Rohtak News: हरियाणा के पावर सेक्टर को निजी हाथों में सौंपने की सरकारी कोशिशों के खिलाफ बिजली कर्मचारियों ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। रोहतक जिले के महम सब-डिवीजन में बुधवार को ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन के बैनर तले बड़ी संख्या में कर्मचारी सड़कों पर उतरे। (Rohtak Meham News) आक्रोशित कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और निजीकरण से संबंधित सरकारी ड्राफ्ट की प्रतियां जलाकर अपना कड़ा विरोध जताया।
कर्मचारियों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपनी मनमानी नहीं रोकी, तो बुधवार आधी रात 12 बजे के बाद से पूरे क्षेत्र में बिजली सेवाएं ठप पड़ सकती हैं।
समझौते के बावजूद 19 अक्टूबर को लिया गया फैसला, कर्मचारियों में भारी नाराजगी
प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे फोरमैन बलजीत और स्टेट ऑर्गेनाइजेशन के प्रतिनिधि मनदीप शर्मा ने बताया कि सरकार की नीयत बिजली कर्मचारियों को लेकर ठीक नहीं है। कर्मचारियों का आरोप है कि करीब दो महीने पहले राज्य सरकार के आला अधिकारियों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में कई अहम मांगों पर सहमति बन चुकी थी।
इसके बावजूद, बीती 19 अक्टूबर को सरकार ने वादाखिलाफी करते हुए गुरुग्राम और नूंह जैसे आर्थिक व रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों में निजी कंपनियों को पावर सप्लाई का लाइसेंस देने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी। (Haryana Power Privatization) मनदीप शर्मा का कहना है कि सरकार के इस मनमाने रवैये से न केवल लाखों कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटकेगा, बल्कि आम जनता पर भी महंगे टैरिफ का बोझ पड़ेगा।
ब्रेकडाउन हुआ तो नहीं होगी मरम्मत, ‘जो स्थिति जहां है, वहीं रहेगी’
यूनियन नेता प्रवेश ने बताया कि बुधवार को कर्मचारियों ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए दो घंटे का सांकेतिक रोष प्रदर्शन किया। इसके बाद योजना के मुताबिक रात 12 बजे से सभी कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएंगे।
कर्मचारियों ने इस बात के भी साफ संकेत दे दिए हैं कि हड़ताल की अवधि के दौरान यदि कहीं भी कोई बिजली की लाइन ट्रिप होती है, ट्रांसफॉर्मर फुंकता है या कोई तकनीकी खराबी (फॉल्ट) आती है, तो कर्मचारी उसे ठीक करने नहीं जाएंगे। जो लाइन जिस स्थिति में चल रही होगी, वह उसी स्थिति में छोड़ दी जाएगी। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक सरकार गुरुग्राम और नूंह में निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाती और उनकी जायज मांगों को लागू नहीं करती, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है।

