चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान मंगलवार को 94 आम आदमी पार्टी विधायकों के साथ तीन वॉल्वो बसों में दिल्ली के लिए रवाना हुए। दिल्ली पहुंचकर वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से दोपहर 12:30 बजे मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात में मुख्यमंत्री अकेले शामिल होंगे, जबकि सभी विधायक राष्ट्रपति भवन के बाहर मौजूद रहेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री राज्यसभा के उन छह सांसदों के पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने के मामले को उठाएंगे और राइट टू रिकॉल कानून की मांग रखेंगे।
दिल्ली पहुंचने के बाद सभी विधायक मुख्यमंत्री के सरकारी आवास कपूरथला हाउस जाएंगे। यहीं पर सभी विधायक मुख्यमंत्री की राष्ट्रपति से मुलाकात का इंतजार करेंगे और उनके लिए लंच की व्यवस्था भी की गई है। मुख्यमंत्री निर्धारित समय पर राष्ट्रपति भवन जाएंगे और मुलाकात के बाद वापस लौटकर विधायकों के साथ बैठक करेंगे। इस बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।
पहले राघव चड्ढा समेत सांसद करेंगे मुलाकात
मुख्यमंत्री से पहले आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले सांसदों में शामिल राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे। ये नेता पार्टी छोड़ने के बाद उनके खिलाफ हुई कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताएंगे। वे सुरक्षा हटाने, फैक्ट्री पर रेड और एफआईआर जैसे मुद्दों को राष्ट्रपति के सामने उठाने की तैयारी में हैं।
इस दौरे को लेकर पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को ध्यान रखना चाहिए कि कहीं विधायकों की बसें भाजपा मुख्यालय की ओर न मुड़ जाएं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
कैबिनेट मंत्री का बयान
चंडीगढ़ से रवाना होते समय कैबिनेट मंत्री लाल चंद कटारूचक्क ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सभी विधायक राष्ट्रपति से मिलने जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति पंजाब के लोगों की भावनाओं को समझेंगी। उन्होंने कहा कि जो राज्यसभा सदस्य भाजपा में शामिल हुए हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और उनकी सदस्यता रद्द की जानी चाहिए। कटारूचक्क ने भाजपा पर नफरत और विभाजन की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पंजाब हमेशा अन्याय के खिलाफ खड़ा रहा है और इस बार भी राज्य के लोग एकजुट होकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति से मिलकर सातों राज्यसभा सदस्यों की सदस्यता तुरंत रद्द करने की मांग की जाएगी और यह दौरा इसी उद्देश्य से किया जा रहा है।
