October 5, 2026

रुड़की में बड़ा हादसा: लॉ कॉलेज की दीवार और लेंटर ढहे, JCB से निकाला गया मलबे में दबा PAC जवान

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रुड़की में बड़ा हादसा: लॉ कॉलेज की दीवार और लेंटर ढहे, JCB से निकाला गया मलबे में दबा PAC जवान

रुड़की में भरभराकर गिरी लॉ कॉलेज की बिल्डिंग

Roorkee building collapse: उत्तराखंड के रुड़की में सोमवार दोपहर एक निजी लॉ कॉलेज की बिल्डिंग का हिस्सा अचानक भरभराकर गिर गया। धनोरी स्थित अमृत लॉ कॉलेज परिसर में पिरान कलियर मेले की ड्यूटी के लिए PAC की प्लाटून ठहरी हुई थी। दोपहर करीब 1 बजे प्लाटून का जवान आदिल दूसरी मंजिल पर बने बाथरूम की तरफ टॉयलेट के लिए गया था, तभी अचानक वहां का लेंटर गिर गया। लेंटर गिरने के साथ ही बाथरूम की ओर बनी दीवारें भी भरभराकर नीचे आ गईं। आदिल उसी मलबे के नीचे दब गया। अचानक बिल्डिंग का हिस्सा गिरने से कॉलेज परिसर में अफरा-तफरी मच गई और वहां मौजूद पुलिसकर्मियों तथा PAC जवानों ने तुरंत रेस्क्यू शुरू कर दिया। हादसे की सूचना मिलते ही पिरान कलियर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। कलियर कोतवाल कमल मोहन भंडारी के नेतृत्व में पुलिस फोर्स ने स्थानीय लोगों और PAC जवानों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया। शुरुआत में जवान को सुरक्षित निकालने के लिए हाथों से मलबा हटाकर उसकी तलाश की गई।

मलबे के अंदर जवान के दबे होने की जानकारी मिलने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन तेज किया गया। शुरुआत में पुलिसकर्मियों, PAC जवानों और स्थानीय लोगों ने सावधानी से हाथों से मलबा हटाया, ताकि अंदर दबे जवान को किसी तरह की अतिरिक्त चोट न पहुंचे। जब हाथों से मलबा हटाने में ज्यादा समय लगने लगा तो मौके पर JCB मशीन बुलाई गई। मशीन की मदद से मलबे को हटाने का काम शुरू किया गया। इस दौरान रेस्क्यू टीम लगातार सावधानी बरतती रही, क्योंकि मलबे के नीचे जवान के दबे होने के कारण भारी मशीन का इस्तेमाल बेहद सतर्कता से किया जा रहा था।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान SDRF की टीम भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस, SDRF, PAC जवानों और स्थानीय लोगों ने मिलकर बचाव अभियान चलाया। काफी मशक्कत के बाद जवान आदिल को मलबे से बाहर निकाल लिया गया। जवान को जब मलबे से बाहर निकाला गया, उस समय उसकी सांसें चल रही थीं। हालांकि उसे गंभीर चोटें आई थीं और उसकी हालत चिंताजनक बताई गई। पुलिस ने बिना समय गंवाए घायल जवान को उपचार के लिए अस्पताल भेजा।

 

 

भूमानंद अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद एम्स ऋषिकेश रेफर

मलबे से निकाले जाने के बाद घायल PAC जवान आदिल को तत्काल भूमानंद अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार किया और उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे हायर सेंटर रेफर करने का फैसला लिया। इसके बाद जवान को एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया। फिलहाल उसका इलाज एम्स ऋषिकेश में कराया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन की टीम हादसे के बाद मौके पर मौजूद रही और बिल्डिंग के गिरे हुए हिस्से का निरीक्षण किया।

यह हादसा उस समय हुआ जब PAC की प्लाटून के ज्यादातर जवान अपनी ड्यूटी पर गए हुए थे। पिरान कलियर में मेला चल रहा है, जिसके चलते सुरक्षा व्यवस्था के लिए PAC की प्लाटून को अमृत लॉ कॉलेज परिसर में ठहराया गया था। इसी दौरान आदिल टॉयलेट के लिए दूसरी मंजिल पर गया था। जिस हिस्से में बाथरूम बना हुआ था, वहां अचानक लेंटर गिरने के बाद दीवारें भी नीचे आ गईं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बिल्डिंग का हिस्सा किस वजह से अचानक गिरा। पुलिस और प्रशासन की टीम घटना की जानकारी जुटा रही है।

 

 

80 के दशक में बनी बताई जा रही बिल्डिंग, हादसे की वजह की जांच

अमृत लॉ कॉलेज एक निजी लॉ कॉलेज है और जिस बिल्डिंग का हिस्सा गिरा है, वह काफी पुरानी बताई जा रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार बिल्डिंग का निर्माण 1980 के दशक में हुआ था। सोमवार को इसी पुरानी बिल्डिंग के बाथरूम की ओर का हिस्सा अचानक ढह गया। लेंटर गिरने के बाद उसके साथ दीवारें भी नीचे आ गईं, जिससे जवान मलबे में दब गया। फिलहाल पुलिस और प्रशासन यह पता लगाने में जुटे हैं कि बिल्डिंग का हिस्सा अचानक गिरने के पीछे क्या वजह रही।

पुरानी बिल्डिंग होने के कारण उसकी संरचना और मौके की स्थिति की भी जांच की जा रही है। हालांकि, अभी तक अधिकारियों की ओर से बिल्डिंग गिरने की कोई अंतिम वजह नहीं बताई गई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा निर्माण संबंधी कमजोरी, बिल्डिंग की पुरानी स्थिति या किसी अन्य कारण से हुआ। हादसे के बाद कॉलेज परिसर और आसपास के इलाके में भी लोगों की भीड़ जुट गई। पुलिस ने रेस्क्यू के दौरान मौके पर व्यवस्था संभाली और मलबा हटाकर घायल जवान को बाहर निकाला। फिलहाल सबसे बड़ी चिंता घायल PAC जवान के इलाज और उसकी हालत को लेकर है। पुलिस और प्रशासन की टीमें घटना की जांच कर रही हैं। बिल्डिंग के जिस हिस्से में हादसा हुआ, उसकी स्थिति का भी निरीक्षण किया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि परिसर का कोई और हिस्सा जोखिम में तो नहीं है।

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