सुरक्षित बाहर करने के प्रयास जारी हैं। किसानों को उम्मीद है कि यदि मौसम ने जल्द ही राहत नहीं दी, तो उन्हें और भी बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

