Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

राज्यसभा सांसद राजेंद्र गुप्ता द्वारा संसद में नौकरशाही के लिए स्पष्ट 'सोशल मीडिया नीति' बनाने की मांग

VVinita Kohli
राज्यसभा सांसद राजेंद्र गुप्ता द्वारा संसद में नौकरशाही के लिए स्पष्ट 'सोशल मीडिया नीति' बनाने की मांग
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

बरनाला: राज्यसभा सांसद राजेंद्र गुप्ता ने आज संसद में देश की नौकरशाही और उच्च सरकारी पदों पर बैठे अधिकारियों द्वारा निजी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बढ़ते उपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकारी कामकाज को निजी प्रचार के लिए इस्तेमाल करने का चलन प्रशासनिक नियमों के खिलाफ है, जिसके लिए सरकार को तुरंत एक व्यापक और सख्त ‘सोशल मीडिया नीति’ तैयार करनी चाहिए। संसद में हुई चर्चा के दौरान राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि पिछले कुछ समय से यह देखने में आ रहा है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और यहाँ तक कि न्यायपालिका से जुड़े कई अधिकारी अपनी सरकारी ड्यूटी के दौरान की जाने वाली कार्रवाइयों को अपने निजी सोशल मीडिया खातों पर लगातार साझा कर रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक संचार आवश्यक है, लेकिन अधिकारियों द्वारा की जाने वाली व्यक्तिगत प्रस्तुति और संस्थागत प्रचार के बीच एक स्पष्ट अंतर होना अनिवार्य है। गुप्ता ने विशेष रूप से नोट किया कि कई अधिकारी छापेमारी, निरीक्षण या प्रवर्तन अभियानों के वीडियो बहुत ही नाटकीय अंदाज में पेश करते हैं। इन वीडियो में स्टाइलिश विजुअल और बैकग्राउंड म्यूजिक का उपयोग किया जाता है, जो एक गंभीर सरकारी कार्रवाई के बजाय फिल्मी प्रचार जैसा प्रतीत होता है। 

विज्ञापन

उन्होंने कहा कि कई बार महत्वपूर्ण जानकारी औपचारिक सरकारी चैनलों के माध्यम से जारी होने से पहले ही अधिकारियों के निजी खातों पर पहुँच जाती है, जो सरकारी गोपनीयता और प्रोटोकॉल का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि ऐसी नीति बनाई जाए जिससे सरकारी और निजी सोशल मीडिया के उपयोग के बीच की सीमाएँ स्पष्ट हों। सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की डिजिटल मीडिया के प्रति जवाबदेही तय हो। सरकारी जानकारी की गोपनीयता भंग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान हो और संवेदनशील या उप-न्यायिक जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

पुराने नियमों में संशोधन और नए दिशा-निर्देश तय करना समय की मुख्य मांग

राज्यसभा सांसद ने सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया कि वर्तमान ‘ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स-1968’ और ‘सेंट्रल सिविल सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स-1964’ उस समय बनाए गए थे जब सोशल मीडिया का नामो-निशान भी नहीं था। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग की चुनौतियों को देखते हुए इन पुराने नियमों में संशोधन करना और नए दिशा-निर्देश तय करना समय की मुख्य जरूरत है।

न्यायिक मामलों की संवेदनशीलता

राजेंद्र गुप्ता ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायिक कार्यवाही से जुड़ी जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा करना बेहद संवेदनशील हो सकता है। उन्होंने मांग की कि नई नीति में ऐसी जानकारी की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान होने चाहिए ताकि न्याय प्रक्रिया पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

सरकारी जानकारी की गोपनीयता और सुरक्षा को खतरा

राजेंद्र गुप्ता ने महत्वपूर्ण बिंदु उठाते हुए कहा कि अधिकारियों द्वारा निजी खातों पर साझा की जाने वाली तस्वीरें या वीडियो कई बार ‘सरकारी गोपनीयता अधिनियम’ के अप्रत्यक्ष उल्लंघन तक जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि संवेदनशील कार्यालयों, बैठकों या फाइलों के दृश्य सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक होने से प्रशासनिक सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए यह तय करना अनिवार्य है कि कौन सी जानकारी सार्वजनिक होगी और उसका आधिकारिक माध्यम क्या होगा, ताकि राष्ट्रीय और प्रशासनिक हितों की रक्षा हो सके।

व्यक्तिगत ब्रांडिंग बनाम संस्थागत प्रतिष्ठा

उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में ‘संस्था’ व्यक्ति से बड़ी होती है। लेकिन आजकल अधिकारी सरकारी उपलब्धियों को अपनी व्यक्तिगत सफलता के रूप में पेश करने की राह पर चल पड़े हैं। जब कोई अधिकारी सरकारी खर्च पर किए गए कार्यों को अपनी निजी ‘ब्रांडिंग’ के लिए उपयोग करता है, तो इससे संस्था की प्रतिष्ठा घटती है और व्यक्तिवाद हावी हो जाता है। गुप्ता के अनुसार, अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि वे लोक सेवक हैं, न कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर।

डिजिटल जवाबदेही का नया मॉडल

राज्यसभा सांसद गुप्ता ने सरकार को सुझाव दिया कि डिजिटल इंडिया के इस युग में एक ऐसा ‘जवाबदेही मॉडल’ तैयार किया जाए, जहाँ अधिकारी सोशल मीडिया का उपयोग केवल लोगों की शिकायतें सुनने और विभागीय जानकारी साझा करने के लिए ही करें। उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी नियमों का उल्लंघन कर अपनी सेवा के अनुशासन को भंग करता है, तो उसके विरुद्ध सख्त विभागीय कार्रवाई का प्रावधान होना चाहिए। यह नीति न केवल नौकरशाही को अनुशासन में रखेगी, बल्कि प्रशासन में पेशेवर दृष्टिकोण को भी मजबूत करेगी।

विज्ञापन

पंजाब की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।