Rabi Crops MSP Hike: गेहूं पर MSP 25 रुपये प्रति क्विंटल जबकि कुसुम पर 675 रुपये बढ़े! जानें सरसों पर कितनी मिलेगी इस सीजन
गेहूं पर MSP 25 रुपये प्रति क्विंटल जबकि कुसुम पर 675 रुपये बढ़े! जानें सरसों पर कितनी मिलेगी इस सीजन
Rabi Crops MSP Hike: रबी की बुआई सीजन की शुरुआत से ठीक पहले केंद्र सरकार ने देश के करोड़ों किसानों को बड़ी राहत दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार (30 सितंबर 2026) को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (CCEA MSP Approval Cabinet Decision) में इजाफे को हरी झंडी दे दी गई। सरकार के इस फैसले से आगामी रबी सीजन 2027-28 के दौरान किसानों को उनकी फसलों की बेहतर कीमत मिलना तय माना जा रहा है। (Mercury Transits Libra Uranus Retrograde Tauru)
सरकारी प्रवक्ता के मुताबिक, इस बार दलहन और तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उनके समर्थन मूल्य में विशेष ध्यान दिया गया है।
कुसुम और सरसों के एमएसपी में सबसे बड़ा उछाल
मंत्रिमंडल द्वारा तय की गई नई दरों के तहत सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम (Safflower) के एमएसपी में देखने को मिली है, जिसमें प्रति क्विंटल 675 रुपये का भारी इजाफा किया गया है। (Mustard Repseed MSP Hike 2027-28) वहीं, देश में तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहन देने के मकसद से रेपसीड और सरसों के समर्थन मूल्य में भी 413 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।
दालों की बात करें तो मसूर (Safflower Lentil Barley MSP Rates) के समर्थन मूल्य में 390 रुपये प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है। इसके अलावा, चना के एमएसपी में 83 रुपये प्रति क्विंटल और जौ के दाम में 136 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है।
मुख्य रबी फसल गेहूं के दामों में भी इजाफा
देश की सबसे मुख्य रबी फसल गेहूं (Wheat MSP Price Increase India) के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी प्रति क्विंटल 25 रुपये की वृद्धि को मंजूरी दी गई है। हालांकि गेहूं के दाम में बढ़ोतरी अन्य तिलहनी फसलों के मुकाबले थोड़ी कम है, लेकिन विशाल रकबे और भारी उत्पादन को देखते हुए इससे देश भर के गेहूं उत्पादक किसानों को सीधा लाभ पहुंचेगा।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार (Narendra Modi Cabinet Decision Farmers) का यह कदम किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ दलहन और तिलहन की ओर आकर्षित करने में मददगार साबित होगा, जिससे देश की खाद्य तेलों पर विदेशी निर्भरता को कम किया जा सके।
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