रेवाड़ी। यदि आप अगले महीने की शुरुआत में रेल सफर की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल के तहत आने वाले दौसा स्टेशन पर नॉन-इंटरलॉकिंग के चलते बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने का काम शुरू किया जा रहा है। इस तकनीकी ब्लॉक के कारण दिल्ली-जयपुर रेल मार्ग पर यातायात प्रभावित रहेगा। रेलवे प्रशासन ने साफ किया है कि सुरक्षा और विकास कार्यों के मद्देनजर 4 अप्रैल को कई लंबी दूरी की ट्रेनों को उनके निर्धारित मार्ग के बजाय डायवर्टेड रूट से चलाया जाएगा, जबकि 5 अप्रैल को कुछ पैसेंजर स्पेशल ट्रेनें पटरी पर नहीं उतरेंगी।
4 अप्रैल: अलवर-जयपुर के बजाय रींगस होकर दौड़ेंगी ट्रेनें
दौसा में काम के चलते 4 अप्रैल को रेवाड़ी-अलवर-जयपुर खंड की व्यस्तता कम की जाएगी। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन के अनुसार, इस दिन साबरमती-दिल्ली (12915) साबरमती से चलकर फुलेरा-जयपुर-अलवर के बजाय फुलेरा-रींगस-रेवाड़ी के रास्ते अपनी मंजिल तक पहुंचेगी। इसी तरह, काठगोदाम-जैसलमेर (15014) और वाराणसी-साबरमती (20964) को भी डायवर्ट किया गया है।
राहत की बात यह है कि रूट बदलने के बावजूद यात्रियों की सुविधा के लिए इन ट्रेनों का नारनौल, नीमकाथाना और रींगस जैसे प्रमुख स्टेशनों पर वैकल्पिक ठहराव (Stoppage) दिया गया है, ताकि बीच के स्टेशनों के यात्रियों को ज्यादा परेशानी न हो।
5 अप्रैल: जयपुर-रेवाड़ी स्पेशल ट्रेनों पर ‘ब्रेक’
ब्लॉक का सबसे ज्यादा असर 5 अप्रैल को देखने को मिलेगा, जब स्थानीय और दैनिक यात्रियों की पसंदीदा ‘स्पेशल’ ट्रेनें रद्द रहेंगी। रेलवे की ओर से जारी आधिकारिक सूची के मुताबिक, गाड़ी संख्या 09635 (जयपुर-रेवाड़ी स्पेशल) और वापसी में गाड़ी संख्या 09636 (रेवाड़ी-जयपुर स्पेशल) को 5 अप्रैल के लिए पूरी तरह निरस्त कर दिया गया है। अचानक हुए इस बदलाव से उन दैनिक यात्रियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो नौकरी या व्यवसाय के सिलसिले में प्रतिदिन इन शहरों के बीच आवाजाही करते हैं।
रेलवे की अपील: ‘चेक करके ही निकलें घर से’
रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की असुविधा से बचने के लिए रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट, पूछताछ नंबर 139 या ‘नेशनल ट्रेन इंक्वायरी सिस्टम’ (NTES) पर अपनी ट्रेन का करंट स्टेटस जरूर चेक कर लें। ब्लॉक के दौरान यात्रियों को होने वाली असुविधा के लिए रेलवे ने खेद जताया है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि रेल यात्रा को सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए यह तकनीकी कार्य अनिवार्य है।

