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Punjab News: बरनाला की राजनीति में बदलाव शुरू, गुरदीप बाठ की 'नीली पगड़ी' ने उड़ाई विरोधियों की नींद

VVinita Kohli
Punjab News: बरनाला की राजनीति में बदलाव शुरू, गुरदीप बाठ की 'नीली पगड़ी' ने उड़ाई विरोधियों की नींद
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बरनाला: पंजाब विधानसभा चुनाव-2027 अभी दूर हैं, लेकिन बरनाला की राजनीतिक फिजा में अभी से बदलाव की हवाएं चलनी शुरू हो गई हैं। राज्य की राजनीति में अकाली-भाजपा गठबंधन की चर्चाओं के बीच बरनाला निर्वाचन क्षेत्र में एक नया राजनीतिक समीकरण उभर रहा है। आम आदमी पार्टी से बागी होकर उप चुनाव में धमाल मचाने वाले गुरदीप सिंह बाठ के बदले हुए स्वरूप और ‘नीली पगड़ी’ ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। शिरोमणि अकाली दल के वर्तमान हलका प्रभारी कुलवंत सिंह कीतू पिछले लंबे समय से अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की उपस्थिति में कार्यकर्ताओं का बड़ा इकट्ठा करके अपना शक्ति प्रदर्शन किया था। हालांकि, सुखबीर बादल द्वारा दिए गए एक बयान ने कीतू खेमे में हलचल पैदा कर दी है। बादल ने संकेत दिया कि बरनाला में आम आदमी पार्टी रूपी बीमारी के इलाज के लिए किसी “कड़ी दवा के स्प्रे” की जरूरत है। राजनीतिक विशेषज्ञ इस कड़ी दवा को गुरदीप सिंह बाठ के रूप में देख रहे हैं।

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गुरदीप बाठ की नीली पगड़ी: सिर्फ पहनावा या राजनीतिक बदलाव?

उपचुनाव के दौरान निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे गुरदीप सिंह बाठ ने 18 हजार से अधिक वोट हासिल करके सभी पारंपरिक पार्टियों को हैरान कर दिया था। अब बाठ द्वारा अचानक सजाई गई नीली पगड़ी उनके शिरोमणि अकाली दल में शामिल होने के स्पष्ट संकेत दे रही है। कार्यकर्ताओं के साथ उनकी बढ़ती मुलाकातें और अकाली रंग में रंगे जाने की प्रक्रिया ने यह साबित कर दिया है कि वह 2027 की राजनीतिक लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

कुलवंत सिंह कीतू के लिए बढ़ी चुनौती

गुरदीप बाठ की सक्रियता ने पूर्व विधायक मलकियत सिंह कीतू के बेटे कुलवंत सिंह कीतू के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। जहां कीतू परिवार अपनी पुरानी वफादारी और पार्टी के प्रति सेवाओं के दम पर टिकट की उम्मीद लगाए बैठा है, वहीं बाठ का वोट बैंक और युवाओं में उनकी पकड़ पार्टी हाईकमान को पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर सकती है। यदि अकाली दल बरनाला में ‘जीतने वाले उम्मीदवार’ के फॉर्मूले पर चलता है, तो बाठ की दावेदारी बेहद मजबूत हो सकती है।

अकाली-भाजपा गठबंधन और सीटों का गणित

राज्य स्तर पर अकाली दल और भाजपा के संभावित गठबंधन ने बरनाला की राजनीति को और भी पेचीदा बना दिया है। यदि गठबंधन होता है, तो बरनाला सीट किसके हिस्से आएगी, यह एक बड़ा सवाल है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में गुरदीप सिंह बाठ की नीली पगड़ी ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि बरनाला की राजनीति अब दो-पक्षीय नहीं, बल्कि बहु-पक्षीय और दिलचस्प होने जा रही है।

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