Punjab Assembly Session: पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही हंगामा हो गया। प्रश्नकाल शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों ने मांग की कि पहले राज्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कराई जाए। स्पीकर ने कहा कि इन मुद्दों पर बात की जाएगी, लेकिन इसके बाद प्रश्नकाल शुरू कर दिया। इससे नाराज कांग्रेस विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कांग्रेस के विधायक गले में काले कपड़े डालकर सदन पहुंचे। इससे पहले कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत मान या आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा को लानत पत्र सौंपने की बात कही थी। विपक्ष ने सरकार पर सवालों से बचने का आरोप लगाते हुए सदन में अपनी मांगें उठाने का ऐलान किया था।
चीमा ने परगट सिंह और कांग्रेस पर साधा निशाना
हंगामे के बीच वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने नशे के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कांग्रेस नेता परगट सिंह पर निशाना साधते हुए कहा, “मिस्टर परगट सिंह, यू आर द मेंबर ऑफ चिट्टा पार्टी।” चीमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेताओं ने पंजाब से नशा खत्म करने का वादा किया था, लेकिन उनके शासन के दौरान राज्य में नशे की समस्या बढ़ी। चीमा ने कहा कि परगट सिंह पहले शिरोमणि अकाली दल और भाजपा से जुड़े रहे और बाद में कांग्रेस में शामिल हुए। उन्होंने अकाली दल की पिछली सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए दावा किया कि पंजाब में चिट्टे का नाम उसी समय चर्चा में आया था। उन्होंने नशा तस्करी से जुड़े मामलों और कुछ राजनीतिक नेताओं के कथित संबंधों का भी उल्लेख किया। ये आरोप चीमा ने सदन में लगाए; संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं की गई है।
वित्त मंत्री ने कांग्रेस पर पंजाब के युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने और अब इस मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग नशे से हुई मौतों के लिए कांग्रेस से सवाल पूछ सकते हैं। अपने भाषण में चीमा ने श्री अकाल तख्त साहिब पर हमले और 1984 में सिखों की हत्या का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर इन घटनाओं से जुड़े होने के आरोप लगाए।
नकोदर कांड और नशा तस्करी के आरोपों का भी जिक्र
चीमा ने अपने संबोधन में सुखपाल सिंह खैहरा और परगट सिंह का नाम लेते हुए नशा तस्करी से जुड़े आरोपों का उल्लेख किया। उन्होंने नकोदर में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के बाद हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए उस समय की पुलिस कार्रवाई और एक रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की। चीमा ने संबंधित लोगों के रिश्तेदारों और पुराने राजनीतिक संबंधों को लेकर भी आरोप लगाए। वित्त मंत्री ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष को नशे के मुद्दे पर सरकार से सवाल पूछने से पहले अपने पुराने कार्यकाल का जवाब देना चाहिए। उनके भाषण के दौरान सदन में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का माहौल बना रहा। चीमा के बयानों में लगाए गए आरोपों पर संबंधित नेताओं का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।
बाजवा बोले- सरकार को देने होंगे सवालों के जवाब
विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने विशेष सत्र के आयोजन को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार ने विशेष सत्र के नाम पर मजाक बना रखा है और विपक्ष सदन में अपने सवालों के जवाब मांगेगा। बाजवा के मुताबिक, कांग्रेस मुख्यमंत्री को लानत पत्र सौंपने की तैयारी में है और सरकार को पहले विपक्ष के सवालों का जवाब देना होगा। सत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का मुद्दा भी उठ सकता है। कांग्रेस पहले भी मतदाता सूची की विश्वसनीयता और पात्र मतदाताओं के नाम कटने को लेकर सवाल उठा चुकी है। इसके अलावा नशे, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, सरकारी कर्मचारियों की लंबित मांगों और पंजाब पर बढ़ते कर्ज जैसे विषयों पर विपक्ष सरकार को घेर सकता है।
सत्र के संभावित एजेंडे में पंजाब के नदी जल अधिकारों और बांध सुरक्षा कानून से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से संबंधित प्रस्ताव लाए जाने की चर्चा भी है। हालांकि, इन विषयों पर सदन में कब और किस रूप में चर्चा होगी, इसकी पुष्टि आधिकारिक कार्यसूची से ही होगी।
27 अक्टूबर को फिर शुरू होगी कार्यवाही
पंजाब विधानसभा के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, शुक्रवार की कार्यवाही के बाद 24 और 25 अक्टूबर को शनिवार और रविवार की छुट्टी रहेगी। सोमवार को राजपत्रित अवकाश के बाद मंगलवार, 27 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही फिर शुरू होगी। उस दिन विधायी कामकाज के बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने संबंधी प्रस्ताव पर कार्यवाही निर्धारित है। विशेष सत्र के पहले दिन, गुरुवार को सदन की कार्यवाही महज 9 मिनट 6 सेकंड चली थी। शुरुआत में दिवंगत लोगों को श्रद्धांजलि दी गई थी। इनमें परविंदर सिंह झोटा और संगरूर सड़क हादसे में जान गंवाने वाले आठ लोग शामिल थे। इसके बाद सदन की बैठक शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी गई थी।
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