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गणतंत्र दिवस: संस्कृति मंत्रालय की झांकी करेगी ‘भारत माता’ को नमन , नई पीढ़ी ‘जेन जेड’ ‘वंदे मातरम्’ गाते आएंगे नजर

JJagmarg Desk
गणतंत्र दिवस: संस्कृति मंत्रालय की झांकी करेगी ‘भारत माता’ को नमन , नई पीढ़ी ‘जेन जेड’ ‘वंदे मातरम्’ गाते आएंगे नजर
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नई दिल्ली: इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर कर्तव्य पथ पर निकलने वाली संस्कृति मंत्रालय की झांकी ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रवादी भावना को भव्य रूप में प्रस्तुत करेगी। इस झांकी के माध्यम से जहां स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को सम्मान दिया जाएगा, वहीं नई पीढ़ी यानी ‘जेन जेड’ को भी इस ऐतिहासिक राष्ट्रगीत से जोड़ा जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, संस्कृति मंत्रालय की झांकी का विषय ‘वंदे मातरम्: एक राष्ट्र की आत्मा की पुकार’ होगा। झांकी के अग्र भाग में ‘वंदे मातरम्’ की मूल पांडुलिपि के निर्माण को दर्शाया जाएगा और इसके नीचे गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की छवि प्रदर्शित की जाएगी। झांकी 1928 की एक दुर्लभ रिकॉर्डिंग की धुन पर आगे बढ़ेगी, जिसे मराठी सिनेमा और रंगमंच के प्रसिद्ध अभिनेता एवं गायक विष्णुपंत पगनीस ने अपनी आवाज दी थी। यह रिकॉर्डिंग औपनिवेशिक काल की मानी जाती है और इसे ‘वंदे मातरम्’ की सबसे साहसी प्रस्तुतियों में से एक कहा जाता है।

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अधिकारियों ने बताया कि उस दौर में सार्वजनिक रूप से गीत के केवल पहले दो अंतरों के गायन की अनुमति थी, लेकिन विष्णुपंत पगनीस ने साहस दिखाते हुए पहले अंतिम दो और फिर शुरुआती दो अंतरे गाए थे। राग सारंग में प्रस्तुत इस संस्करण को उस समय ‘राष्ट्रगीत’ कहा गया और इसे राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने वाली एक सशक्त कलात्मक अभिव्यक्ति माना गया। झांकी के मध्य भाग में पारंपरिक वेशभूषा में कलाकार भारत की लोक-सांस्कृतिक विविधता को दर्शाएंगे। वहीं, कुछ कलाकार आधुनिक परिधानों में ‘जेन जेड’ का प्रतिनिधित्व करते हुए ‘वंदे मातरम्’ का गायन करते नजर आएंगे। इसके माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया जाएगा कि यह राष्ट्रगीत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि आज और आने वाली पीढ़ियों की भी प्रेरणा है।

झांकी के पीछे के हिस्से में कला-स्थापनाओं की एक शृंखला के जरिए ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक यात्रा को दिखाया जाएगा। इसमें विष्णुपंत पगनीस की रिकॉर्डिंग, स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान और राष्ट्रीय तिरंगा थामे ‘भारत माता’ की भव्य छवि शामिल होगी। झांकी के लंबे निचले पैनल में नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर, स्वतंत्रता सेनानी एवं दार्शनिक श्री अरबिंदो और स्वतंत्रता आंदोलन की प्रसिद्ध त्रयी लाल-बाल-पाल—लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल—की छवियां प्रदर्शित की जाएंगी। कर्तव्य पथ पर दर्शक दीर्घाओं की पृष्ठभूमि में ‘वंदे मातरम्’ की शुरुआती पंक्तियों पर आधारित ऐतिहासिक चित्रकलाएं लगाई जाएंगी। ये चित्र कलाकार तेजेंद्र कुमार मित्रा द्वारा बनाए गए थे और वर्ष 1923 में प्रकाशित हुए थे। इसके साथ ही बड़ी स्क्रीन पर ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े वीडियो भी प्रदर्शित किए जाएंगे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस बार गणतंत्र दिवस परेड में कुल 30 झांकियां शामिल होंगी, जिनमें 17 झांकियां राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की तथा 13 झांकियां विभिन्न मंत्रालयों और सेवाओं की होंगी।

‘वंदे मातरम्’ पहली बार सात नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ था और बाद में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया। इसे 1896 में कांग्रेस अधिवेशन में पहली बार रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत जन-आंदोलन का प्रतीक बना और अंततः 1950 में संविधान सभा ने इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह झांकी ‘भारत माता’, ‘वंदे मातरम्’ की अमर भावना और इसकी 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को नमन है। उन्होंने कहा कि उद्देश्य यह है कि परेड के दौरान सलामी मंच के सामने मिलने वाले सीमित समय में भी नई पीढ़ी को इस ऐतिहासिक विरासत से जोड़ा जा सके और ‘वंदे मातरम्’ में निहित एकता, त्याग और भक्ति के संदेश को आगे बढ़ाया जा सके।

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