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Punjab Haryana High Court: कर्मचारियों के वेतन पर हाईकोर्ट सख्त, तीन महीने में आदेश लागू करने के निर्देश

AAmandeep Singh
कर्मचारियों के वेतन पर हाईकोर्ट सख्त, तीन महीने में आदेश लागू करने के निर्देश
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के वेतन से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि अगर राज्य नियोक्ता एक ही कार्य के लिए अलग-अलग वेतन देता है तो यह मनमाना भेदभाव माना जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति कमजोर वर्ग के कर्मचारियों को मजबूरी में स्वीकार करनी पड़ती है, जिससे उन्हें जीविका और स्वाभिमान के बीच समझौता करना पड़ सकता है।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि इस निर्देश का पालन तीन महीने के भीतर सुनिश्चित किया जाए। अदालत की टिप्पणी से सरकारी और संविदा कर्मचारियों से जुड़े कई मामलों पर असर पड़ सकता है।

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समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत

इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा कि समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत संविधान की मूल भावना से जुड़ा है। यह सिद्धांत उस व्यवस्था को दर्शाता है जिस पर राज्य की प्रशासनिक संरचना आधारित है।

कोर्ट ने कहा कि जब एक ही प्रकार का कार्य करने वाले कर्मचारियों को अलग-अलग वेतन दिया जाता है तो यह भेदभाव की श्रेणी में आता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

कैथल भर्ती से जुड़ा मामला

यह मामला हरियाणा के कैथल जिले में सहायक लाइनमैन और पारी परिचारक के करीब 1100 पदों की भर्ती से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने इस भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लिया था और वेतन से संबंधित नियमों को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

सरकारी निर्देशों के अनुसार विभिन्न विभागों में कार्य कर रहे संविदा कर्मचारियों को या तो 1 जनवरी 2006 के बाद नियुक्त नियमित कर्मचारियों के शुरुआती वेतन का 50 प्रतिशत या न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948 के तहत तय वेतन, जो भी अधिक हो, देने का प्रावधान रखा गया था।

फैसले का कर्मचारियों पर असर

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद समान काम के बदले अलग-अलग वेतन देने की व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। यदि राज्य स्तर पर इस सिद्धांत को लागू किया जाता है तो संविदा और नियमित कर्मचारियों के वेतन से जुड़े मामलों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

कर्मचारी संगठनों का मानना है कि अदालत के इस रुख से ऐसे कर्मचारियों को राहत मिल सकती है जो लंबे समय से समान काम करने के बावजूद कम वेतन मिलने की शिकायत कर रहे हैं।

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