Punjab Assembly Session: पंजाब विधानसभा का छह दिवसीय विशेष सत्र आज से शुरू हो रहा है। 27 अक्टूबर तक चलने वाले इस सत्र में नशे की समस्या, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और केंद्र सरकार से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है। सत्र की शुरुआत दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि देने के साथ होगी। इसके बाद सदन की कार्यवाही में पांच रिपोर्ट और तीन प्रस्ताव पेश किए जाने हैं। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी केंद्र की भाजपा सरकार को निशाने पर लेने की तैयारी में है। वहीं, विपक्ष ने राज्य में नशा तस्करी पर लगाम लगाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के सरकार के दावों पर सवाल उठाने की रणनीति बनाई है। कांग्रेस मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग भी उठा सकती है।
विधानसभा सत्र में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला प्रमुखता से उठ सकता है। विपक्ष इस मामले को लेकर सरकार से जवाब मांग सकता है और राज्य में नशा तस्करी पर नियंत्रण के दावों पर सवाल उठा सकता है। नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा पहले ही कह चुके हैं कि कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को जवाबदेही से बचने नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा तुरबंजारा के मजदूर गुलजार सिंह की आत्महत्या का मामला भी सदन में उठने की संभावना है। इस मामले में विपक्ष वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को घेर सकता है। कांग्रेस सहित विपक्षी दल नशे की समस्या और भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकते हैं।
नशे पर पिछली सरकारों को जिम्मेदार बताएगी AAP
आम आदमी पार्टी नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान और अपनी सरकार की कार्रवाई का ब्योरा देकर विपक्ष के आरोपों का जवाब दे सकती है। पार्टी नशे की समस्या के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराने के साथ गुजरात के बंदरगाहों और अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने में केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठा सकती है। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकती है। आम आदमी पार्टी इन कार्रवाइयों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साध सकती है। ऐसे में विशेष सत्र के दौरान राज्य के मुद्दों के साथ केंद्र और राज्य सरकार के बीच राजनीतिक टकराव भी सदन की कार्यवाही पर असर डाल सकता है।
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