Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

Rajaund Water Crisis: भीषण गर्मी में बूंद-बूंद को तरसा राजौंद, एक दिन छोड़कर आ रहा नलों में पानी

AAmandeep Singh
Rajaund Water Crisis: भीषण गर्मी में बूंद-बूंद को तरसा राजौंद, एक दिन छोड़कर आ रहा नलों में पानी
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

राजौंद। (नरेश पुहाल) मई महीने की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच कैथल जिले का कस्बा राजौंद बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हो गया है। कस्बे के लोग इन दिनों कुदरत के कहर और प्रशासनिक नाकामी की दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। दरअसल, इलाके के मुख्य जलघरों (वाटर वर्क्स) के टैंकों में पानी का स्तर खतरे के निशान तक नीचे चला गया है। नतीजा यह है कि जनस्वास्थ्य विभाग ने पानी की रोजाना होने वाली सप्लाई पर कैंची चला दी है और अब पूरे कस्बे में एक दिन छोड़कर पानी की किल्लत भरी आपूर्ति की जा रही है।

नलों में पानी कम, हवा ज्यादा; गृहणियों का रसोई संभालना हुआ दूभर

विज्ञापन

स्थानीय निवासी रजनी, किताबो, चतरो, नरेश, सेमी, कर्म और लाली सहित दर्जनों लोगों ने अपनी भड़ास निकालते हुए कहा कि यह समस्या कोई आज की नहीं है, बल्कि पिछले कई महीनों से प्रशासन और संबंधित विभाग इस बदहाली को दूर करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। लोगों का कहना है कि एक दिन के लंबे इंतजार के बाद जब नलों में पानी आता भी है, तो उसका प्रेशर (दबाव) इतना कम होता है कि घरों की छत पर रखी टंकियां भरना तो ख्वाब जैसा है, रसोई के बर्तनों को भी पूरा नहीं भरा जा सकता। स्थानीय गृहणियों ने बताया कि पानी न आने से खाना पकाने, कपड़े धोने और मवेशियों को नहलाने जैसे रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए उन्हें भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। लोग घंटों नलों के पास उम्मीद लगाए खड़े रहते हैं, लेकिन हाथ सिर्फ निराशा लगती है।

प्रशासनिक सुस्ती पर भड़के ग्रामीण, स्थायी समाधान की मांग

इस भीषण तपिश में पानी के लिए मचे त्राहि-त्राहि के बीच स्थानीय जनता में जनस्वास्थ्य विभाग के खिलाफ भारी रोष पनप रहा है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि गर्मियों का सीजन आने से पहले बड़े-बड़े दावे करने वाला विभाग जल प्रबंधन को दुरुस्त करने में पूरी तरह फेल साबित हुआ है। गुस्साए लोगों ने कहा कि यदि नहरों या पीछे से पानी की उपलब्धता कम है, तो जिला प्रशासन की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह प्रभावित कॉलोनियों और वार्डों में पानी के टैंकर भिजवाए। लेकिन स्थिति यह है कि यहां नलों की पाइपलाइन में पानी से ज्यादा हवा का प्रेशर आ रहा है, जिससे मीटर तो घूम रहे हैं पर बाल्टियां खाली हैं।

राजौंद के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जनस्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों और जिला उपायुक्त से गुहार लगाई है कि इस गंभीर समस्या का तुरंत संज्ञान लिया जाए। लोगों ने मांग की है कि जलघरों में पानी का स्टॉक बढ़ाया जाए और सप्लाई के दौरान पानी का प्रेशर ठीक किया जाए ताकि तपते राजौंद के आम जनमानस को इस हाहाकारी गर्मी में थोड़ी राहत मिल सके।

विज्ञापन

कैथल की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।