Rohtak BSF Jawans Demise: रोहतक के फरमाणा गांव में पसरा मातम, मणिपुर में BSF जवान सुरेंद्र सिंह का निधन, सैन्य सम्मान से अंतिम संस्कार
रोहतक के फरमाणा गांव में पसरा मातम, मणिपुर में BSF जवान सुरेंद्र सिंह का निधन
Rohtak BSF Jawans Demise: देश की सीमाओं की सुरक्षा में तैनात रोहतक जिले के लाल ने अपनी मातृभूमि के लिए प्राण न्योछावर कर दिए। महम उपमंडल के फरमाणा गांव के निवासी और सीमा सुरक्षा बल (BSF) में एएसआई (सहायक उपनिरीक्षक) के पद पर कार्यरत सुरेंद्र सिंह का बीते 21 सितंबर को मणिपुर में ड्यूटी के दौरान अचानक दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। जैसे ही जवान के शहादत की खबर गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और उनके भाई व रिश्तेदार पार्थिव शरीर को लेने के लिए तुरंत मणिपुर रवाना हो गए थे। बुधवार को जब बीएसएफ की टुकड़ी पार्थिव देह को तिरंगे में लपेटकर गांव फरमाणा लेकर पहुंची, तो गांव का माहौल बेहद गमगीन हो गया। शहीद जवान के अंतिम दर्शनों के लिए आसपास के गांवों से भी भारी संख्या में लोग फरमाणा पहुंचे।
‘जब तक सूरज-चांद रहेगा, सुरेंद्र तेरा नाम रहेगा’
जैसे ही बीएसएफ का सैन्य वाहन जवान के पार्थिव शरीर को लेकर गांव की सीमा में दाखिल हुआ, ग्रामीणों और युवाओं ने ‘सुरेंद्र सिंह अमर रहे’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाकर आसमान गुंजा दिया। पति के अंतिम दर्शन कर पत्नी बेसुध हो गईं, वहीं मासूम बच्चों और परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। गांव की हर महिला और बुजुर्ग की आंखें इस दुखद घड़ी में नम नजर आईं।
सुरेंद्र सिंह के पार्थिव शरीर को पहले उनके गृह निवास ले जाया गया, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के बाद अंतिम यात्रा निकाली गई। गांव के श्मशान घाट तक निकली इस अंतिम यात्रा में हर कोई अपने जांबाज सिपाही को नम आंखों से विदाई देने उमड़ पड़ा।
सैन्य व राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन
श्मशान घाट पर BSF की सशस्त्र टुकड़ी ने हवा में गोलियां दागकर अपने साथी को मातमी धुन के साथ अंतिम सलामी दी। प्रशासनिक अमले की ओर से महम थाना एसएचओ सतपाल सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
इसके बाद परिजनों की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जवान सुरेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि सुरेंद्र सिंह बेहद हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे, जब भी वे छुट्टी पर घर आते थे तो गांव के युवाओं को देशसेवा के लिए प्रेरित किया करते थे। उनका जाना न केवल परिवार बल्कि पूरे फरमाणा गांव के लिए एक कभी न पूरी होने वाली क्षति है।
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