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Punjab News: पंजाब में सरकारी बस सेवाओं पर संकट, 1000 से ज्यादा रूट प्रभावित होने की आशंका, काउंटरों से बसें हटाईं गई

VVinita Kohli
Punjab News: पंजाब में सरकारी बस सेवाओं पर संकट, 1000 से ज्यादा रूट प्रभावित होने की आशंका, काउंटरों से बसें हटाईं गई
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चंडीगढ़: पंजाब में सरकारी परिवहन व्यवस्था मंगलवार को गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। लंबित मांगों को लेकर पनबस के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी पहले ही हड़ताल पर हैं, जबकि अब पंजाब रोडवेज और पीआरटीसी के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों ने भी दोपहर 12 बजे से चक्का जाम करने का फैसला किया है। इसके चलते राज्य के सभी 23 जिलों में सरकारी बस सेवाओं पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।

पनबस के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी 9 जून से हड़ताल पर हैं और कई स्थानों पर बसों को काउंटरों से हटा लिया गया है। अब पीआरटीसी के कर्मचारियों के आंदोलन में शामिल होने से सरकार पर दबाव और बढ़ गया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। इसी वजह से उन्होंने संयुक्त रूप से बसों के पहिए रोकने का निर्णय लिया है। उनका दावा है कि यदि आम जनता को परेशानी होती है तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

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एक हजार से अधिक रूटों पर पड़ सकता है असर

राज्य में सरकारी परिवहन व्यवस्था का बड़ा हिस्सा कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के भरोसे चलता है। पंजाब में करीब 3 हजार पीआरटीसी बसें और लगभग 1600 पनबस बसें संचालित होती हैं। इन बसों को चलाने के लिए करीब 5500 कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी और लगभग 4500 रेगुलर कर्मचारी कार्यरत हैं। यदि कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी पूरी तरह काम बंद कर देते हैं तो आधे से अधिक सरकारी बसें सड़कों से गायब हो सकती हैं। इससे इंटरस्टेट और राज्य के भीतर चलने वाले 1000 से अधिक रूट प्रभावित होने की आशंका है।

हड़ताल ऐसे समय में हो रही है जब पंजाब में गर्मी की छुट्टियों का दौर चल रहा है। स्कूलों में अवकाश होने के कारण बड़ी संख्या में परिवार पर्यटन और रिश्तेदारों से मिलने के लिए यात्रा कर रहे हैं। ऐसे में यात्रियों को निजी बस सेवाओं पर निर्भर होना पड़ सकता है। इससे यात्रा खर्च बढ़ने के साथ-साथ सीटों की उपलब्धता पर भी दबाव बढ़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जहां सार्वजनिक परिवहन के विकल्प पहले से सीमित हैं।

छात्रों और मरीजों पर भी पड़ेगा असर

हड़ताल का प्रभाव केवल सामान्य यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। इस समय कई कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया जारी है, जिसके कारण छात्रों की आवाजाही बढ़ी हुई है। इसके अलावा अस्पतालों में इलाज और जांच के लिए जाने वाले मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। चंडीगढ़ स्थित प्रमुख चिकित्सा संस्थानों और अन्य बड़े अस्पतालों तक पहुंचने के लिए सरकारी बसें कई लोगों के लिए मुख्य साधन हैं। महिलाओं को मिलने वाली मुफ्त बस यात्रा सुविधा भी इस दौरान प्रभावित हो सकती है।

पंजाब रोडवेज और पनबस की दैनिक आय लगभग 2 से 3 करोड़ रुपये के बीच बताई जाती है। वहीं पीआरटीसी की प्रतिदिन की कमाई भी करीब 2.5 से 3 करोड़ रुपये तक पहुंचती है। यदि हड़ताल तीन दिन तक जारी रहती है और पूर्ण चक्का जाम की स्थिति बनी रहती है तो परिवहन विभाग को 12 से 15 करोड़ रुपये तक का सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे पहले हुए आंदोलनों के दौरान भी परिवहन निगमों को राजस्व में भारी गिरावट का सामना करना पड़ा था।

समाधान की कोशिशों पर टिकी निगाहें

हड़ताल के बीच सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत की संभावनाएं बनी हुई हैं। प्रशासन की कोशिश है कि किसी समझौते के जरिए बस सेवाओं को सामान्य किया जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके। हालांकि फिलहाल कर्मचारी संगठन अपने आंदोलन पर कायम हैं। ऐसे में पंजाब के लाखों यात्रियों की निगाहें सरकार और यूनियनों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हुई हैं।

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